सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु। सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु॥ सब लोग कठिनाइयों को पार करें। सब लोग कल्याण को देखें। सब लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र आनन्दित हों सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥ सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो। बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं! सदाचार - मंगलकामना!
बहुत ही प्यारी रचना ! ख़्वाबों के पूनियों को आँखों से कातने का नितांत मौलिक बिम्ब बहुत अच्छा लगा ! आपके इतनी मेहनत से काते सभी स्वप्न साकार हों यही कामना है ! इतनी खूबसूरत रचना के लिये आभार एवं शुभकामनायें !
अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में तय हो सफ़र इस नए बरस का प्रभु के अनुग्रह के परिमल से सुवासित हो हर पल जीवन का मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि शांति उल्लास की आप पर और आपके प्रियजनो पर.
आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं. सादर, डोरोथी.
बेहतर रचना.... संगीता जी आपको २०११ की हार्दिक शुभकामनाएं। नववर्ष तो प्रतिपदा पर मनाता हूं तो नववर्ष की शुभकामनाएं तब ही दूंगा.... फिलहाल ईश्वर से कामना है कि आप खुश रहें और अपनी बेहतरीन रचनाओं से ब्लॉक पाठकों को खुश रखें।
सुदूर खूबसूरत लालिमा ने आकाशगंगा को ढक लिया है, यह हमारी आकाशगंगा है, सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं, कहां से आ रही है आखिर यह खूबसूरत रोशनी, आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है, किसने बिखरी ये रोशनी, कौन है वह, मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे, आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं, मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर, उनमें से एक है पृथ्वी, जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य सैकड़ों देशों में, इन्हीं में एक है महान सभ्यता, भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए, मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव, भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है रोशनी का उत्सव, एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण, नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार, शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय, यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां... -डॉ एपीजे अब्दुल कलाम
सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें, और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े . नव - वर्ष २०११ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
जय श्री कृष्ण...आपका लेखन वाकई काबिल-ए-तारीफ हैं....नव वर्ष आपके व आपके परिवार जनों, शुभ चिंतकों तथा मित्रों के जीवन को प्रगति पथ पर सफलता का सौपान करायें .....मेरी कविताओ पर टिप्पणी के लिए आपका आभार ...आगे भी इसी प्रकार प्रोत्साहित करते रहिएगा ..!!
शुक्रिया...इतना अच्छा लिखने के लिए!!हम सभी बुनकर की श्रेणी में ही आते है..कभी शब्द बुनते हैं और तो कभी ख्वाब...सूत मन माफिक हों या न हों...कातना बदस्तूर ज़ारी है
bus..kabhi na kabhi to man mafik milega hi....ye sochkar hi to hum zindagi me badhte rehte hain...jina isi ka nam hai...khubsurat rachna k kie badhai... poonam
बस काटना जारी रहे .मन माफिक सूत मिलता रहेगा :).और रेशम भी बनेगा .
ReplyDeleteनव वर्ष में बहुत से रेशम की दुआओं के साथ
शिखा.
ख़्वाबों की पुनिया को
ReplyDeleteआँखों की तकली से
काता है शिद्दत से
सारी ज़िंदगी मैंने
कभी तो मन माफिक
सूत मिले ,
आज भी कातना
बदस्तूर जारी है ...
उफ़!कितना गहन लिख दिया…………सीधा दिल को छू गया ………सही कह रही हैं आज भी जारी है देखें कब मुराद पूरी होती है।
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।
ReplyDelete
ReplyDeleteकातना सक्रियता की निशानी है।
सुंदर कविता के लिए आभार
नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं
चुड़ैल से सामना-भुतहा रेस्ट हाउस और सन् 2010 की विदाई
बस चलते रहिये , मंजिल अपने आप मिल जाएगी ।
ReplyDeleteसुन्दर रचना ।
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें ।
aapki ye dua kabool ho..aamin!
ReplyDeleteसुंदर कविता के लिए आभार| नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।
ReplyDeleteयही सूत हमें उत्साह से बाँधता रहता है।
ReplyDeleteयही सूत हमें उत्साह से बाँधता रहता है।
ReplyDeleteसुंदर कविता के लिए आभार
आपको नव वर्ष की हृार्दिक शुभकामनाये
खुबसूरत रचना ! नये साल की अनंत शुभकामनायें !
ReplyDeletekoshishe aur khawaab kabhi na kabhi rang laate hain....aapke khaab jaroor pure honge. yahi is naye varsh me apke liye dua hai.
ReplyDeleteaneko shubh-kamnaayen....naya saal magalmay ho!
ReplyDeleteकितना ख़ूबसूरत लिखा है...
ReplyDeleteये कातते जाना जारी रहे..सतत, सहज, अनवरत.. :)
मिले तो हैं वो धागे,
मजबूत, बेशकीमत.
आस-पास की सारी बुनावट,
इन्ही की तो देन है.
यों धागों को शुक्रिया,
कहना कब आया है?
एक जुलाहे (कबीर) ने जीवन को नया दर्शन दिया और आज आपने ख़्वाबों और आँखों की कताई से मोह लिया..
ReplyDeleteसंगीता दी! नए साल की शुभकाम्नाएँ सारे परिवार के लिये!!
जीवन दर्शन से भरी कविता ..
ReplyDeleteनव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें
सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु।
ReplyDeleteसर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु॥
सब लोग कठिनाइयों को पार करें। सब लोग कल्याण को देखें। सब लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र आनन्दित हों
सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥
सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो।
बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं!
सदाचार - मंगलकामना!
सुन्दर रचना!
ReplyDeleteनववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएँ!
बहुत खुबसूरत, आप जरूर कुछ बुन रही होंगी और जहां से ये खुबसूरत शब्दावली उपजी !
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर और सार्थक भाव लिए कविता |
ReplyDeleteइक दिन तो बादल बरसेगे ही
नव वर्ष मंगलमय हो |
बहुत ही प्यारी रचना ! ख़्वाबों के पूनियों को आँखों से कातने का नितांत मौलिक बिम्ब बहुत अच्छा लगा ! आपके इतनी मेहनत से काते सभी स्वप्न साकार हों यही कामना है ! इतनी खूबसूरत रचना के लिये आभार एवं शुभकामनायें !
ReplyDeleteगहरे अर्थो को समेटती एक सशक्त रचना.
ReplyDeleteअनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.
आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.
... atisundar !
ReplyDeleteनया साल शुभा-शुभ हो, खुशियों से लबा-लब हो
न हो तेरा, न हो मेरा, जो हो वो हम सबका हो !!
संगीता जी , मन का मिले न मिले सूत तो कातना ही है । जीवन इसी का नाम तो है । कविता अच्छी लगी । आपको नववर्ष की हार्दिक शुभ-कामनाएं
ReplyDeleteसंगीता जी , मन का मिले न मिले सूत तो कातना ही है । जीवन इसी का नाम तो है । कविता अच्छी लगी । आपको नववर्ष की हार्दिक शुभ-कामनाएं
ReplyDeletesangeeta ji , bahut hi khubsurat nazm...... aap ko naya sal mubarak ho.
ReplyDeleteAapki har manokamna pooree ho!
ReplyDeleteआज भी कातना बदस्तूर ज़ारी है।
ReplyDeleteबहुत सुनदर अभिव्यक्ति , बधाई व आपको व आपके ब्लाग के सभी साथियों को नववर्ष की शुभकामनायें।
ReplyDeleteनूतन वर्ष 2011 की शुभकामनाएं
आपकी पोस्ट 1/1/11-1/11 की प्रथम वार्ता में शामिल है।
बेहतर रचना....
ReplyDeleteसंगीता जी आपको २०११ की हार्दिक शुभकामनाएं। नववर्ष तो प्रतिपदा पर मनाता हूं तो नववर्ष की शुभकामनाएं तब ही दूंगा.... फिलहाल ईश्वर से कामना है कि आप खुश रहें और अपनी बेहतरीन रचनाओं से ब्लॉक पाठकों को खुश रखें।
तकली से बचपन याद आ गया .
ReplyDeleteनए साल की हार्दिक शुभकामनायें.
आप व आपके परिवार वालो को नववर्ष के अवसर
ReplyDeleteशुभकामनाएँ..........................
जीवन की हर इच्छा , उसके सत्य और जिजीविषा में निहित भावनाओ को आप इतना करीब से पढ़ लेती है . नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये .
ReplyDeleteसंगीता जी,
ReplyDeleteसुभानाल्लाह....बहुत ही खूबसूरत......ये कताई तो उम्र भर यूँही चलती रहनी चाहिए.......नववर्ष की ढेरों शुभकामनाये|
naya saal aapke liye khushiyon ki chaadar laye.. Happy new year masi.. Love u
ReplyDeleteमन माफिक सुख ना मिले, कितने कातो सूत
ReplyDelete।
आँखों में जो ख्वाब दें, केवल वे ही पूत।।
दीदी..
ReplyDeleteक्या बात है..वाह....और चरखा कहाँ है..हृदय में या दिमाग में.. सूत की गुणवत्ता इस पर बहुत निर्भर करती है न :)
बहुत सुंदर रूपक के साथ नन्ही नज़्म लिखी है आपने
प्यारी रचना....
ReplyDeleteनव वर्ष की बहुत शुभकामनाये......
सुदूर खूबसूरत लालिमा ने आकाशगंगा को ढक लिया है,
ReplyDeleteयह हमारी आकाशगंगा है,
सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं,
कहां से आ रही है आखिर यह खूबसूरत रोशनी,
आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है,
किसने बिखरी ये रोशनी, कौन है वह,
मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे,
आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं,
मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर,
उनमें से एक है पृथ्वी,
जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य सैकड़ों देशों में,
इन्हीं में एक है महान सभ्यता,
भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए,
मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव,
भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है रोशनी का उत्सव,
एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण,
नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार,
शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय,
यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...
-डॉ एपीजे अब्दुल कलाम
नववर्ष आपको बहुत बहुत शुभ हो...
जय हिंद...
gahan bhavon ki sahaj abhivyakti!
ReplyDeletekalam ko pranaam!
behad sundar ,nav varsh mangalmay ho aapko aur aapke apne ko .
ReplyDeleteबहुत सुन्दर नज़्म, हमेशा की तरह.
ReplyDeleteनये वर्ष की अनन्त-असीम शुभकामनाएं.
वाह आपने तो गागर में सागर भर दिया है ...
ReplyDeleteमंगलमय नववर्ष और सुख-समृद्धिमय जीवन के लिए आपको और आपके परिवार को अनेक शुभकामनायें !
अत्यंत सुंदर आलंबन.
ReplyDeleteनव वर्ष मंगलमय हो, आपके जीवन को नए आयाम दे...
ReplyDeleteसुन्दर रचना!
आशा है की आपका मार्गदर्शन यूँ ही मिलता रहेगा.
अरविन्द जांगीड.
अत्यंत ही सुन्दर प्रस्तुति
नव वर्ष मंगलमय हो, आपके जीवन को नए आयाम दे
ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत रहेगा
http://arvindjangid.blogspot.com/
आपको तथा आपके परिवार के सभी जनों को वर्ष २०११ मंगलमय,सुखद तथा उन्नत्तिकारक हो.
ReplyDeleteसंगीता दी, मेरा यहाँ आना और गहन चिंतन से रूबरू होना.... अद्भुत... कताई जारी रहे यही सद्कामना है.... आपको नमन. धन्यवाद.
ReplyDeleteआपको सपरिवार नव वर्ष की बधाई.
सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः।
ReplyDeleteसर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥
सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें, और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े .
नव - वर्ष २०११ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
kash yah maine likha hota ...
ReplyDeletebahut sunder bhaw hain aapke.
ReplyDeleteBahut sundar likha aapne.
ReplyDeleteNav varsh ki hardik subhkamnai.
बहुत सुंदर कविता , बधाई स्वीकारें !
ReplyDeleteआप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .
nav varsh ki hardik shubhkamnayen
ReplyDeletenav varsh ki hardik shubhkamnayen
ReplyDeleteनिरंतर चलते रहने की प्रेरणा देती रचना...
ReplyDeleteनववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.
ye katna to humesha chalta rahega.... acchi nazm hai mumma... happy new year... :)
ReplyDeleteगहरी अभिव्यक्ति ... कुछ शब्दों में लम्बी बात कहता आपकी खूबी है ......
ReplyDeleteआपको और आपके पूरे परिवार को नव वर्ष मंगलमय हो ..
जय श्री कृष्ण...आपका लेखन वाकई काबिल-ए-तारीफ हैं....नव वर्ष आपके व आपके परिवार जनों, शुभ चिंतकों तथा मित्रों के जीवन को प्रगति पथ पर सफलता का सौपान करायें .....मेरी कविताओ पर टिप्पणी के लिए आपका आभार ...आगे भी इसी प्रकार प्रोत्साहित करते रहिएगा ..!!
ReplyDeleteसंगीता जी, आपका जवाब नहीं। बहुत शानदार बात कह दी आपने। बधाई।
ReplyDelete---------
मिल गया खुशियों का ठिकाना।
बहुत शानदार अभिव्यक्ति है..........यही तो जिँदगी है । आभार दी !
ReplyDeleteकम शब्द ... गहरे भाव
ReplyDeleteमन माफिक सूत के भाव मन को छू गए। चैरेवेति...चैरेवेति...
ReplyDeleteनव वर्ष के लिए एक अच्छा संदेश है।
आपके तथा आपके परिवार के लिए नव वर्ष मंगलमय रहे।
bahut gahre bhav.............
ReplyDeleteशुक्रिया...इतना अच्छा लिखने के लिए!!हम सभी बुनकर की श्रेणी में ही आते है..कभी शब्द बुनते हैं और तो कभी ख्वाब...सूत मन माफिक हों या न हों...कातना बदस्तूर ज़ारी है
ReplyDeletebahut sunder ....
ReplyDeletesateek prastuti!
ReplyDeleteufF!! sangeeta di...itni gahri soch...
ReplyDeleteyahi to aapki khashiyat hai, kuchh sabdo me sab kuchh kah dete ho..:)
nav-varsh ki bahut saari subhkamnayen...
बहुत प्यारी रचना के लिए बधाई आपको !
ReplyDeletebus..kabhi na kabhi to man mafik milega hi....ye sochkar hi to hum zindagi me badhte rehte hain...jina isi ka nam hai...khubsurat rachna k kie badhai...
ReplyDeletepoonam
जय श्री कृष्ण...आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!
ReplyDeleteसुन्दर ...अति सुन्दर !
ReplyDelete१३ जनवरी को पौष माह का आखिरी दिन यानि ठंड का अंत !इसी दिन लोहरी होती है ।
आप हमारे संग लोहरी मनाने हमारे यहाँ आईएगा ।
आभार
हरदीप
लोहड़ी,पोंगल और मकर सक्रांति : उत्तरायण की ढेर सारी शुभकामनाएँ।
ReplyDeleteसुंदर कविता के लिए बधाई आपको !
ReplyDeleteमन माफिक सूत की तलाश इधर भी जारी है।
ReplyDeleteमन माफिक सूत की तलाश इधर भी जारी है।
ReplyDeleteबहुत अच्छा लिखती हैं आप .... आप इतना कुछ कैसे कर लेती हैं? आपके इस योगदान से ब्लॉग जगत कितना समृद्ध हो रहा है ....आपको बधाई.
ReplyDeleteसचमुच,वो सुबह कभी तो आएगी!
ReplyDeleteबहुत प्यारी अभिव्यक्ति |बधाई
ReplyDeleteआशा
छोटी सी नज़्म में गहन जीवन दर्शन..बहुत सुन्दर
ReplyDeleteख़्वाबों की पुनिया को
ReplyDeleteआँखों की तकली से
काता है शिद्दत से
सारी ज़िंदगी मैंने
कभी तो मन माफिक
सूत मिले ,
आज भी कातना
बदस्तूर जारी है ...
bahut umda rachna .......bhavoko ek naya ayam deti hui
.http://amrendra-shukla.blogspot.com
वाह... कितने कम शब्दों में इतने सारे भाव...
ReplyDeleteसंक्षिप्त पर सुंदर भाव..बढ़िया रचना के लिए बधाई
ReplyDeleteपूरी ज़िन्दगी निकल जाती है इस कातने मे मगर मन माफिक सूत कब मिलता है। चन्द शब्दों मे सुन्दर बिम्ब प्रयोग। बधाई।
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर ..उर्जावान रचना ...कातना जीवन निरंतरता का प्रतीक ...आपको कोटि कोटि बधाईयां एवं शुभकामनाएं...
ReplyDeleteबहुत ख़ूबसूरत...एक निर्मल व थोड़ा सा दुखद एहसास...
ReplyDeleteकातते रहना ही सबसे ज़रूरी है!
ReplyDeleteWow... Ye to kam shabdo mein Rocket hai
ReplyDeleteबदस्तूर जारी रहे ये!
ReplyDeleteDiii
ReplyDeleteitnee kam shabdoon me kitniii baate keh dii aapne.....sach