महताब
>> Saturday, 19 December 2009
आँखों में बसाया है तुमको मैंने एक ख्वाब की तरह
दिल में छुपाया है तुमको मैंने एक चिराग की तरह
नज़र ना लग जाये मेरी मुहब्बत को ज़माने की
मेरे आसमां में चमको तुम बन के महताब की तरह .
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खलिश होती है तो यूँ ही बयां होती है , हर शेर जैसे सीप से निकला हुआ मोती है
बिना काजल के हैं कजरारी आँखें
पैनी धार सी हैं ये कटारी आँखें
वार तो नहीं किया तूने मुझ पर
क़त्ल कर गयीं ये तेरी प्यारी आँखें
Read more...खामोश रह कर भी तुझसे बात करते हैं
आवाज़ नहीं आती पर लब हिलते हैं
ज़रा ध्यान से सुन कान लगा कर ज़रा
चुप रह कर भी हम बहुत कुछ कहते हैं.
Read more...हर बार अपनी चाहत के हम गुनहगार हुए जाते हैं
कही - अनकही हर बात पर वो यूँ ही तोहमत लगाते हैं
सुनते हैं हर बात उनकी दिल औ जान से हम
फिर भी वो हैं कि हमसे खफा हुए जाते हैं ।
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