ख़्वाबों से मिट्ठी ......
>> Thursday, 5 August 2010
ख़्वाबों से
मिट्ठी करके
फिर सजा लिया है
मैंने उनको
अपनी पलकों पर ,
ख्वाब ना हों तो
आँखें पथरा सी
जाती हैं.......
खलिश होती है तो यूँ ही बयां होती है , हर शेर जैसे सीप से निकला हुआ मोती है

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