copyright. Powered by Blogger.

समंदर रेत का

>> Wednesday, 13 April 2011


पलकों को 
निचोड़ कर 
जब मैंने 
खोलीं थीं 
आँखें 
रेत का 
समंदर उनमें 
नज़र आया था 


Read more...

तेरे होने का एहसास

>> Wednesday, 6 April 2011






निशा का 
अंतिम प्रहर हो 
अम्बर मेघ से 
आच्छादित 
मेरे मन की 
धरती पर 
छाई हो 
गहन धुंध 
ऐसे में -
मात्र तेरे 
होने का एहसास 
सूरज की 
किरण बन 
भर देता है 
मेरे मन में उजास ..


Visit Us @ www.Fropki.com

Read more...

हसरत ...

>> Sunday, 27 March 2011




एक वक्त था 
कि 
छाये रहते थे 
मेघ नेह के 
इन आँखों में , 
आज 
पसर गया है 
एक रेगिस्तान 
और 
तरस गयीं हैं 
ये आँखें 
एक बूँद 
नमी के लिए .

Read more...

पलाश

>> Friday, 18 March 2011




पलक पर जमी 
शबनम की बूंद को 
तर्जनी पर ले कर 
जैसे ही तुमने चूमा 
मेरी आँखों में 
न जाने कितने 
पलाश खिल गए ....


Read more...

बाढ़ का कहर

>> Sunday, 13 March 2011






सजा तो लिए थे 

मैंने पलकों पर 

फिर से 

मना कर 

रूठे हुए ख्वाब 


पर आज 

इतनी बारिश हुयी 

कि सारे ख्वाब 

बाढ़ में बह गए .......


.

Read more...

नीलकंठ

>> Sunday, 23 January 2011


संवादों का आज 
मंथन कर लिया 
उसमें से निकला 
हलाहल पी लिया .
तुमने नीलकंठ तो  देखा है न ? 
अब मुझे लोग नील कंठ कहते हैं .



Read more...

कताई

>> Friday, 31 December 2010



ख़्वाबों की पुनिया को 
आँखों की तकली से
काता  है शिद्दत से 
सारी ज़िंदगी मैंने 
कभी तो मन माफिक 
सूत  मिले , 
आज भी कातना
बदस्तूर जारी है ... 



Read more...
रफ़्तार

About This Blog

Labels

Lorem Ipsum

ब्लॉग प्रहरी

ब्लॉग परिवार

Blog parivaar

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

लालित्य

  © Free Blogger Templates Wild Birds by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP