copyright. Powered by Blogger.

बर्फ ......

>> Thursday, 26 April 2012



एक
उदास शाम को
मन की झील में
डूबते - उतरते
नज़रें गीली
हो गयीं थीं
और
झील पर
जमी बर्फ 
पिघलने 
लगी थी .....


Read more...

निजत्व से विश्वत्व की ओर

>> Friday, 13 April 2012


मानव 
मन के उच्छ्वास को
शब्दों में पिरो 
विचारों को साध कर 
अनुभव के हलाहल को पी 
अश्रु की स्याही से 
उकेर देता है 
अपनी भावनाओं को 
और हो जाता है 
सृजन कविता का 
फिर भावनाएं 
निजत्व से निकल 
विश्वत्व की ओर 
कर जाती हैं प्रस्थान .

Read more...

संवेदनाएं / हाइकु

>> Friday, 23 March 2012


 

रिश्ते हैं यहाँ 
अपेक्षाओं से भरे 
दम तोड़ते

*************
 

भावुक मन 
संवेदना से भरा 
बरस गया ।

****************
 

रेत ही रेत 
पलकों  में समाई 
खुश्क हैं आँखें 
................

 

मौन उवाच 
है ज्यादा कष्टकारी 
कुछ कहो ना ! 

Read more...

तिरसठ की चाह में छतीस साल ( हाईकू )

>> Sunday, 5 February 2012

 

छत्तीस साल 
किया समायोजन 
बीत ही गए |


सोचती हूँ मैं 
छत्तीस का आंकड़ा 
फिराए पीठ |


बीता समय 
तिरसठ की चाह 
मुक्कमल हो |


आगे का वक्त 
समन्वय करते 
गुजारें हम |

Read more...

बसंत एक रंग अनेक ( हाईकू )

>> Saturday, 28 January 2012




पीत वसन 
उल्लसित  है मन 
बसंत आया 

*************************





श्रीहीन मुख 
गरीब का बसंत 
रोटी की चाह .

*******************



फूली सरसों 
खेतों में हरियाली 
खिला  बसंत 

**********************


भूखे किसान 
करते आत्महत्या 
बसंत कहाँ ? 

**********************



आम आदमी 
रोज़ी-रोटी की फ़िक्र 
भूला  बसंत .

****************

Read more...

सर्द मौसम ( हाईकू)

>> Friday, 20 January 2012



घना कोहरा 
धूप चांदनी लगे 
ढूंढें तपिश 




सर्द रात में 
फुटपाथ आबाद 
जिंदा हैं लाशें .

Read more...

कुनकुनी धूप

>> Sunday, 25 December 2011


 



धूप जो निकली है 
कुनकुनी सी 
मन होता है कि  
घूंट घूंट पी लूँ  
तृप्त हो जाऊं 
तो फिर मैं 
झंझावातों की 
आंधियां भी जी लूँ .


Read more...
रफ़्तार

About This Blog

Labels

Lorem Ipsum

ब्लॉग प्रहरी

ब्लॉग परिवार

Blog parivaar

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

लालित्य

  © Free Blogger Templates Wild Birds by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP