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Wednesday, 3 March 2021

ऐ ज़िन्दगी बता !

 



दरक गया है 

इस कदर दिल 
कि ऐ ज़िन्दगी 
बता कैसे मैं 
तेरा  ऐतबार करूँ ? 
अपनी ही सोचों में 
गुम है मन मेरा 
तो भला बता कि
मैं कैसे तुझसे 
प्यार करूँ ? 

38 comments:

  1. बहुत खूब लिखा है संगीता जी,
    प्रेम भरोसे पर निर्भर होता है , भरोसा टूटता है तो दिल भी टूट जाता है, फिर प्यार के लिए सोचना ही पड़ता है, बड़ी सहजता के साथ मन की बात कह गई आपकी ये खूबसूरत रचना , बधाई हो संगीता जी

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    1. कम शब्दों को भी कितनी खूबसूरती से समझ लिया । आभार ज्योति ।

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  2. गुम है मन मेरा
    तो भला बता कि
    मैं कैसे तुझसे
    प्यार करूँ ? ..सच प्यार करना इतना सरल नहीं होता..वो भी जिंदगी से , जो चौबीस घंटे आपके साथ रहती है .. बड़ा मुश्किल है..जिंदगी और प्यार का अफसाना ..

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    1. सहजता से मन को पढ़ लिया । शुक्रिया जिज्ञासा

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 03 मार्च 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. छोटी किन्तु समुद्र सी गहरी कविता...

    बहुत बधाई आदरणीया 🙏

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  5. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 05-03-2021) को
    "ख़ुदा हो जाते हैं लोग" (चर्चा अंक- 3996)
    पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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  6. कम शब्दों में बहुत कुछ व्यक्त करती सुंदर रचना।

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    1. ज्योति बहुत बहुत शुक्रिया

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  7. सुन्दर रचना। अन्तर्मन के शब्द।

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  8. कम शब्दों में बड़ी बात ।

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  9. टुटा दिल तो किसी से प्यार नहीं कर सकता,गहरी अभिव्यक्ति संगीता जी,सादर नमन आपको

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  10. वाह!संगीता जी ,चंद शब्दों में बहुत गहरी बात कह दी आपनेंं ।

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  11. वाह!बहुत सुंदर सृजन।
    सृजन

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  12. बहुत ही ख़ूबसूरत पंक्तियां 🌹🙏🌹

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  13. जिंदगी कों प्यार करने के लिए दिल नहीं आदत चाहिए आजकल

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  14. अब ऐसी आदत कहाँ से लाऊँ जिसमें दिल शामिल न हो ।
    शुक्रिया सलाह के लिए 😄😄

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  15. कितना अजीब है न ये दिल और जिन्दगी का रिश्ता...क्यूँ है ऐसा कि दिल के शीशे के दरकते ही जिंदगी में भी उदासीनता आ जाती है ...भावुक मन की कितनी मुश्किलें हैं...बहुत सुन्दर रचना 🌹

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  16. शुक्रिया ,उषा जी ,
    आप न आई होतीं तो हमारा दिल तो यूँ ही दरक जाता ।

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