शायद ख़्वाबों के नसीब में यही लिखा होता है या तो पलकों से गिर कर चकनाचूर हो जायें या आँसुओं की बाढ़ में बह जायें ! बहुत ही मर्मस्पर्शी और भावुकता से परिपूर्ण सुन्दर रचना ! आभार !
ख्वाबों को मेहनत से सजाया जाता है परन्तु कभी-कभी ऐसी बारिश में ख्वाब बह जाते हैं फिर वाष्पीकृत होकर बादल बनते हैं फिर ख्वाब बनता है और फिर कुछ पूरे होते हैं और कुछ रह जाते हैं। जीवन की मृगमरीचिका को दर्शाती एक सुंदर,नैनो रचना.
आदरणीया संगीता जी नमस्कार ऐसे ही होती है जिन्दगी इसके अनोखे रंग कब क्या बिखर जाये क्या बन जाये पता नहीं रूठने मनाने का ये सिलसिला ये आंधी तूफान कुछ भी कहर बरपा जाते हैं सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कभी कभी ख्वाब यूं ही चकनाचूर होते हैं………॥सुन्दर भावाव्यक्ति।
ReplyDeleteसंवेदनशील भाव
ReplyDeleteशायद ख़्वाबों के नसीब में यही लिखा होता है या तो पलकों से गिर कर चकनाचूर हो जायें या आँसुओं की बाढ़ में बह जायें ! बहुत ही मर्मस्पर्शी और भावुकता से परिपूर्ण सुन्दर रचना ! आभार !
ReplyDeleteये बारिस भी कभी कभी बेमौसम हो जाती है ।
ReplyDeleteऔर सुनामी आ जाता है ,भावनाओं का ।
सुन्दर रचना संगीता जी ।
पर आज
ReplyDeleteइतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए .......
Bahut laajabab panktiyaan hai Sangeeta ji.
aur main bas tinka-tinkaa bahtaa dekhta rah gayaa.........
अक्सर बिखर जाते है ख्वाब आँसूओं की बाढ़ में....बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....
ReplyDeleteबहुत मार्मिक सुन्दर रचना..कितना दुःख होता है जब ख्वाब बाढ में बह जाते हैं..आभार
ReplyDeleteबहुत ही कम शब्दों में गहरी बात! बेहतरीन अभिव्यक्ति!
ReplyDeleteआज
ReplyDeleteइतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए .......
बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए बधाई।
Sach me khwab ....aise hi bah jate hain.
ReplyDeletesunder kvita
ReplyDeleteभावपूर्ण, प्रवाहमयी।
ReplyDeletekam shabdo main gehri baat
ReplyDeletebahut khoob
Kewal do stanza aur kitna kuchh kah diya!Sach! Kya kuchh nahee bah jata aansunon kee baadh me!
ReplyDeleteबहुत सुंदर अभिव्यक्ति संगीता जी, धन्यवाद
ReplyDeleteसुंदर अभिव्यक्ति !
ReplyDeletevia-http://www.blogprahari.com
बेहतरीन भावपूर्ण रचना......
ReplyDeleteअत्यंत मर्मस्पर्षी भाव.
ReplyDeleteरामराम.
गहरी मर्मस्पर्शी रचना, बहुत बधाई संगीता जी.
ReplyDeleteगहरे भाव लिए रचना संगीता जी ... बहुत खूब ..
ReplyDeleteitna manaker rakha tha khwaab ... bah gaye ... sangeeta ji kya kahun , bas doobi hun us bahaw me
ReplyDeleteकि सारे ख्वाब
ReplyDeleteबाढ़ में बह गए .......choti si kavita men kini bari baat rakh di hai...wah.
itni barish na laao ki baadh aa jaye waise hi aajkal is baadh ka bahut kahuf hai har jagah.
ReplyDeleteकम लब्जों में प्रभाव छोड़ती कविता . हम भी बह लिए भावों के लहर में .
ReplyDeletegagar me sagar
ReplyDeletebehtreen bhawpurn kavita
gagar me sagar
ReplyDeletebehtreen bhawpurn kavita
इस बाढ को रोकने का तरीक़ा भी कावियों को ढूंढना चाहिए। फिलहाल तो यही कहूंगा,
ReplyDeleteअब तो अक्सर नज़र आ जाता है दिल आंखों में
मैं न कहता था कि पानी है दबाए रखिए
कौन जाने कि वो कब राह इधर भूल पड़े
अपनी उम्मीद की शम्ओं को जलाए रखिए
ख्याबोँ को भी संभालना होगा ,
ReplyDeleteबाढ़ोँ से बचाना होगा । क्योँकि ये बहुत कीमती होते हैँ । बहुत ही खूबसूरत नज्म है । आभार संगीता दी ।
ख़्वाबों को बचाना बहुत मुश्किल होता है !
ReplyDeleteभावनाओं की बरसात का सुन्दर चित्रण किया है आपने इस रचना में!
ReplyDeletekhvaab to khvaab hai kab pure hote hain tabhi to aansuon ke pravah men bah jate hain.
ReplyDeletebahut sundar bhav.
ऐसी बाढ़ की ज़द में तो जाने
ReplyDeleteकई कई खूबसूरत ख़्वाब ग़र्क हो गए ...
कम शब्दों में
बहुत गहरी बात ...
अच्छी रचना .
बेहतरीन कविता, वैसे ख़्वाब बिना बाढ के भी बह जाते हैं अक्सर।।
ReplyDeleteपर आज
ReplyDeleteइतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए .......
अंतस को झकझोरती हुई रचना...
man ke samunder main sunami ayegi to badh ka to aana to tai hai...sapnon ke mahal ka ye hashra hona hi tha...sunami ke aage T zaroor lagalijiyega...
ReplyDeleteसंवेदनशील रचना संगीता जी।
ReplyDeletebahut achchhi rachna hai sangeeta ji .
ReplyDeleteजिन्दगी में यह ख्बाब कभी बनते हैं तो कभी बिगड़ते है ..यह सिलसिला अनवरत यूँ ही चलते रहता है
ReplyDeleteभावपूर्ण..
ReplyDeletechoti aur sunder rachna
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना !
ReplyDelete' याद कुछ ऐसी आई आखो से रोया न गया
जख्म कुछ ऐसे छिले फूलो पे सोया न गया '
हृदयस्पर्शी प्रस्तुति ....आभार
ReplyDeleteगनीमत है कि सुनामी नहीं आयी नहीं तो साथ में कितनों के ख्वाब बह जाते।
ReplyDeleteख्वाबों को मेहनत से सजाया जाता है परन्तु कभी-कभी ऐसी बारिश में ख्वाब बह जाते हैं फिर वाष्पीकृत होकर बादल बनते हैं फिर ख्वाब बनता है और फिर कुछ पूरे होते हैं और कुछ रह जाते हैं। जीवन की मृगमरीचिका को दर्शाती एक सुंदर,नैनो रचना.
ReplyDeleteपर आज
ReplyDeleteइतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए ....
bhavuk rachna....
sapne tutte dekhe the...ab baddh me bahte dekh liya..!!
ReplyDeletebahut jayda bhaw-prawan rachna..!
बहुत ही मर्मस्पर्शी और भावुकता से परिपूर्ण सुन्दर रचना ! आभार !
ReplyDeleteसंगीता जी,
ReplyDeleteआज बहुत दिनों बाद आपकी कोई पोस्ट पड़ने को मिली.....आपकी खूबी है कम शब्दों में बात को कह जाना.......बहुत खूबसूरत लगी ये पोस्ट...प्रशंसनीय|
उत्तम भावाभिव्यक्ति...
ReplyDeleteआज
ReplyDeleteइतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए .......
बहुत खूब ...बेहतरीन ।।
बहुत खूब ... निःशब्द इन चंद शब्दों पर ...
ReplyDeletesubhanaallah!
ReplyDeleteयादों की बारिश ऐसे ही सैलाब लाती है! बहुत सुंदर नज़्म संगीता दी!!
ReplyDeleteसुभानाल्लाह ...!
ReplyDeleteइस बाढ़ से तो नज़रें ही नहीं हटतीं ......
kam shabdon me bahut kuchh kah jati hain aap...
ReplyDeletekam shabdon me bahut kuchh kah jati hain aap...
ReplyDeletesundar rachna...aabhar...
ReplyDeleteवाह वाह ।
ReplyDeleteकभी कभी ख्वाब आंसूओं में बह ही जाते हैं ।
'पर आज
ReplyDeleteइतनी बारिस हुई
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए '
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
नमस्कार
ReplyDeleteबहुत ही कम शब्दों में गहरी बात! बेहतरीन अभिव्यक्ति!
साधुवाद !
धुलते रहे ख्वाब
ReplyDeleteआँसुओं से
पर क्या करूँ
सपनों का पनपना
रुक न पाया।
शायद
संजीवनी दे गया कोई।
अच्छी कविता। आभार।
कभी बाढ़, तो कभी आंसू का बहाना बना लेते हैं
ReplyDeleteबेदर्दों को बस मौका चाहिए रुखसती का
आप हमेशा ही कम शब्दों मे बहतु गहरी बात कह देती है
ReplyDeleteजो बस सीधे दिल पर असर करती है
good
ReplyDeletekya baat he, kehna padega!
ReplyDeleteaap dhire se gambhir bat keh jati hain!
bas kammal karti hain di!
aaj aapka blog dekha, bahut achha laga. kavitaen dil ko chhoo gain.akathniy! laxmi Kant.
ReplyDeleteपर आज
ReplyDeleteइतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए ..
वाह वाह वाह वाह .
सपने भी गज़ब के थे ,बारिश भी गज़ब की थी.
बहते हुए ख्वाबों की ख्वाहिश भी गज़ब की थी.
इस बेमौसम बरसात से तो हम भी बहुत परेशां हैं.
ReplyDeleteपर आपके भावों की बाढ़ में मन बह ही गया ..बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं.
आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!
ReplyDeletekhwaabon ki baadh ...mazedaar lagi .
ReplyDeleteअति सुन्दर भावोक्ति ..मानो अन्तरात्मा से निकली आवाज!
ReplyDeletegagar me sagar bhar diya hai aapne
ReplyDeleteजिंदगी ऐसी ही होती है. हम तो सिर्फ कोशिश कर सकते है. आगे खवाब कि किस्मत में देखे क्या लिखा है? पूरा होना या बह जाना?
ReplyDeleteबहुत खूब..बहुत सुन्दर पंक्तियाँ..आभार।
ReplyDeleteSangeeta dii....aaj tassli se aapkaa blog praaa............ruh ko swaad aa gyaa aaj...thanx a lot for aal of yr work
ReplyDeletetake care
आदरणीया संगीता जी नमस्कार ऐसे ही होती है जिन्दगी इसके अनोखे रंग कब क्या बिखर जाये क्या बन जाये पता नहीं रूठने मनाने का ये सिलसिला ये आंधी तूफान कुछ भी कहर बरपा जाते हैं
ReplyDeleteसुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
man bhar aaya......
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