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Tuesday, 9 August 2011

अजनबी ...




तल्ख़ जुबां 
करती है असर 
जब होता है 
अपनापन 
कहीं न कहीं 
जब हो गए 
अजनबी 
तो सच ही 
तल्खी जाती रही ..

81 comments:

  1. वाह क्या खूब कहा है…………अपनेपन मे तो इंसान कुछ भी सह जाता है फिर चाहे कोई गर्दन भी उतार ले मगर जहां अपनापन खत्म हो जाता है वहाँ कुछ नही बचता सिवाय अजनबियत के…………चंद शब्दो मे गहरी बात कह दी।

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  3. बहुत खुबसूरत सच है दुःख तो अपनों से ही मिलता है......अजनबी क्या दे सकता है|

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  4. बहुत सही लिखा आपने .....बेहतरीन

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  5. अपनों की कही बात की तल्खी ही चोट भी पहुँचाती है और उसकी कड़वाहट कुनैन की तरह इलाज भी करती है ! अजनबियों की बात तो बेअसर होती है चाहे चाशनी में पगी हो या ज़हर में डूबी क्योंकि उसके साथ हित अहित की सच्ची चिंता नहीं जुडी होती ! सुन्दर क्षणिका !

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  6. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ..।

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  7. चंद शब्द तीर की भांति भेद गए ह्रदय को
    अजनबी और अपनेपन का क्या चित्रण किया है आपने वाह

    कई जिस्म और एक आह!!!

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  8. बहुत सही।

    सादर

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  9. कितने कम शब्दों में किस खूबसूरती से सब कुछ कह गईं आप !

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  10. तल्ख़ का मतलब बताएं तो समझ आए । खामख्वाह वाह वाह कैसे करें जी ।

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  11. आदमी और कुछ नहीं दे सकता कम से कम बोली तो अच्छी और मीठी दे।

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  12. bat bahut sahi hi kahi hai kyonki apanepan ka adhikar alag hota hai aur usamen sab chalta hai. ajnabi bankar jo dooriyan hoti hain ve alag dikhai deti hain.

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  13. सभी पाठकों का आभार ..

    डॉक्टर दराल साहब ,

    तल्ख़ का मतलब है कडुवा .. कडवी जुबां

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  14. बिलकुल सही कहा संगीता दी!
    दिल पे लगने वाले ज़्यादातर ज़ख्म अपनों के दिए होते हैं और तल्ख़ भी अपनों की ही जुबां लगती है!! गैरों से मोहब्बत भी नहीं और तल्खी भी नहीं!!

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  15. सच कहा...बहुत खूब!

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  16. संगीता जी,
    तल्ख जुबा से बने अपने भी अजनबी
    होती न जुबां तल्ख तो अपने सभी होते
    भोला-कृष्णा

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  17. तल्खी में भी अपनापन देख लिया . गैरों की तल्खी से क्या वास्ता . बहूत खूब .

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  18. जब हो गए
    अजनबी
    तो सच ही
    तल्खी जाती रही ......
    ek kadvi sachchyee to yahi hai.....theek kahtin hain.

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  19. कोई शिकवा भी नहीं...कोई शिकायत भी नहीं...अब तुम्हें पहले सी मोहब्बत भी नहीं...

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  20. जब हो गए
    अजनबी
    तो सच ही
    तल्खी जाती रही .

    बहुत बढ़िया..... कम शब्द पर गहरी बात

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  21. बहुत कम शब्दों मे बड़ी बात, बेहतरीन।

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  22. अक्सर यह भी नही हो पता. हमेशा ऐसा ही हो, तो अच्छा हो.

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  23. बिल्कुल सतसैया के दोहे जैसी सटीक बात. बहुत लाजवाब, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  24. बहुत सुंदर ,तल्खी जुबां की हो या अपनेपन की ,आहत तो मन ही होता है ....
    बात " चटख धूप "की हो या "हरसिंगार" की
    "केसरिया चावल" मन की हांडी में पकाने की चाहत हो या
    "चवनियाँ ख्यालों की" के खोने की ..
    बस एक ही तो वजह है इन सबके पीछे .....मन ......अपनापन......लगाव ...
    कविता छोटी कहने को है, पर प्रभाव छोटे कदापि नहीं ..
    अच्छा लगता है ऐसी रचनाओ को पढना

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  25. अपनेपन की सटीक परिभाषा ,बधाई.

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  26. bahut badhiya ,aapka intjaar hai blog par ,kai din ho gaye

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  27. तल्ख़ जबान सिर्फ अपनों की ही चोट पहुंचती है , जब अजनबी हो गए तो फिर क्या तल्खी ...
    शानदार !

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  28. बहुत ही खूब....

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  29. अद्भुत भावाभिव्यक्ति।

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  30. सच है, तल्खी अपनेपन से भी उपजती है. जहाँ अपनापन नहीं वहाँ क्रोध भी तो नहीं ही आता.
    सुंदर रचना.

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  31. बेहद खूबसूरत कविता.....और भावपूर्ण भी !

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  32. कम शब्दों मे गहन भाव ..सुन्दर ....

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  33. yahi fark hai apne aur begaane ka...
    aap itane kam shabdon mei itne bhaav samet leti hai ki tareef ke liye bahut saare shabd bhi kam lagne lagte hain...

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  34. तल्खी पर खूबसूरत बयान...
    बहुत ही मर्मस्पर्शी...

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  35. बहुत ही सुंदर
    जब हो गए अजनवी, तो सच ही तल्खी जाती रही।

    क्या कहने

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  36. बहुत सुन्दर रचना , बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

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  37. जब हो गए
    अजनबी
    तो सच ही
    तल्खी जाती रही ..
    सही लिखा आपने .....

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  38. Didi
    namaste kaisi hain aap?
    ye baat aapne sahi kahi ki apno ki boli hui baat dil main teer ki tarah chubhti hain, aur yahi baat koi bahar wala kahe to koi farakh nahi padta hain.
    is jeevan ki haqiqat ko khubsurat aur saral sabdho main aapne baya kiya hain.
    didi kya aap mujhe kabhi khat likhna chahengi to main apna email id de rahi hun.
    sheetal.maheshwari1@gmail.com.
    intezaar rahega aapke khat ka.

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  39. संगीता जी अभिवादन सच कहा प्यार रहे मन से तो थोडा सा रूठना थोडा सा तेवर थोडा सा गिला बहुत बड़ा हो जाता है और अपनापन गया तो ...
    सुन्दर
    भ्रमर ५

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  40. आपकी इस कविता में तल्खी भी मिठास है....

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  41. तल्ख़ जुबां ka asar badi mushkil se jaata hai..
    Lagu rachna ke madhyam se badiya prastuti..

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  42. गहरे भाव के साथ कम शब्दों में बहुत सुन्दरता से आपने लिखा है ! शानदार प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  43. कम शब्द, गहरे भाव... आपकी पहचान बन गई है..

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  44. Respected sister Sangita ji
    रक्षाबंधन एवं स्वाधीनता दिवस के पावन पर्वों की हार्दिक मंगल कामनाएं.

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  45. How beautifully you have defined The bitterness in tone.

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  46. आदरणीया संगीता जी आप सब को ढेर सारी शुभकामनाएं इस पावन पर्व रक्षाबंधन पर -
    आभार प्रोत्साहन हेतु
    भ्रमर५

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  47. सुन्दर भावाभिव्यक्ति .
    स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  48. क्षणिकाओं में महारथ हासिल है आपको संगीता जी. बहुत सुन्दर.
    आज़ादी की सालगिरह मुबारक़ हो.

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  49. gahre bhav dukh to apno se hi milta hai
    rachana

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  50. तल्ख़ जुबां
    करती है असर
    जब होता है
    अपनापन
    कहीं न कहीं
    जब हो गए
    अजनबी
    तो सच ही
    तल्खी जाती रही ..
    dil ko choo lene wali rachana......aapka abhar.

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  51. तल्ख़ जुबां
    करती है असर
    जब होता है
    अपनापन
    कहीं न कहीं
    जब हो गए
    अजनबी
    तो सच ही
    तल्खी जाती रही ..
    dil ko choo lene wali rachana......aapka abhar.

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  52. अपने पण में सब कुछ जायज है ... दूरी मिट जाती है

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  53. सच कहा...बहुत खूब! सुन्दर क्षणिका !

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  54. सच है कड़वी बातें अपनों से ही कही जातीं हैं .....

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  55. बहुत खूब कहा दी आपने |

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  56. बहुत खूब!
    हार्दिक शुभकामनायें आपके लिए !

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  57. बहुत सुंदर रचना

    मेरा शौक
    http://www.vpsrajput.in

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  58. क्या बात है. सच भी है ये. ऐसा ही होता है.

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  59. तल्ख़ जुबां
    करती है असर
    जब होता है
    अपनापन
    swar ki talkhee asahniya hoti hai jab ho apnaapan ,
    satya ! aparichit man kee talkhee kaa na kabhi kartaa maapan .
    hraday tantra ko jhankrit karti vichaaraniya bhaavaabhivyakti .

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  60. vandniy Sangita ji
    vrindaavan men virendra aapka vandan karta hai.

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  61. यही सच है, अच्छी प्रस्तुति.....

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  62. जन लोकपाल के पहले चरण की सफलता पर बधाई.

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  63. bahut khoobsurat abhivyakti....i'm happy to follow your blog.

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  64. अजनबी बनकर फिर से
    नयी शुरूआत भी कर सकते हैं
    मेरी कविता पुनः में इसे पढें
    बहुत अच्छा भाव संप्रेषण है।

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  65. जब हो गए
    अजनबी
    तो सच ही
    तल्खी जाती रही ..

    So true !. Beautifully defined Sangeeta ji.

    .

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  66. शब्दों का जाल बनाना खूब जानती हैं आप.

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  67. sirf aaj tak is hakikat ko mahsoos kiya tha ..aapke shabdon ne ise juwan de di..sadar pranam ke sath

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  68. wahh...
    apki choti si kavita me kitani gahraiya chupi hai
    bahut hi sundar likhati hai aap

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आपकी टिप्पणियां नयी उर्जा देती हैं....धन्यवाद