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विश्वास की ईंट

>> Thursday, 30 September 2010




झूठ की एक 

नन्हीं सी फांस 

उखाड़ देती है 

विश्वास की 

जमी हुई नींव को 

फिर कितना ही 

सच का गारा 

लगाओ 

जम नहीं पाती 

एक भी ईंट 

विश्वास की ...

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ऑंखें

>> Monday, 14 December 2009

बिना काजल के हैं कजरारी आँखें

पैनी धार सी हैं ये कटारी आँखें

वार तो नहीं किया तूने मुझ पर

क़त्ल कर गयीं ये तेरी प्यारी आँखें

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ख़ामोशी

>> Sunday, 13 December 2009

खामोश रह कर भी तुझसे बात करते हैं

आवाज़ नहीं आती पर लब हिलते हैं

ज़रा ध्यान से सुन कान लगा कर ज़रा

चुप रह कर भी हम बहुत कुछ कहते हैं.

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गुल

अश्कों को छुपा कर जो तुम मुस्कुराये
शबनम में भीगे कुछ गुल याद आए .

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साहिल

>> Thursday, 23 October 2008

हर हंसीं पल में मेरे तू शामिल है ,
मेरे दिल का भी बस तू ही कातिल है ,
तू ही मेरे सीने में दिल बन के धड़कता है,
इन मौजे - लहरों का तू ही साहिल है.

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लम्हा

>> Thursday, 16 October 2008

कोई लम्हा नही गुज़रता जो तुझे याद न किया हो ,
कोई सोच ऐसी नही कि जिसमे तुझे शामिल न किया हो ,
आंख बंद करते हैं जब भी हम अपनी ,
कोई ख्वाब ऐसा नही जिसमें तुझे देखा न किया हो।

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