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नया ख्वाब

>> Sunday, 7 February 2010



मन की अल्हड़ता से



फूट पड़ते हैं सोते भी


रेगिस्तान में,


साहिल पर बैठ


रेत में उंगली फिरा


एक  ख्वाब नया बुन



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मोती

>> Friday, 5 February 2010



इश्क के पैरों में



ना जाने क्यों


गम के घुंघरू


बंध जाते हैं


आँखों में


हंसी भी हो


तो भी रुखसार पर


अश्क के मोती


टपक जाते हैं
 
 
 
 

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उम्मीद

>> Tuesday, 2 February 2010


उम्मीद के रोशनदान पर



लगा दिए हैं पहरे


बंद कर पलकों को


कान खोल लिए हैं


हर आहट पर


लगता है कि


उम्मीद पूरी हो गयी
 
 
 
 

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सौगातें

>> Saturday, 30 January 2010




मैंने महज़ तुझसे


प्यार माँगा था


मैंने बस तुझसे


वफ़ा चाही थी


मैंने तेरी ही


खुशियों के लिए


अपनी झोली


फैलाई थी


पर तूने


भेज दीं हैं


सौगातें


मेरे हिस्से की


जिसमें हैं


तेरी नफरत ,


रुसवाई औ बेवफाई

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लोरी

>> Thursday, 28 January 2010




कागज़ पर उतार



अपने जज्बातों को


रख लिया है सिराहने


जब भी बेचैन हुए


लोरी सुना दी

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पंडोरा बॉक्स

>> Wednesday, 27 January 2010





पंडोरा बॉक्स की ही तरह है



ये अंखियों की डिब्बी


ज़रा खोल दो तो


सारे ख्वाब


बाहर कूद आते हैं.

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घुंघरू

>> Thursday, 21 January 2010




ख़ामोशी के घुंघरू भी



करते हैं बहुत शोर


कभी कभी


महफ़िल में भी


तन्हाई होती है


चारों ओर .

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रफ़्तार

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