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दीपक तले अँधेरा ..

>> Monday, 13 September 2010




ज़िंदगी के चाक पर 

भावनाओं की मिट्टी गूँथ 

छोटी छोटी ख्वाहिशों के 

दिए बना 

चढा दिया था 

यथार्थ के ताप पर 

जिम्मेदारियों के 

तेल में भिगो

अरमानो की बाती  

जला दी थी  

आज उजाला है चारों ओर 

बस है तो 

दीपक तले अँधेरा ....



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खामोशियाँ ..

>> Monday, 6 September 2010





खामोशियाँ 

ठहर गयीं हैं 

आज 

आ कर 

मेरे लबों पर 

खानाबदोशी की 

ज़िंदगी शायद 

उन्हें 

रास नहीं आई 



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घुलते अलफ़ाज़

>> Monday, 30 August 2010



खत पढ़ कर 

आँखों से 

आँसू बहते रहे 

और  

सारे अलफ़ाज़ 

जैसे  

अश्कों में 

घुलते रहे ....





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उदासी के जाले

>> Saturday, 28 August 2010




वक्त के हाथों 
पड़ गए थे 
आँखों में 
उदासी के जाले
आज उन्हें 
धो - धो कर 
निकाला है 
चेहरे  की 
नमी को 
हकीकत की 
गर्मी से 
सुखाया है .

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सीला - सीला सा

>> Monday, 23 August 2010

सहेज लिए 

मैंने 

तेरे आंसू 

सारे के सारे 

अपनी कमीज़ की

जेब में 

अब 

हर पल 

मेरा दिल 

सीला - सीला सा 

रहता है ...


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गम के घुंघरू

>> Thursday, 19 August 2010




इश्क के पैरों में
ना जाने क्यों 
गम के घुंघरू 
बंध जाते हैं 
आँखों में 
हंसी भी हो 
तो भी रुखसार पर 
अश्क के मोती 
टपक जाते हैं 
  
  
  
 

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भीगी खामोशी

>> Tuesday, 10 August 2010




खामोशियों  की 

पैरहन को 

आँखों की 

बारिश ने 

भिगो दिया है 

इतना कि

चिपक कर 

रह गयी है 

जेहन से 

इसे उतारने की

कोशिश भी 

नाकाम हो चली है ..









.

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