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राख बनती ख्वाहिशें

>> Tuesday, 21 September 2010






कहा था यूँ 

कि 

अब जँचती हैं..

तुम्हारी..

कजरारी आँखें 

पर सच 

काली  नहीं हैं 

मेरी आँखें  ,

बस    

राख बन गयी हैं 

कुछ ख्वाहिशें ...





85 comments:

मनोज कुमार Tue Sept 21, 08:20:00 pm  

अभी तो सिर्फ़ तस्वीर देखी है।
बहुत अच्छी है।
कविता पर बाद में।

रचना दीक्षित Tue Sept 21, 08:30:00 pm  

ये तो बिन काजल कजरारी ऑंखें हो गयीं. लाजवाब

अनामिका की सदायें ...... Tue Sept 21, 08:32:00 pm  

आँखे तो नहीं मांगूंगी...
इस राख को ही भेज देना मेरे पास
देखूं तो ज़रा कैसा रंग है
इस राख का..
और क्या क्या समाया है इसमें ?

:):):):)

सुंदर और गहरी प्रस्तुति.

shikha varshney Tue Sept 21, 08:57:00 pm  

ओह ऐसी कजरारी आँखें न मिले किसी को ..
बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति दी !

सूबेदार Tue Sept 21, 09:05:00 pm  

कबिता छोटी है लेकिन
घाव गहरे है
अति सुन्दर.

राजकुमार सोनी Tue Sept 21, 09:09:00 pm  

ख्वाहिश श्रृंखला की एक और महत्वपूर्ण रचना.
शानदार
आपने जिन आंखों का चयन किया है वह भी जानदार है.

M VERMA Tue Sept 21, 09:19:00 pm  

अत्यंत खूबसूरती प्रदान किया है आपने भाव पिरोने में
उफ! आँखे कजरारी इसलिये कजरारी होती हैं क्या !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' Tue Sept 21, 09:19:00 pm  

मेरी आँखें ,
बस
राख बन गयी हैं
--
--
आँखों ने सब कुछ बोल दिया है!
--
बहुत सुन्दर रचना!

deepti sharma Tue Sept 21, 09:21:00 pm  

कभी कभी ख्वाब आँख मे ही राख बन जाते है

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति है आपकी
deepti sharma(deeps)

प्रवीण पाण्डेय Tue Sept 21, 09:24:00 pm  

उफ्फ, बस कुछ ओर नहीं आता विचार।

Aruna Kapoor Tue Sept 21, 10:10:00 pm  

बस


राख बन गयी हैं


कुछ ख्वाहिशें ...
...काली आंखे बहुत कुछ कह रही है....सुंदर रचना...बधाई!

सु-मन (Suman Kapoor) Tue Sept 21, 10:10:00 pm  

बहुत सुन्दर.............

sonal Tue Sept 21, 10:23:00 pm  

सच में बिलकुल सच लिखा है

DR.ASHOK KUMAR Tue Sept 21, 10:41:00 pm  

बहुत गहरी भावपूर्ण अभिव्यक्ति। इतनी सुन्दर पँक्तियाँ............ लाजबाव। आभार! -: VISIT MY BLOG :- Sansar( कविता/गजलेँ )

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' Tue Sept 21, 10:50:00 pm  

बस
राख बन गयी हैं
कुछ ख्वाहिशें ...

आंखों की स्याही को इस रूप में भी पेश किया जा सकता है...पहली बार जाना...और अच्छा लगा.

सम्वेदना के स्वर Tue Sept 21, 10:51:00 pm  

संगीता दी,
बस इतना हीः
.
मत तारीफ करो इन आँखों की
मातम में ये बातें अच्छी नहीं लगती
अभी अभी ख्वाहिशों की चिता जली है
और राख बिखरी हैं आँखों के श्मशान में.

.
बहुत ख़ूबसूरत जज़्बात!!

वीना श्रीवास्तव Tue Sept 21, 11:02:00 pm  

देखन में छोटे लगें घाव करें गम्भीर

रानीविशाल Tue Sept 21, 11:29:00 pm  

उफ़ ! बड़ी गहरी कसक ख्वाइशों के जल जाने की ....काम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह दी आपने दी
आभार

अरुण चन्द्र रॉय Tue Sept 21, 11:51:00 pm  

कम शब्दो मे जीवन का सार कह जाती है आप... सुन्दर रच्ना...

Kusum Thakur Wed Sept 22, 01:19:00 am  

बहुत खूब ....आभार !

Apanatva Wed Sept 22, 04:16:00 am  

aapka saamee koi nahee..........

स्वप्न मञ्जूषा Wed Sept 22, 06:27:00 am  

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति..!

राजभाषा हिंदी Wed Sept 22, 07:51:00 am  

बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
काव्य प्रयोजन (भाग-९) मूल्य सिद्धांत, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

वाणी गीत Wed Sept 22, 08:02:00 am  

काली नहीं है मेरी आँखें ...
बस कुछ ख्वाहिशें राख हो गयी है ...
वाह ...!

ashish Wed Sept 22, 08:02:00 am  

उम्दा रचना . अब तो मै जितनी भी कजरारी आंख देखूंगा , सोचूंगा कितना दर्द छुपा है उनमे .

हास्यफुहार Wed Sept 22, 08:38:00 am  

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

मुदिता Wed Sept 22, 08:45:00 am  

दीदी,
उफ्फ्फ्फ्फ्फ़..... क्या लिखती हो..... और मैं तो अपनी आंखें काजल डाल डाल कर काली करती हूँ....तौबा ऐसी बिना काजल की कजरारी आँखों से....ख्वाहिशों की राख ...ओह..!!! सोच के भी झुरझुरी चढती है....

रश्मि प्रभा... Wed Sept 22, 08:55:00 am  

bhawnaaon ki her lahren chhu ker jati hain

अजित गुप्ता का कोना Wed Sept 22, 09:26:00 am  

ख्‍वाइशों का राख होना और आँखों में दिख जाना लेकिन सुंदरता की आड में अन्‍दर का सबकुछ छिप जाना।

Anonymous Wed Sept 22, 10:13:00 am  

hmmm.....aankhein....

khoobsurat aankhon ke peeche kai gehre raaz hote hain, par khwaaishon ki raakh...? waah.....aap hi soch sakti thi ye

वीरेंद्र सिंह Wed Sept 22, 10:33:00 am  

गहरा भाव लिए दमदार प्रस्तुति....
आभार .

Majaal Wed Sept 22, 10:33:00 am  

उम्दा अभिव्यक्ति . पता नहीं आपने पहले कोशिश करी है या नहीं, पर मुझे लगता है की आप कमाल के शेर भी लिख सकती है... और शायद ग़ज़ल भी ..

वो लिंक के बारें में, अगर आपको या किसी साथी को HTML की थोड़ी जानकारी हो, तो नयी विंडो लिंक के लिए यह आजमाकर देखे. वैसे तो राईट क्लिक से भी काम चल जाएगा पर शायद सबको उस बारें में पता न हो ...
http://www.echoecho.com/htmllinks10.htm

रेखा श्रीवास्तव Wed Sept 22, 10:43:00 am  

आँखों के रूप को कहाँ से जोड़ दिया ? बहुत सुन्दर यही आँखें तो हैं जो हर ख़ुशी और गम कि साक्षी होती हैं और हर हाल में रोटी भी है और हंसती भी हैं. काली इसलिए हैं कि इन पर कोई रंग असर नहीं करता वे तो सम ही रहती हैं. सब जहेज कर फिर अपने काम में लग जाती हैं.

Neelam Wed Sept 22, 11:34:00 am  

aapke chand shabdon ne behadd bhavuk kar diya...


कहा था यूँ

कि

अब जँचती हैं..

तुम्हारी..

कजरारी आँखें

पर सच

काली नहीं हैं

मेरी आँखें ,

बस

राख बन गयी हैं

कुछ ख्वाहिशें ...

sach raakh hoti khawaahishen....ufff

Neelam Wed Sept 22, 11:34:00 am  

aapke chand shabdon ne behadd bhavuk kar diya...


कहा था यूँ

कि

अब जँचती हैं..

तुम्हारी..

कजरारी आँखें

पर सच

काली नहीं हैं

मेरी आँखें ,

बस

राख बन गयी हैं

कुछ ख्वाहिशें ...

sach raakh hoti khawaahishen....ufff

Roshani Wed Sept 22, 12:53:00 pm  

नमस्ते संगीता दीदी, आपने बहुत ही प्यारा लिखा है. इस खुबसूरत और संवेदनशील नज़्म के सृजन के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ....
आपकी रोशनी :)

लोकेन्द्र विक्रम सिंह Wed Sept 22, 02:15:00 pm  

वाह............ बेहतरीन रूप में ख्वाहिशो की दास्ताँ.....

Khare A Wed Sept 22, 03:51:00 pm  

big things in small pack

kammal ki prastuti

kam shabdon me pura saar

vandan gupta Wed Sept 22, 03:59:00 pm  

बस

राख बन गयी हैं

कुछ ख्वाहिशें ...

यही तो आँखों की करामात है …………सब कुछ समा लेती हैं………………बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

Urmi Wed Sept 22, 04:20:00 pm  

काली नहीं हैं
मेरी आँखें ,
बस
राख बन गयी हैं
कुछ ख्वाहिशें ...
छोटी सी सुन्दर रचना के माध्यम से आपने बहुत ही गहरी बात का ज़िक्र किया है! उम्दा रचना!

दिगम्बर नासवा Wed Sept 22, 05:06:00 pm  

उफ्फ कितनी तड़प है इन लाइनों में ... कजरारी आँखें नही रख हैं कुछ ख्वाहिशें .... लाजवाब ...

डॉ टी एस दराल Wed Sept 22, 05:11:00 pm  

ख्वाहिशें भी निखर कर आ गई हैं ।
अति सुन्दर ।

अंजना Wed Sept 22, 07:44:00 pm  

sundar abhivyakti

Happy Anant Chaturdashi
GANESH ki jyoti se noor miltahai
sbke dilon ko surur milta hai,
jobhi jaata hai GANESHA ke dwaar,
kuch na kuch zarror milta hai
“JAI SHREE GANESHA”

ताऊ रामपुरिया Wed Sept 22, 07:50:00 pm  

बहुत सुंदर और गहरे भाव.

रामराम

अजय कुमार Wed Sept 22, 08:08:00 pm  

वोह!! कजरारी आंखों का ऐसा सच्च्च्च-

rashmi ravija Wed Sept 22, 08:10:00 pm  

बहुत ही बढ़िया....कम शब्दों में गहरे भाव....कजरारी आँखों का एक सच यह भी होता है.

Sadhana Vaid Wed Sept 22, 11:59:00 pm  

अत्यंत प्रभावशाली अभिव्यक्ति ! आपकी रचना के तीर ठीक निशाने पर जाकर लगते हैं ! आपके इस शब्द संधान की जितनी दाद दी जाए कम है ! वाह वाह वाह !

Sadhana Vaid Wed Sept 22, 11:59:00 pm  

अत्यंत प्रभावशाली अभिव्यक्ति ! आपकी रचना के तीर ठीक निशाने पर जाकर लगते हैं ! आपके इस शब्द संधान की जितनी दाद दी जाए कम है ! वाह वाह वाह !

लोकेन्द्र सिंह Thu Sept 23, 01:06:00 am  

सुंदर और गहरी प्रस्तुति.

पी.सी.गोदियाल "परचेत" Thu Sept 23, 10:36:00 am  

बस


राख बन गयी हैं


कुछ ख्वाहिशें ...


वाह ! बेहतरीन, संगीता जी !

सदा Thu Sept 23, 03:07:00 pm  

पर सच

काली नहीं हैं

मेरी आँखें ,

बस

राख बन गयी हैं

कुछ ख्वाहिशें ...
सुन्‍दर शब्‍द लिये हुये बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

Kailash Sharma Thu Sept 23, 03:27:00 pm  

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति.....

sandhyagupta Thu Sept 23, 04:36:00 pm  

देखन में छोटे लगें घाव करें गंभीर!

जिस बात को कहने में कई पृष्ठ रंगने पड़ते कितनी आसानी से कह दिया आपने.

Shabad shabad Fri Sept 24, 05:15:00 am  

बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति !!

सुनीता शानू Fri Sept 24, 08:12:00 am  

सुन्दर भावमय कविता है। तस्वीर भी बहुत अच्छी लगी। सादर।

Urmi Fri Sept 24, 10:14:00 am  

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

शोभना चौरे Fri Sept 24, 01:13:00 pm  

बहुत कुछ कह गई ये आंखे और उनकी ख्वाहिशे |

कुमार राधारमण Fri Sept 24, 03:14:00 pm  

मेरे मन में उठती उमंग
उड़ जाऊँ नभ में पंख खोल।
उस खुली हवा का चखूं स्वाद
जिसके बदले न चुके मोल।।

RAJWANT RAJ Fri Sept 24, 06:34:00 pm  

lajwab . bs mhsoos kiya ja skta hai is ehsas ko .

मिसिर Sat Sept 25, 11:36:00 am  

सुन्दर,अनूठा लेखन !

राज भाटिय़ा Sat Sept 25, 01:28:00 pm  

बहुत ही सुंदर कविता, धन्यवाद

Anjana Dayal de Prewitt (Gudia) Sun Sept 26, 03:19:00 am  

बस

राख बन गयी हैं

कुछ ख्वाहिशें ...

Bahut bahut sunder!

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Mon Sept 27, 12:39:00 am  

Few words express than a novel

Satish Saxena Mon Sept 27, 09:20:00 am  

बहुत खूब ! शुभकामनायें आपको !

एक बेहद साधारण पाठक Mon Sept 27, 08:03:00 pm  

स्ट्राबेरी आँखें ....
सोचती क्या हैं ... ???

एक बेहद साधारण पाठक Mon Sept 27, 08:04:00 pm  

स्ट्राबेरी आँखें ....
सोचती क्या हैं ... ???
[ये एक गीत के बोल हैं]

रचना अच्छी लगी :)

Asha Joglekar Tue Sept 28, 01:10:00 am  

Kalee Kalee aankhon ka ye raj kuch alag sa hai.

शरद कोकास Tue Sept 28, 02:01:00 am  

काजल भी एक तरह से राख ही है ।

रविंद्र "रवी" Mon Oct 11, 10:51:00 pm  

बस राख बन गयी है मेरी आँखे! बहुत ही सुन्दर!!!

हरीश प्रकाश गुप्त Sun Oct 31, 02:14:00 pm  

कम पंक्तियों में बहुत गहरी बात कही है।
आभार।

रफ़्तार

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