ऐ ज़िन्दगी बता !
>> Wednesday, 3 March 2021
दरक गया है
इस कदर दिल
कि ऐ ज़िन्दगी
बता कैसे मैं
तेरा ऐतबार करूँ ?
अपनी ही सोचों में
गुम है मन मेरा
तो भला बता कि
मैं कैसे तुझसे
प्यार करूँ ?
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और - बसन्त मुरझा गया
>> Friday, 26 February 2021
सर ए राह
मुड़ गए थे कदम
पुराने गलियारों में
अचानक ही
मिल गयीं थीं
पुरानी उदासियाँ
पूछा उन्होंने
कैसी हो ? क्या हाल है ?
मुस्कुरा कर
कहा मैंने
मस्तम - मस्त
बसन्त छाया है ।
सुनते ही इतना
जमा लिया कब्ज़ा
उन्होंने मेरे ऊपर
और -
बसन्त मुरझा गया ।
बासंती मन
>> Wednesday, 10 February 2021
बड़े जतन से
छिपा रखी थी
एक पोटली
मन के किसी कोने में
खोल दी आज
गिरह लबों की
खुलते ही गाँठ
सारे शिकवे - शिकायतें
चाहे - अनचाहे
ख्वाब और ख्वाहिशें
बिखर गए सामने ।
उठा कर नज़र से
एक एक को
समेट ही तो लिया
तुमने बड़े करीने से ,
बस -
मन बासन्ती हो गया ।
संगीता स्वरुप
10 - 02- 21
भ्रष्ट आचार
>> Friday, 25 October 2013
स्वतंत्र भारत की नीव में
उस समय के नेताओं ने
अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के
रख दिये थे भ्रष्ट आचार
फिर देश से कैसे
खत्म हो भ्रष्टाचार ?
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क्षणिका / सर्वाधिकार सुरक्षित
आहार बनाम हार
>> Thursday, 18 July 2013
आहार नाम
हार गया जीवन
कैसी है नीति ?
बालक शव
ममता का चीत्कार
है राजनीति ।
कैसी है शिक्षा
नहीं लौटेगा लाल
मारा तृष्णा ने ।
मौन हैं नेता
विपक्ष पर वार
स्वयं हैं पाक ।
शर्मिंदगी से
सिर झुकाये सभी
आंखे सजल ।
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