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सच ठिठकी निगाहों का

>> Thursday, 21 February 2013


सफर के दौरान 
खिड़की से सिर टिकाये 
ठिठकी सी निगाहें 
लगता है कि 
देख रही हैं 
फुटपाथ और झाड़ियाँ 
पर निगाहें 
होती हैं स्थिर 
चलता रहता है  
संवाद मन ही मन 
उतर आता है 
पानी खारा 
खुद से बतियाते हुये 
खिड़की से झाँकती आंखे 
लगता है कि ठिठक गयी हैं । 

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शगल ....

>> Friday, 1 February 2013




मेरे मन के समंदर में
तुमने उछाल दिये 
बस यूं ही 
कुछ शब्दों के पत्थर 
और देखते रहे 
उनसे बने घेरे 
जो भावनाओं की लहरों पर 
बन औ  बिगड़ रहे थे 
शायद  तुम्हारा तो मात्र 
यह शगल रहा था 
पर वो पत्थर 
समंदर में कहीं 
गहरा गड़ा  था ।


 

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तोहफा जन्मदिन का

>> Thursday, 20 December 2012

प्रिय शिखा के जन्मदिन पर .... कुछ हाइकु रचनाएँ 


जन्मदिन का 
नन्हा सा  है  तोहफा 
मेरी ओर से 

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सालगिरह 
खुशियाँ ही खुशियाँ 
सहेजो तुम 


स्नेह से भरी 
रहे झोली तुम्हारी 
मिले आशीष । 

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कर्मयोगी सा 
बीते जीवन सारा 
यही कामना । 


हंसी चाँदनी 
चंचल चितवन 
देती सुकून । 

Shikha Varshney

तेरा नेह ही 
देता मुझे संबल 
मेरी प्रेरणा ।



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गमकती यादें ..../ हाइकु

>> Wednesday, 12 December 2012





यादों की झड़ी 
खुशी - गम  का साया 
आँखों से झरी ।


 
      
सुकून मिला 
तेरी यादों का टेसू 
गमक गया । 


यादों के घेरे 
तुम जैसे सम्मुख 
बंद थीं आँखें । 


अमलतास  सा 
खिला तेरा चेहरा 
यादों में बसा ।


कब भूली मैं 
पल -पल बिताया 
साथ सँजोया । 

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दीप बन कर देखो .... / हाइकु

>> Monday, 12 November 2012






मन का दीप 
रोशन कर देखो 
खुशी ही खुशी 



माटी का दिया 
एक रात की उम्र 
ज्योति से भरा ।


आम आदमी 
लगा रहा हिसाब 
कैसे हो पर्व ? 


लगाएँ बाज़ी 
परंपरा के नाम 
पत्तों का खेल । 


बम - पटाखे 
क्षण भर की खुशी 
धुआँ ही धुआँ ।


दीयों की बाती 
उजियारा  फैलाती 
स्वयं  जलती । 

दीपावली की  सभी को हार्दिक शुभकामनायें ।

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आस्था और चाँद / हाइकु

>> Friday, 2 November 2012



चौथ का चाँद 
आँखों में  उतरता 
प्रेम दर्शाये । 





देखा जो चाँद 
धरती के चाँद ने 
मन हर्षाया । 





उठी निगाहें 
चाँद की प्रतीक्षा में 
करें अर्चना । 






नेह बंधन 
स्वीकारें  मन से 
चाँद है साक्षी । 





बिना प्रेम के 
परंपरा के लिए 
न करो व्रत । 




मन की आस्था 
चाँद  में निहारती 
उम्र पति की .






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माँ की भक्ति / हाइकु रचनाएँ

>> Tuesday, 16 October 2012



कन्या पूजन?  
दोहरा मापदंड 
हत्या भ्रूण की ।
नवरात्रि  में 
किया माँ का आह्वान 
माँ को पूछा क्या ?


शैल पुत्री को 
शिला ही बना डाला 
पूजें पत्थर । 


माँ की अर्चना 
लाउडस्पीकर पे 
शोर ही शोर । 

कैसी है भक्ति 
नमन पाहन को 
माँ तरसती । 


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रफ़्तार

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