copyright. Powered by Blogger.

ख्वाहिश ....

>> Wednesday, 31 March 2021

 


ख्वाहिश थी मेरी कि


कभी मेरे लिए 

तेरी आँख से 

एक कतरा निकले 

भीग जाऊँ मैं 

इस कदर उसमें 

कि  समंदर भी 

कम गहरा निकले ।




55 comments:

Digvijay Agrawal Wed Mar 31, 11:22:00 am  

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 31 मार्च 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

उषा किरण Wed Mar 31, 12:11:00 pm  

तेरे डूबने के डर से
पी लिए आँसू मैंने
आ हाथ पकड़ जानाँ
डूबते हैं मिल के
इश्क के समन्दर में
चल डूबके ही अबके
हम पार उतरते हैं😊

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 12:27:00 pm  

तेरे आँसुओं का
यूँ पी लेना ही
दर्द बन गया
मेरे सीने का ,जानाँ
चल हाथ पकड़
बारिश में खड़े हो लें
इश्क के समंदर में
डूब के रो लें ।

रश्मि प्रभा... Wed Mar 31, 12:43:00 pm  

ख्वाहिशें इतनी गहरी थीं कि खुद की आंखें बहते बहते शुष्क हो गईं

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 12:44:00 pm  

उषाजी ,
आपकी लिखे पर मेरे चंद अल्फ़ाज़ । जो ऊपर लिखे । 😍😍

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 12:47:00 pm  

शुक्रिया , रश्मि जी
शुष्क थीं आंखें
तो बड़ी बेचैनी थी
तभी आंखों में मैंने
समंदर भर लिए ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 12:49:00 pm  

शुक्रिया दिग्विजय जी ।

उषा किरण Wed Mar 31, 01:10:00 pm  

वाह वाह ...क्या बात❤️

उषा किरण Wed Mar 31, 01:22:00 pm  

तिरे-मिरे इश्क के
ताने- बाने से
आ, बुन लें
रेशा- रेशा
रंग देना फिर चाहें
अपने ही रंग में
अपने जैसा...!!😊

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 01:32:00 pm  

उषा जी , कमाल है 👌👌.
आपके लिए ---
इश्क का ताना बाना हो
या हो चाहत का रेशा रेशा
हमने तो रंगा है रूहों को
बनाना है क्या मेरे जैसा ? 😍😍

बहुत रंगरेज चढ़ा हुआ है न तो मैंने भी लिख दिया ।

Sweta sinha Wed Mar 31, 01:44:00 pm  

वाह क्या बात है दी समुंदर से गहरे भाव गूँथ दिये चंद शब्दों में...
मेरी भी कुछ पंक्तियाँ
अपनी भीगी पलकों पे सजा लूँ तुमको
दर्द कम हो गर थोड़ा सा पा लूँ तुमको

तू चाँद मख़मली तन्हा अंधेरी रातों का
चाँदनी सा ओढ़ ख़ुद पे बिछा लूँ तुमको

खो जाते हो अक्सर ज़माने की भीड़ में
आ आँखों में काजल सा छुपा लूँ तुमको।

----
सस्नेह
सादर।

उषा किरण Wed Mar 31, 01:44:00 pm  

चलिए बात खत्म करते हैं-
इश्क में दो कहाँ
आ पिघल कर
हो जाएं एक
रंग जाएं
इश्क के
आठवें रंग में
आज!!!😊

देवेन्द्र पाण्डेय Wed Mar 31, 02:22:00 pm  


मुझे अच्छा नहीं लगता दर्द का यूँ छलक हो जाना।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 02:26:00 pm  

देवेंद्र जी ,
यहां आने का शुक्रिया । वाकई दर्द का यूँ छलकना अच्छा तो नहीं लगता लेकिन ---
छलके नहीं दर्द तो नासूर हो जाता है
न चाहते हुए भी आँखों का नूर हो जाता है ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 02:38:00 pm  

प्रिय श्वेता ,
मैंने तो चंद अल्फ़ाज़ लिखे थे , यूँ ही एक ख्याल आया जो ख्वाहिश बन गयी , यूँ चाहत नहीं किसी की भी आँख से कोई कतरा बहे , मासूम सा ख्याल था जो शब्दों में उतर आया । और यहाँ इतने प्यारे प्यारे ख्याल मिल रहे कि क्या कहूँ ----

काजल सा बना जो तुमने मुझे छिपाया है
चांदनी ओढ़ जो खुद पर मुझे बिछाया है
हर दर्द की दवा जैसे पा ली है अब मैंने
भीगी पलकों को तेरी, मेरे लब ने सहलाया है ।

shikha varshney Wed Mar 31, 03:38:00 pm  

इस डर से हम अपनी आंखें नहीं भरते, कहीं तेरी तस्वीर जो उसमें है, वह बह न जाये।

Meena Bhardwaj Wed Mar 31, 04:50:00 pm  

गागर में सागर समान भावाभिव्यक्ति ।

yashoda Agrawal Wed Mar 31, 05:46:00 pm  

भीग जाऊँ मैं
यही वे तीन शब्द
प्राण हर लेते हैं
सादर नमन

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 06:28:00 pm  

क्या बात शिखा । हमारा ही वार हम पर 😄😄
अपनी आंखों में जो तस्वीर बना कर बिठाया
कसम है जो तुमने एक कतरा भी गर बहाया
अगर टपका एक भी आँसू तुम्हारी आँखों से
टप से टपक पड़ूँगी जो अब तक था तुमने बचाया ।

वाणी गीत Wed Mar 31, 07:43:00 pm  

आँसू तेरे रहे
मन मेरा सीला...

पलकें यहाँ कुछ नम सी हैं
कोई अश्क तूने पलकों पर उतारा है वहाँ.

जुड़ती जाती भावनाएं शब्दों के सहारनपुर.
खूब रही यह भी!

वाणी गीत Wed Mar 31, 07:44:00 pm  

*शब्दों के सहारे...
उपर सहारनपुर हो गया 😂

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 07:54:00 pm  

🤣🤣 यूँ ये सहारनपुर भी बुरा नहीं

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 08:21:00 pm  

अहा वाणी ,कितना सुंदर लिखा तुमने ।
मन मेरा सीला पर मुझे अपनी ही लिखी एक छोटी नज़्म याद आयी ----

सहेज लिए
मैंने
तेरे आंसू
सारे के सारे
अपनी कमीज़ की
जेब में
अब
हर पल
मेरा दिल
सीला - सीला सा
रहता है ...

बहुत बहुत शुक्रिया

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 08:22:00 pm  

बस इस एहसास ने मन खुश कर दिया । शुक्रिया यशोदा

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Mar 31, 08:23:00 pm  

बहुत बहुत शुक्रिया मीना जी ।

ज्योति सिंह Wed Mar 31, 10:40:00 pm  

रचना के साथ साथ कंमेंट भी कमाल के है, होड़ लगी हुई है यहाँ तो रचनाकारों के बीच , लाजवाब शानदार पोस्ट, आनंद ही आनंद हार्दिक शुभकामनाएं

anita _sudhir Thu Apr 01, 12:20:00 am  

वाह क्या बात

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' Thu Apr 01, 01:09:00 pm  

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।
अन्तर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस की बधाई हो।

Amrita Tanmay Thu Apr 01, 01:15:00 pm  

वाह ! सभी समंदर में उब-डुब कर गोता लगा रहे हैं । मेरी भी छलांग है ...

Sudha Devrani Thu Apr 01, 05:21:00 pm  

रचना और प्रतिक्रियाएं कमाल की बन पड़ी हैं सबकी....
वाह!!!
मजा आ गया.. बहुत ही लाजवाब।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Thu Apr 01, 07:50:00 pm  

बस यही आनंद होना चाहिए । पसंद करने के लिए दिल से शुक्रिया

संगीता स्वरुप ( गीत ) Thu Apr 01, 07:51:00 pm  

बस जी सब गोता मार रहे ,तुम्हारी छलाँग की ही तो कमी थी .. पूरी कर दी तुमने । शुक्रिया

संगीता स्वरुप ( गीत ) Thu Apr 01, 07:52:00 pm  

सुधा जी ,
रचना से ज्यादा तो प्रतिक्रिया आ गयी ....
शुक्रिया पसंद करने का ।

Satish Saxena Fri Apr 02, 10:38:00 am  

ओह...
मरुथल से उम्मीदें करतीं, भरती रहतीं आहें !
झड़े हुए सूखे पत्तों से, क्यों इतनी आशाएं !

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Apr 02, 11:37:00 am  

Satish Saxena जी शुक्रिया

मरुस्थल में भी कभी नखलिस्तान दिखाई देते हैं ,
सूखे पत्ते भी कभी किसलय का सबब बनते हैं

रेखा श्रीवास्तव Fri Apr 02, 03:18:00 pm  

तो फिर से शुरू हो गई ब्लॉगिंग । लिखा बहुत गहराई से । अंदर तक छू गया ।

Dr Varsha Singh Fri Apr 02, 03:48:00 pm  

बहुत ख़ूब... शब्द-शब्द हृदयग्राही

रेणु Fri Apr 02, 04:36:00 pm  

प्रिय दीदी, निशब्द हूँ। एक तो रचना मन को छू गयी उपर से प्रतिक्रियाओं की कतार एक से बढ़कर एक। वाह वाह और सिर्फ वाह। सभी को नमन सभी को आभार 🙏🙏🌹🌹💐💐

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Apr 02, 07:56:00 pm  

रेखा जी ,
फिर से एक कोशिश । आप आईं , अच्छा लगा ।
शुक्रिया

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Apr 02, 07:59:00 pm  

प्रिय रेणु ,
मुझे तो इंतज़ार था कि तुम भी कुछ अपने भाव जोड़ोगी । कुछ तो नमी होती 😄😄 ।
पसंद करने के लिए शुक्रिया

Jigyasa Singh Sat Apr 03, 09:00:00 pm  

किसी ने इस खूबसूरत दरिया में गोता लगाया किसी ने छलांग ।
मैं तो डूब गई इस दौरान,
कसम से मजा आ गया आपकी सुंदर रचना को मन में उतारकर,
साथ ही शानदार प्रतिक्रियाओं का नजराना पढ़कर ।।
आपको आभार और आपके साथ साथ सभी को नमन ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Sat Apr 03, 09:52:00 pm  

जिज्ञासा ,
आपने भी प्रतिक्रिया में इजाफा कर दिया कुछ तुकबंदी तो आपकी भी मज़ा दे रही ... बहुत बहुत शुक्रिया .

Jyoti khare Sat Apr 03, 10:32:00 pm  

मन को छूती रचना
सहजता से गहरी बात कह दी
वाह

Jyoti Dehliwal Sun Apr 04, 12:01:00 pm  

दिल को छूती बहुत सुंदर रचना, संगिता दी।

virendra sharma Tue Apr 06, 07:37:00 pm  


ख्वाहिश थी मिरि ,

कभी मेरे लिए

तेरी आँख से

एक कतरा क़तरा निकले

भीग जाऊँ मैं

इस क़दर उसमें

कि समंदर भी

उथला निकले ।

छोटी नज़्म कहें या क्षणिका बेहद खूबसूरत ख्याल है।
क्षेपक :

ख्वाइश थी मिरि ,
मौत बन तू आये ,
बादे मर्ग ,

तेरे साथ रहूं।

विशेष :बादे मर्ग= मौत के बाद।

छोटी बैर की अतिथि नज़्म :संगीता स्वरूप गीत

virendra sharma Tue Apr 06, 07:38:00 pm  


ख्वाहिश थी मिरि ,

कभी मेरे लिए

तेरी आँख से

एक कतरा क़तरा निकले

भीग जाऊँ मैं

इस क़दर उसमें

कि समंदर भी

उथला निकले ।

छोटी नज़्म कहें या क्षणिका बेहद खूबसूरत ख्याल है।
क्षेपक :

ख्वाइश थी मिरि ,
मौत बन तू आये ,
बादे मर्ग ,

तेरे साथ रहूं।

विशेष :बादे मर्ग= मौत के बाद।

छोटी बैर की अतिथि नज़्म :संगीता स्वरूप गीत

संगीता स्वरुप ( गीत ) Tue Apr 06, 10:16:00 pm  

@@ ज्योति खरे जी ,

हार्दिक आभार .

@@ ज्योति देहलीवाल ,

बहुत बहुत शुक्रिया .

संगीता स्वरुप ( गीत ) Tue Apr 06, 10:17:00 pm  

वीरेंद्र शर्मा जी ,

आपकी टिप्पणी का हार्दिक स्वागत ...

छोटे बहर की बहुत शानदार नज़्म कही है ...

तहेदिल से शुक्रिया .

सदा Wed Apr 07, 05:42:00 pm  

बहुत ही गहनतम ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Apr 07, 10:15:00 pm  

@
सदा ,
बहुत शुक्रिया .

About This Blog

Labels

Lorem Ipsum

ब्लॉग प्रहरी

ब्लॉग परिवार

Blog parivaar

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

लालित्य

  © Free Blogger Templates Wild Birds by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP