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रंगरेज़

>> Friday, 23 April 2021

 


इश्क़ तो 


खुद है रंगरेज़


रंग देता 


मन को 


जैसे हो केसर ,


रे मन !


कभी तो 


इस रंग के 


समंदर  में उतर । 





23 comments:

shikha varshney Fri Apr 23, 03:02:00 pm  

उतर तो जाएँ ... फिर कहीं गहरे उतर गए तो बचाएगा कौन? डूबने का खतरा है रे ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Apr 23, 03:18:00 pm  

एक बार डूब जाओ तो बचने की कौन सोचता है 😄😄😄 ।
और जो पहले बचने की सोचे वो तो शायद उतर ही नहीं सकता । 😆😆

मुदिता Fri Apr 23, 06:17:00 pm  

जे बात 😊😊👌👌👌👌

मुदिता Fri Apr 23, 06:19:00 pm  

ये तो केसरिया रंग में रंग गयी भई ....😍😍😍 कम शब्दों में पूरा फ़लसफ़ा उतार दिया समर्पण का

मुदिता Fri Apr 23, 06:19:00 pm  
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मुदिता Fri Apr 23, 06:19:00 pm  
This comment has been removed by a blog administrator.
Sweta sinha Fri Apr 23, 06:20:00 pm  

समुंदर की
गहराई नापने की
उत्सुकता में
एक बार छू लिया
मचलते लहरों के सीने को
तब से हूँ लापता
विस्तृत समुंदर के
पाश में आबद्ध :)
----
बेहद खूबसूरत पंक्तियाँ दी।

सादर।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Apr 23, 06:34:00 pm  

फलसफा उतारना हो तो पूरा उतारो । खाली हाथ पैर मारने से क्या फायदा । डूबो तो ऐसे कि खुद का पता न रहे । 😆😆😆

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Apr 23, 06:38:00 pm  

प्रिय श्वेता ,

गहराईयों को ,
नापने की ख्वाहिश
लापता कर देती है
और
बाँध देती है मन
न जाने
किस पाश में ।

पसंद करने के लिए शुक्रिया । सस्नेह

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Apr 23, 06:40:00 pm  

मुदिता ,
ये ... जे बात ... भी जबरदस्त बात है 😄😄😄

उषा किरण Fri Apr 23, 09:21:00 pm  

जो उतरा इस समंदर में वो पार हुआ !

Sandhya Jain Sat Apr 24, 01:35:00 am  

केसरिया रंग यूं चढ़ा जो तेरा
मन खिलखिला यूं बोला मेरा
डूबती जा इश्क ए समन्दर में
आखिर यही तो है जहां तेरा

संगीता स्वरुप ( गीत ) Sun Apr 25, 02:54:00 pm  

उषा जी ,
या तो पर हुआ या डूब गया 😄😄 .

शुक्रिया ,प्यारी टिप्पणी का ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Sun Apr 25, 02:58:00 pm  

प्रिय संध्या,
ओहो , क्या बात 👌👌
मुझे तो लगता जैसे बिना डुबाये मानोगी नहीं 😆😆😆.

प्यारी टिप्पणी के लिए शुक्रिया ।

Meena Bhardwaj Sun Apr 25, 04:13:00 pm  

बेहतरीन और लाजवाब भावाभिव्यक्ति । आपके ब्लॉग पर आ कर अभिभूत हो जाता है मन ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Mon Apr 26, 01:13:00 pm  

मीना जी ,
आप लोगों का स्नेह है । बहुत बहुत शुक्रिया ।

Jigyasa Singh Mon Apr 26, 05:40:00 pm  

बहुत सुंदर पंक्तियां,इस समय अगर मन इस समंदर में उतर जाय तो क्या कहने ? और चाहिए क्या जीवन के लिए ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Tue Apr 27, 10:25:00 am  

शुक्रिया जिज्ञासा , बस उतरता ही तो नहीं इस रंग में 😄😄

Sudha Devrani Tue Apr 27, 06:23:00 pm  

मन इश्क के केसरी रंग के समन्दर में उतरे न उतरे
हम आपके भावपूर्ण लेखन में उतरते जा रहे हैं
वाह!!!
लाजवाब।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Apr 28, 01:04:00 pm  

शुक्रिया सुधा जी ,
इश्क़ लेखन से भी हो सकता है । 😄😄😄

Jyoti Dehliwal Fri Apr 30, 07:45:00 am  

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, संगिता दी।

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