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बरगद !!!!

>> Saturday, 8 May 2021

 


ज़िन्दगी की धूप  में



राही  बढ़ जाता है आगे

छाँव  की तलाश में

और

बरगद

अपनी बाहें फैलाये

रह जाता है

एक जगह

ठिठका सा .





18 comments:

वाणी गीत Sat May 08, 03:36:00 pm  

बरगद जहाँ है ठंडक वहीं रह गईं, आगे बढ़ जाने वाले मुसाफिर को पूरे रास्ते अहसास रहेगा.
बेहतरीन कविता!

shikha varshney Sat May 08, 04:12:00 pm  

राही बेशक बढ़ जाये पर बरगद की छांव कहाँ भूल सकेगा। गहरी कविता।

yashoda Agrawal Sat May 08, 04:34:00 pm  

ज़िन्दगी की धूप में
राही बढ़ जाता है आगे
छाँव की तलाश में
और
बरगद
अपनी बाहें फैलाये
व्वाहहह..
सादर नमन

Anupama Tripathi Sat May 08, 04:50:00 pm  
This comment has been removed by the author.
Anupama Tripathi Sat May 08, 04:50:00 pm  

रास्ते और मंजिल की कथा कहती है ये व्यथा...
बेहतरीन कविता

सदा Sat May 08, 05:30:00 pm  

बेहद गहन भाव लिए शानदार अभिव्यक्ति ...

Sweta sinha Sat May 08, 05:33:00 pm  

वाह बेहतरीन अभिव्यक्ति दी
चंद शब्दों में गहरी बात।
----
छाँव छोड़कर छाँव की तलाश में,
राही उम्रभर तड़पता है अनजानी प्यास में।

Jigyasa Singh Sun May 09, 11:34:00 pm  

आपकी सुंदर सारगर्भित कविता, वृक्षों की उपयोगिता,उनका साथ कितना आवश्यक है,कुछ ही शब्दों में बता गई ।आपको मेरा नमन ।

Meena Bhardwaj Fri May 21, 09:13:00 pm  

गागर में सागर जैसी गहन अभिव्यक्ति ।

मन की वीणा Fri May 28, 07:44:00 pm  

गहन भाव कविता प्रतीकात्मक शैली

मन की वीणा Fri May 28, 07:45:00 pm  

बहुत सुंदर सृजन।
छोटे में बहुत कुछ कहती रचना ।

Sudha Devrani Mon May 31, 06:12:00 pm  

बरगद से माँ-बाप बाँह फैलाए खड़े हैं इंतजार में...और बच्चे अपनी मंजिल अपने जीवनसाथी की तलाश में निकल पड़ते हैं बरगद से माँ-बाप की छाँव छोड़...।
क गहन अर्थ समेटे बहुत ही सारगर्भित एवं सार्थक कृति
वाह!!!

Harash Mahajan Thu Jun 10, 09:30:00 am  

अति सुंदर !!

Bharti Das Fri Jun 11, 11:59:00 pm  

बहुत खूब,बरगद की कोमल एहसास जैसे अपनो के विश्वास को तोड़कर आगे बढ जाते हैं

कविता रावत Mon Jun 14, 05:04:00 pm  

परोपकारी के पास बहुत बड़ा दिल होता है

अनीता सैनी Sat Jul 03, 02:37:00 pm  

वाह!सराहनीय दी।
सादर

Amrita Tanmay Tue Jul 27, 04:24:00 pm  

कहीं वो बरगद हम भी तो नहीं ...

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