आस्था और चाँद / हाइकु
>> Friday, 2 November 2012
चौथ का चाँद
आँखों में उतरता
प्रेम दर्शाये ।
देखा जो चाँद
धरती के चाँद ने
मन हर्षाया ।
उठी निगाहें
चाँद की प्रतीक्षा में
करें अर्चना ।
नेह बंधन
स्वीकारें मन से
चाँद है साक्षी ।
बिना प्रेम के
परंपरा के लिए
न करो व्रत ।
मन की आस्था
चाँद में निहारती
उम्र पति की .
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