copyright. Powered by Blogger.

उद्विग्नता

>> Tuesday, 27 July 2021

 


जीवन की उष्णता 
अभी ठहरी है ,
उद्विग्न है मन 
लेकिन आशा भी 
नहीं कर पा रही 
इस मौन के 
वृत्त  में प्रवेश 
बस एक उच्छवास ले 
ताकते हैं बीता कल ,
निर्निमेष नज़रों से 
लगता है कि 
अब पाना कुछ नहीं 
बस खोते ही 
जा रहे हर पल।

Read more...

बरगद !!!!

>> Saturday, 8 May 2021

 


ज़िन्दगी की धूप  में



राही  बढ़ जाता है आगे

छाँव  की तलाश में

और

बरगद

अपनी बाहें फैलाये

रह जाता है

एक जगह

ठिठका सा .





Read more...

रंगरेज़

>> Friday, 23 April 2021

 


इश्क़ तो 


खुद है रंगरेज़


रंग देता 


मन को 


जैसे हो केसर ,


रे मन !


कभी तो 


इस रंग के 


समंदर  में उतर । 





Read more...

ख्वाहिश ....

>> Wednesday, 31 March 2021

 


ख्वाहिश थी मेरी कि


कभी मेरे लिए 

तेरी आँख से 

एक कतरा निकले 

भीग जाऊँ मैं 

इस कदर उसमें 

कि  समंदर भी 

कम गहरा निकले ।




Read more...

इतिहास या इति का हास .

>> Sunday, 14 March 2021

जब जब 
मैंने इतिहास के 
पन्ने पढ़े हैं ,
तब तब 
हर खंडहर की नींव में 
मुझे गड़े  मुर्दे मिले हैं ,
नींव पर पड़ते ही 
किसी कुदाल का प्रहार ,
बिलबिला जाते हैं 
अक्सर इतिहासकार ।
असल में 
होता है जितना 
पुराना इतिहास ,
बढ़ती जाती है  
मुर्दों की संख्या , 
क्यों कि जान चुके है 
वो कि 
वो मौन हैं तो 
ज़िंदा हैं , 
ज़िंदा रहने के लिए 
मुर्दा होना ज़रूरी है 
लम्बे इतिहासों में 
अपने  हिसाब से ,
बदल दिया जाता है 
अक्सर इतिहास ,
नई पीढ़ी से इस तरह 
किया जाता है परिहास ।
फिर भले ही चाहे वो 
चार हज़ार दिन का हो ,
या हो चार हज़ार साल का
किसी को नहीं होता 
मलाल इस बात का ,
चकित सी जनता 
समझ नहीं पाती 
इतिहास का सच ,
मान लेती है उसे सही 
दिखता है  सामने जो बस  ।
तो फिर क्यों भला 
उखाड़े जाएँ मुर्दे 
जो गड़े हुए हैं 
हम ज़िंदा भी तो 
मुर्दों जैसे पड़े हुए हैं ।




Read more...

किरचें मन की

>> Saturday, 6 March 2021

 


अचानक से 
छन्न से गिरा था
ग्लास काँच का ,
दूर दूर तक 
फैल गयीं थीं 
किरचें फर्श पर 
बड़े बड़े टुकड़े 
सहेज लिए थे
जल्दी से मैंने ,
कोशिश तो थी 
कि समेट लूँ  
सारी किरचें 
एक बार में ही ,
लेकिन जब तब 
दिख ही जाती हैं 
फर्श पर पड़ी हुई ,
बिल्कुल मेरी तरह ,
मैं भी तो यूँ ही 
बिखरी थी टूट कर ।





Read more...

ऐ ज़िन्दगी बता !

>> Wednesday, 3 March 2021

 



दरक गया है 

इस कदर दिल 
कि ऐ ज़िन्दगी 
बता कैसे मैं 
तेरा  ऐतबार करूँ ? 
अपनी ही सोचों में 
गुम है मन मेरा 
तो भला बता कि
मैं कैसे तुझसे 
प्यार करूँ ? 

Read more...

और - बसन्त मुरझा गया

>> Friday, 26 February 2021



सर ए राह 

मुड़ गए थे कदम 
पुराने गलियारों में 
अचानक ही 
मिल गयीं थीं 
पुरानी उदासियाँ 
पूछा उन्होंने 
कैसी हो ? क्या हाल है ? 
मुस्कुरा कर 
कहा मैंने 
मस्तम - मस्त 
बसन्त छाया है ।
सुनते ही इतना 
जमा लिया कब्ज़ा 
उन्होंने मेरे ऊपर 
और -
बसन्त मुरझा गया । 





Read more...

मन पलाश

>> Saturday, 20 February 2021

 


बदला तो नहीं
कुछ भी ऐसा 
फिर - 
क्यों हो रहा 
भला ये बसन्त ? 
बस मैंने
भरे घट से 
उलीच दिए थे
दो अंजुर भर 
कसैले शब्द ,
और मन 
पलाश  हो गया ।




Read more...

बासंती मन

>> Wednesday, 10 February 2021



बड़े जतन से 
छिपा रखी थी 
एक पोटली 
मन के किसी कोने में 
खोल दी आज 
गिरह लबों की 
खुलते ही गाँठ 
सारे शिकवे -  शिकायतें 
चाहे -  अनचाहे 
ख्वाब और ख्वाहिशें 
बिखर गए सामने ।
उठा कर नज़र से
एक एक को
समेट ही तो लिया 
तुमने बड़े करीने से ,
बस - 
मन  बासन्ती हो गया   ।

संगीता स्वरुप 
10 - 02- 21

 

Read more...

भ्रष्ट आचार

>> Friday, 25 October 2013




स्वतंत्र भारत की नीव में
उस समय के नेताओं ने 
अपनी महत्त्वाकांक्षाओं  के 
रख दिये थे भ्रष्ट  आचार 
फिर  देश से कैसे 
खत्म हो  भ्रष्टाचार ? 


Read more...

आहार बनाम हार

>> Thursday, 18 July 2013


आहार नाम 
हार गया जीवन 
कैसी है नीति ? 


बालक शव 
ममता का चीत्कार
है राजनीति ।


कैसी है शिक्षा 
नहीं लौटेगा लाल 
मारा तृष्णा ने । 


मौन हैं नेता 
विपक्ष पर वार 
स्वयं हैं पाक । 


शर्मिंदगी से 
सिर झुकाये सभी 
आंखे सजल ।

Read more...

प्रकोप शिव का ....

>> Sunday, 23 June 2013


त्रिनेत्रधारी 
त्रिनेत्र  बंद करो 
राहत मिले 


नाथों के नाथ 
क्यों प्रलय मचाई 
मूक बन के ।
 

त्राहि त्राहि है 
हैरान परेशान 
हैं तीर्थ यात्री

Uttarakhand: pilgrims trekking to safety being looted en route

आपदा में भी 
सक्रिय हैं लुटेरे 
जन हैरान । 

Uttarakhand: 'Will we be evacuated after we die?' ask those stranded

खामोश नेता 
रोटियाँ सेंकते हैं 
ढेर लाशों के । 


वीर जवान 
लगा दें सारी जान 
उन्हें नमन 

Uttarakhand: 550 people dead, 14,000 still missing

हवाई दौरा 
कर्तव्य की इतिश्री 
नेता अभ्यस्त  । 


भगवान ने 
दिखा दिया भक्तों को 
अपना दर्द ।

kedarnath-21.wmv_000020534.jpg

भोले भण्डारी 
किया तांडव नृत्य 
तबाही मची । 


मानव बुद्धि 
अब तो  कर  शुद्धि 
विचार कर । 

Read more...

सुदृढ़ बाहें ...... ( पितृदिवस पर कुछ हाइकु )

>> Sunday, 16 June 2013


विशाल वृक्ष 
जैसे देता है छाया 
पिता ही तो हैं । 





पिता की गोदी 
आश्रय संबल का 
डर भला क्यों ? 
Father and Daughter Climbing Stairs    Stock Photo - Premium Rights-Managed, Artist: Peter Griffith, Code: 700-00549953

पिता का डर 
रखे    अनुशासित 
चढ़े सोपान । 

सुदृढ़ बाहें 
आशवस्त है  मन 
पिता  तो हैं ही । 

पिता का साया 
हर बच्चे को मिले 
यही है दुआ । 

पिता का हाथ 
विशाल बरगद 
सुकून मिले । 

Read more...

तल्ख स्मृतियाँ ( हाइकु )

>> Tuesday, 14 May 2013



कड़वी यादें 
  चीर देती हैं  सीना 
     मैं हुयी मौन  ।

************

पीड़ित यादें 
  झटक ही तो दीं थीं
    पीले पत्ते सी । 

******************

विष से बुझा 
  याद है  व्यंग्य  बाण
     मरा मेरा   'मैं' ।

*****************

तल्ख स्मृतियाँ 
   जेहन में घूमतीं 
      चैन न आए । 

*****************

खुद से जंग 
  जंगरहित यादें 
     निज़ात नहीं .... 

***************


Read more...
रफ़्तार

About This Blog

Labels

Lorem Ipsum

ब्लॉग प्रहरी

ब्लॉग परिवार

Blog parivaar

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

लालित्य

  © Free Blogger Templates Wild Birds by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP