बरगद !!!!
>> Saturday, 8 May 2021
ज़िन्दगी की धूप में
छाँव की तलाश में
और
बरगद
अपनी बाहें फैलाये
रह जाता है
एक जगह
ठिठका सा .
खलिश होती है तो यूँ ही बयां होती है , हर शेर जैसे सीप से निकला हुआ मोती है
ज़िन्दगी की धूप में
इश्क़ तो
खुद है रंगरेज़
रंग देता
मन को
जैसे हो केसर ,
रे मन !
कभी तो
इस रंग के
समंदर में उतर ।
ख्वाहिश थी मेरी कि
दरक गया है
सर ए राह
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