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ख़ामोशी

>> Sunday, 13 December 2009

खामोश रह कर भी तुझसे बात करते हैं

आवाज़ नहीं आती पर लब हिलते हैं

ज़रा ध्यान से सुन कान लगा कर ज़रा

चुप रह कर भी हम बहुत कुछ कहते हैं.

5 comments:

मनोज कुमार Mon Dec 14, 07:33:00 am  

बहुत अच्छा। बधाई स्वीकारें।

Anamika Mon Dec 14, 12:28:00 pm  

aati hi awaz me sab sun leti hu
dil ki aahat dil me gun leti hu
janti hu teri chuppi me dhero bate hai
har pal me bhi to tujhse hi mukhatib rehti hu.

lovelyyyyyyyyyy lines.
thanks for sharing.

निर्मला कपिला Mon Dec 14, 04:50:00 pm  

बात ही असली वो है जो कोइ चुप रह कर कहे और दूसरा समझ जाये । बहुत अच्छी रचना बधाई

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