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भ्रष्ट आचार

>> Friday, 25 October 2013




स्वतंत्र भारत की नीव में
उस समय के नेताओं ने 
अपनी महत्त्वाकांक्षाओं  के 
रख दिये थे भ्रष्ट  आचार 
फिर  देश से कैसे 
खत्म हो  भ्रष्टाचार ? 


52 comments:

सूबेदार Fri Oct 25, 08:32:00 am  

बहुत सुंदर ढंग से ब्यक्त किया अपने विचार ------! जितनी प्रसंशा की जय कम है-----।
धन्यबाद

अजित गुप्ता का कोना Fri Oct 25, 08:42:00 am  

हमारा पहला कदम ही निश्चित करता है कि हमारा मार्ग किधर जाएगा। अच्‍छी रचना।

संध्या शर्मा Fri Oct 25, 10:48:00 am  

सही है भ्रष्टाचार की नींव पर ईमारत भी उसी की बनेगी … सटीक

Dr.NISHA MAHARANA Fri Oct 25, 10:49:00 am  

isi mahatkansha ne sab gadbad kar diya .....aajadi hasil ho gai par ...ramrajya ka sapna adhura rah gaya .....

अशोक सलूजा Fri Oct 25, 11:14:00 am  

विरासत में मिला भ्रष्टाचार .....

shikha varshney Fri Oct 25, 06:28:00 pm  

सही बात है ...तभी तो हो गई राजनीति मसालेदार :)

डॉ. मोनिका शर्मा Fri Oct 25, 06:41:00 pm  

कम शब्दों में सटीक बात...... बहुत बढ़िया

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया Fri Oct 25, 06:45:00 pm  

विरासत को सुधारना हमारा कर्तव्य है ....
बहुत उम्दा सटीक अभिव्यक्ति ,,,!

RECENT POST -: हमने कितना प्यार किया था.

रश्मि प्रभा... Fri Oct 25, 07:36:00 pm  

अब जो रखा है उसे ढोना है या धोना है

ANULATA RAJ NAIR Fri Oct 25, 08:10:00 pm  

सही कहा दी......
भुगत रहे हैं सब अब तक...

सादर
अनु

शिवनाथ कुमार Fri Oct 25, 08:11:00 pm  

महत्वाकांक्षा और भ्रष्टाचार का गठबंधन बहुत पुराना है ,,,,
सादर!

Manju Mishra Fri Oct 25, 09:08:00 pm  

एकदम सही कहा संगीता जी……. जब नींव में ही खोट हो तो इमारत तो कमजोर होगी ही ……

Manju Mishra

Sadhana Vaid Fri Oct 25, 10:14:00 pm  

बोया पेड़ बबूल का
आम कहाँ से होय !

गागर में सागर भर बहुत गहन बात कह दी संगीता जी ! जो कहा वह सौ फीसदी सच है ! बहुत खूब !

Dr ajay yadav Fri Oct 25, 11:35:00 pm  

बहुत ही सुंदर रचना

वाणी गीत Sat Oct 26, 07:33:00 am  

बढ़िया अचार हुआ आचार का :)

Amrita Tanmay Sat Oct 26, 09:57:00 am  

हाँ! अब एक और स्वतंत्रता की लड़ाई होनी चाहिए अपने इन माननीय नेताओं के विरुद्ध ..तब शायद..

vandan gupta Sat Oct 26, 12:15:00 pm  

kam shabdon me bahut gahri bat kah di

दिगंबर नासवा Sat Oct 26, 04:14:00 pm  

कुछ ही पंक्तियाँ पर कितना स्पष्ट, सामयिक ओर सटीक ... सच है की अगर सन ४७ में देश को सही दिशा दी गई होती तो आज हालात कुछ ओर होए ...

ताऊ रामपुरिया Mon Oct 28, 11:52:00 am  

जो फ़सल बोयी थी वही कट रही है.

रामराम.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने Mon Oct 28, 05:00:00 pm  

Neenv ka patthar hi galat lag gaya to imaarat to aisi honi hi thi...
Bhut khoob!!

Kailash Sharma Wed Oct 30, 07:39:00 pm  

बहुत सटीक अभिव्यक्ति...

virendra sharma Thu Oct 31, 01:16:00 am  

बहुत खूब सौ सुनार की एक लुहार की क्या मारा है सेकुलर तंत्र को निचोड़के कोड़ा मेडम जी ने। बधाई !

स्वतंत्र भारत की नीव में
उस समय के नेताओं ने
अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के
रख दिये थे भ्रष्ट आचार
फिर देश से कैसे
खत्म हो भ्रष्टाचार ?

दिगंबर नासवा Sun Nov 03, 01:22:00 pm  

दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

virendra sharma Wed Nov 06, 07:42:00 pm  

कुछ नया लिखो कुछ नया करो। प्रतीक्षित आपकी रचनाएं हैं।

Pallavi saxena Wed Nov 27, 12:31:00 am  

सच तो यही है...सटीक।

virendra sharma Fri Dec 13, 05:10:00 pm  

बहुत खूब कहा है।

Unknown Sun Dec 15, 04:46:00 pm  

कम शब्द ...गहरे भाव

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार Thu Dec 19, 12:10:00 am  



☆★☆★☆


स्वतंत्र भारत की नीव में
उस समय के नेताओं ने
अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के
रख दिये थे भ्रष्ट आचार
फिर देश से कैसे
खत्म हो भ्रष्टाचार ?

बहुत सही कहा आपने...
आदरणीया संगीता जी !

...और उसके बाद भी निरंतर अवसरवादियों के कुशासन ने राष्ट्र के हित में नकारात्मक ही किया...
बहुत कुछ है इस लघुकविता में...

आभार !
मंगलकामनाओं सहित...
-राजेन्द्र स्वर्णकार

ब्लॉग बुलेटिन Thu Jan 02, 10:30:00 am  

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन: कोई दूर से आवाज़ दे चले आओ मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

vandan gupta Thu Jan 02, 10:47:00 am  

एक कटु सत्य को उजागर कर दिया

मुकेश कुमार सिन्हा Sat Jan 04, 05:58:00 pm  

ये आचार अब कभी न बदले :)

डॉ. जेन्नी शबनम Sat Jan 04, 06:34:00 pm  

सच है महत्वकांक्षाओं के कारण नींव ही कमजोर पड़ी तो अब... बहुत बढ़िया.

Unknown Mon Jan 06, 08:50:00 pm  

बहुत बढ़िया..

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी Mon Jan 06, 10:30:00 pm  

बहुत बढ़िया प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो

Rachana Sat Apr 19, 03:09:00 am  

bahut sahi kaha aapne
rachana

Rs Diwraya Wed Oct 01, 02:27:00 pm  

आपकी बात मेँ दम हैँ।
आपना ब्लॉग , सफर आपका ब्लॉग ऍग्रीगेटर पर लगाकर अधिक लौगो ता पँहुचाऐ

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बहुत खूब। अच्‍छी रचना।

Subhash Thu Dec 03, 09:45:00 am  

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नींव मजबूत नहीं तो ढहना है उसे एक दिन ..
जैसा बोया वैसे ही अनाज ..

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Hindikunj Wed Aug 08, 06:07:00 pm  

बहुत सुन्दर लिखा है .
धन्यवाद

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