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अजनबी ...

>> Tuesday, 9 August 2011




तल्ख़ जुबां 
करती है असर 
जब होता है 
अपनापन 
कहीं न कहीं 
जब हो गए 
अजनबी 
तो सच ही 
तल्खी जाती रही ..

83 comments:

वन्दना Tue Aug 09, 03:13:00 pm  

वाह क्या खूब कहा है…………अपनेपन मे तो इंसान कुछ भी सह जाता है फिर चाहे कोई गर्दन भी उतार ले मगर जहां अपनापन खत्म हो जाता है वहाँ कुछ नही बचता सिवाय अजनबियत के…………चंद शब्दो मे गहरी बात कह दी।

इमरान अंसारी Tue Aug 09, 03:49:00 pm  
This comment has been removed by the author.
इमरान अंसारी Tue Aug 09, 03:49:00 pm  

बहुत खुबसूरत सच है दुःख तो अपनों से ही मिलता है......अजनबी क्या दे सकता है|

रंजना [रंजू भाटिया] Tue Aug 09, 04:07:00 pm  

बहुत सही लिखा आपने .....बेहतरीन

Sadhana Vaid Tue Aug 09, 04:29:00 pm  

अपनों की कही बात की तल्खी ही चोट भी पहुँचाती है और उसकी कड़वाहट कुनैन की तरह इलाज भी करती है ! अजनबियों की बात तो बेअसर होती है चाहे चाशनी में पगी हो या ज़हर में डूबी क्योंकि उसके साथ हित अहित की सच्ची चिंता नहीं जुडी होती ! सुन्दर क्षणिका !

सदा Tue Aug 09, 04:30:00 pm  

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ..।

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, Tue Aug 09, 04:50:00 pm  

चंद शब्द तीर की भांति भेद गए ह्रदय को
अजनबी और अपनेपन का क्या चित्रण किया है आपने वाह

कई जिस्म और एक आह!!!

प्रतिभा सक्सेना Tue Aug 09, 05:16:00 pm  

कितने कम शब्दों में किस खूबसूरती से सब कुछ कह गईं आप !

डॉ टी एस दराल Tue Aug 09, 05:29:00 pm  

तल्ख़ का मतलब बताएं तो समझ आए । खामख्वाह वाह वाह कैसे करें जी ।

मनोज कुमार Tue Aug 09, 05:57:00 pm  

आदमी और कुछ नहीं दे सकता कम से कम बोली तो अच्छी और मीठी दे।

Rajesh Kumari Tue Aug 09, 06:06:00 pm  

bahut sunder alfaaj.very nice.

रेखा श्रीवास्तव Tue Aug 09, 06:13:00 pm  

bat bahut sahi hi kahi hai kyonki apanepan ka adhikar alag hota hai aur usamen sab chalta hai. ajnabi bankar jo dooriyan hoti hain ve alag dikhai deti hain.

संगीता स्वरुप ( गीत ) Tue Aug 09, 07:17:00 pm  

सभी पाठकों का आभार ..

डॉक्टर दराल साहब ,

तल्ख़ का मतलब है कडुवा .. कडवी जुबां

चला बिहारी ब्लॉगर बनने Tue Aug 09, 07:18:00 pm  

बिलकुल सही कहा संगीता दी!
दिल पे लगने वाले ज़्यादातर ज़ख्म अपनों के दिए होते हैं और तल्ख़ भी अपनों की ही जुबां लगती है!! गैरों से मोहब्बत भी नहीं और तल्खी भी नहीं!!

Udan Tashtari Tue Aug 09, 07:43:00 pm  

सच कहा...बहुत खूब!

Bhola-Krishna Tue Aug 09, 08:13:00 pm  

संगीता जी,
तल्ख जुबा से बने अपने भी अजनबी
होती न जुबां तल्ख तो अपने सभी होते
भोला-कृष्णा

ashish Tue Aug 09, 08:42:00 pm  

तल्खी में भी अपनापन देख लिया . गैरों की तल्खी से क्या वास्ता . बहूत खूब .

mridula pradhan Tue Aug 09, 08:58:00 pm  

जब हो गए
अजनबी
तो सच ही
तल्खी जाती रही ......
ek kadvi sachchyee to yahi hai.....theek kahtin hain.

Vaanbhatt Tue Aug 09, 09:04:00 pm  

कोई शिकवा भी नहीं...कोई शिकायत भी नहीं...अब तुम्हें पहले सी मोहब्बत भी नहीं...

डॉ॰ मोनिका शर्मा Tue Aug 09, 09:36:00 pm  

जब हो गए
अजनबी
तो सच ही
तल्खी जाती रही .

बहुत बढ़िया..... कम शब्द पर गहरी बात

nilesh mathur Tue Aug 09, 09:46:00 pm  

बहुत कम शब्दों मे बड़ी बात, बेहतरीन।

रचना दीक्षित Tue Aug 09, 09:49:00 pm  

अक्सर यह भी नही हो पता. हमेशा ऐसा ही हो, तो अच्छा हो.

ताऊ रामपुरिया Tue Aug 09, 09:49:00 pm  

बिल्कुल सतसैया के दोहे जैसी सटीक बात. बहुत लाजवाब, शुभकामनाएं.

रामराम.

Anju Tue Aug 09, 11:25:00 pm  

बहुत सुंदर ,तल्खी जुबां की हो या अपनेपन की ,आहत तो मन ही होता है ....
बात " चटख धूप "की हो या "हरसिंगार" की
"केसरिया चावल" मन की हांडी में पकाने की चाहत हो या
"चवनियाँ ख्यालों की" के खोने की ..
बस एक ही तो वजह है इन सबके पीछे .....मन ......अपनापन......लगाव ...
कविता छोटी कहने को है, पर प्रभाव छोटे कदापि नहीं ..
अच्छा लगता है ऐसी रचनाओ को पढना

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) Tue Aug 09, 11:45:00 pm  

अपनेपन की सटीक परिभाषा ,बधाई.

ज्योति सिंह Wed Aug 10, 01:16:00 am  

bahut badhiya ,aapka intjaar hai blog par ,kai din ho gaye

वाणी गीत Wed Aug 10, 05:05:00 am  

तल्ख़ जबान सिर्फ अपनों की ही चोट पहुंचती है , जब अजनबी हो गए तो फिर क्या तल्खी ...
शानदार !

प्रवीण पाण्डेय Wed Aug 10, 09:57:00 am  

अद्भुत भावाभिव्यक्ति।

Bhushan Wed Aug 10, 11:00:00 am  

सच है, तल्खी अपनेपन से भी उपजती है. जहाँ अपनापन नहीं वहाँ क्रोध भी तो नहीं ही आता.
सुंदर रचना.

संजय भास्कर Wed Aug 10, 11:16:00 am  

बेहद खूबसूरत कविता.....और भावपूर्ण भी !

Maheshwari kaneri Wed Aug 10, 02:45:00 pm  

कम शब्दों मे गहन भाव ..सुन्दर ....

POOJA... Wed Aug 10, 03:04:00 pm  

yahi fark hai apne aur begaane ka...
aap itane kam shabdon mei itne bhaav samet leti hai ki tareef ke liye bahut saare shabd bhi kam lagne lagte hain...

Dr (Miss) Sharad Singh Wed Aug 10, 03:14:00 pm  

तल्खी पर खूबसूरत बयान...
बहुत ही मर्मस्पर्शी...

mahendra srivastava Wed Aug 10, 03:29:00 pm  

बहुत ही सुंदर
जब हो गए अजनवी, तो सच ही तल्खी जाती रही।

क्या कहने

S.N SHUKLA Wed Aug 10, 04:46:00 pm  

बहुत सुन्दर रचना , बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

संध्या शर्मा Wed Aug 10, 06:29:00 pm  

जब हो गए
अजनबी
तो सच ही
तल्खी जाती रही ..
सही लिखा आपने .....

sheetal Wed Aug 10, 07:43:00 pm  

Didi
namaste kaisi hain aap?
ye baat aapne sahi kahi ki apno ki boli hui baat dil main teer ki tarah chubhti hain, aur yahi baat koi bahar wala kahe to koi farakh nahi padta hain.
is jeevan ki haqiqat ko khubsurat aur saral sabdho main aapne baya kiya hain.
didi kya aap mujhe kabhi khat likhna chahengi to main apna email id de rahi hun.
sheetal.maheshwari1@gmail.com.
intezaar rahega aapke khat ka.

Surendra shukla" Bhramar"5 Wed Aug 10, 09:48:00 pm  

संगीता जी अभिवादन सच कहा प्यार रहे मन से तो थोडा सा रूठना थोडा सा तेवर थोडा सा गिला बहुत बड़ा हो जाता है और अपनापन गया तो ...
सुन्दर
भ्रमर ५

Dr Varsha Singh Wed Aug 10, 10:04:00 pm  

आपकी इस कविता में तल्खी भी मिठास है....

minoo bhagia Thu Aug 11, 08:14:00 am  

sahi baat hai sangeeta ji ,

कविता रावत Thu Aug 11, 01:40:00 pm  

तल्ख़ जुबां ka asar badi mushkil se jaata hai..
Lagu rachna ke madhyam se badiya prastuti..

lokendra singh rajput Thu Aug 11, 11:45:00 pm  

बात तो सही है...

Babli Fri Aug 12, 10:23:00 am  

गहरे भाव के साथ कम शब्दों में बहुत सुन्दरता से आपने लिखा है ! शानदार प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

मेरे भाव Fri Aug 12, 04:31:00 pm  

कम शब्द, गहरे भाव... आपकी पहचान बन गई है..

S.N SHUKLA Sat Aug 13, 07:08:00 am  

Respected sister Sangita ji
रक्षाबंधन एवं स्वाधीनता दिवस के पावन पर्वों की हार्दिक मंगल कामनाएं.

DR. ANWER JAMAL Sat Aug 13, 01:15:00 pm  

Nice .

हमारी शांति, हमारा विकास और हमारी सुरक्षा आपस में एक दूसरे पर शक करने में नहीं है बल्कि एक दूसरे पर विश्वास करने में है।
राखी का त्यौहार भाई के प्रति बहन के इसी विश्वास को दर्शाता है।
भाई को भी अपनी बहन पर विश्वास होता है कि वह भी अपने भाई के विश्वास को भंग करने वाला कोई काम नहीं करेगी।
यह विश्वास ही हमारी पूंजी है।
यही विश्वास इंसान को इंसान से और इंसान को ख़ुदा से, ईश्वर से जोड़ता है।
जो तोड़ता है वह शैतान है। यही उसकी पहचान है। त्यौहारों के रूप को विकृत करना भी इसी का काम है। शैतान दिमाग़ लोग त्यौहारों को आडंबर में इसीलिए बदल देते हैं ताकि सभी लोग आपस में ढंग से जुड़ न पाएं क्योंकि जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उसी दिन ज़मीन से शैतानियत का राज ख़त्म हो जाएगा।
इसी शैतान से बहनों को ख़तरा होता है और ये राक्षस और शैतान अपने विचार और कर्म से होते हैं लेकिन शक्ल-सूरत से इंसान ही होते हैं।
राखी का त्यौहार हमें याद दिलाता है कि हमारे दरम्यान ऐसे शैतान भी मौजूद हैं जिनसे हमारी बहनों की मर्यादा को ख़तरा है।
बहनों के लिए एक सुरक्षित समाज का निर्माण ही हम सब भाईयों की असल ज़िम्मेदारी है, हम सभी भाईयों की, हम चाहे किसी भी वर्ग से क्यों न हों ?
हुमायूं और रानी कर्मावती का क़िस्सा हमें यही याद दिलाता है।

रक्षाबंधन के पर्व पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं...

देखिये
हुमायूं और रानी कर्मावती का क़िस्सा और राखी का मर्म

ZEAL Sat Aug 13, 01:51:00 pm  

How beautifully you have defined The bitterness in tone.

Surendra shukla" Bhramar"5 Sat Aug 13, 10:42:00 pm  

आदरणीया संगीता जी आप सब को ढेर सारी शुभकामनाएं इस पावन पर्व रक्षाबंधन पर -
आभार प्रोत्साहन हेतु
भ्रमर५

Kunwar Kusumesh Mon Aug 15, 09:43:00 am  

सुन्दर भावाभिव्यक्ति .
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

वन्दना अवस्थी दुबे Mon Aug 15, 10:48:00 pm  

क्षणिकाओं में महारथ हासिल है आपको संगीता जी. बहुत सुन्दर.
आज़ादी की सालगिरह मुबारक़ हो.

मेरा साहित्य Wed Aug 17, 10:08:00 pm  

gahre bhav dukh to apno se hi milta hai
rachana

Dr.Sushila Gupta Wed Aug 17, 11:55:00 pm  

तल्ख़ जुबां
करती है असर
जब होता है
अपनापन
कहीं न कहीं
जब हो गए
अजनबी
तो सच ही
तल्खी जाती रही ..
dil ko choo lene wali rachana......aapka abhar.

Dr.Sushila Gupta Wed Aug 17, 11:55:00 pm  

तल्ख़ जुबां
करती है असर
जब होता है
अपनापन
कहीं न कहीं
जब हो गए
अजनबी
तो सच ही
तल्खी जाती रही ..
dil ko choo lene wali rachana......aapka abhar.

दिगम्बर नासवा Thu Aug 18, 04:26:00 pm  

अपने पण में सब कुछ जायज है ... दूरी मिट जाती है

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" Fri Aug 19, 12:23:00 pm  

सच कहा...बहुत खूब! सुन्दर क्षणिका !

हरकीरत ' हीर' Sat Aug 20, 12:20:00 pm  

सच है कड़वी बातें अपनों से ही कही जातीं हैं .....

Minakshi Pant Sat Aug 20, 08:35:00 pm  

बहुत खूब कहा दी आपने |

सतीश सक्सेना Sat Aug 20, 09:18:00 pm  

बहुत खूब!
हार्दिक शुभकामनायें आपके लिए !

मेरा शौक Sun Aug 21, 07:24:00 pm  

बहुत सुंदर रचना

मेरा शौक
http://www.vpsrajput.in

वन्दना अवस्थी दुबे Tue Aug 23, 05:28:00 pm  

क्या बात है. सच भी है ये. ऐसा ही होता है.

virendra Thu Aug 25, 06:33:00 pm  

तल्ख़ जुबां
करती है असर
जब होता है
अपनापन
swar ki talkhee asahniya hoti hai jab ho apnaapan ,
satya ! aparichit man kee talkhee kaa na kabhi kartaa maapan .
hraday tantra ko jhankrit karti vichaaraniya bhaavaabhivyakti .

virendra Fri Aug 26, 03:02:00 pm  

vandniy Sangita ji
vrindaavan men virendra aapka vandan karta hai.

Ankit pandey Fri Aug 26, 09:39:00 pm  

यही सच है, अच्छी प्रस्तुति.....

Bhushan Sat Aug 27, 10:36:00 pm  

जन लोकपाल के पहले चरण की सफलता पर बधाई.

vidya Tue Aug 30, 08:22:00 pm  

bahut khoobsurat abhivyakti....i'm happy to follow your blog.

NISHA MAHARANA Wed Aug 31, 08:34:00 pm  

अजनबी बनकर फिर से
नयी शुरूआत भी कर सकते हैं
मेरी कविता पुनः में इसे पढें
बहुत अच्छा भाव संप्रेषण है।

ZEAL Fri Sep 02, 12:17:00 pm  

जब हो गए
अजनबी
तो सच ही
तल्खी जाती रही ..

So true !. Beautifully defined Sangeeta ji.

.

shikha varshney Thu Sep 15, 09:25:00 pm  

शब्दों का जाल बनाना खूब जानती हैं आप.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" Thu Oct 06, 09:22:00 pm  

sirf aaj tak is hakikat ko mahsoos kiya tha ..aapke shabdon ne ise juwan de di..sadar pranam ke sath

Reena Maurya Tue Nov 08, 10:20:00 pm  

wahh...
apki choti si kavita me kitani gahraiya chupi hai
bahut hi sundar likhati hai aap

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