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चटख धूप

>> Tuesday, 2 August 2011




यादों की चादर में 
समेट लायी हूँ 
खुशियों की 
चटख धूप 
गम के 
बादलों की ओट से 
उग आया है 
एक सतरंगी 


75 comments:

सुनीता शानू Tue Aug 02, 11:39:00 am  

छोटी सी खूबसूरत नज़्म। बधाई आपको। कैसी हैं आप?

Rajesh Kumari Tue Aug 02, 11:42:00 am  

bahut pyaari najm.may god keep showing this rainbow forever.

sheetal Tue Aug 02, 11:50:00 am  

sach main khushiyon ki kunkunidhup jab padti hain.man nai urja se bhar
jaata hain,aur jeevan satrangi ho jaata hain.

Didi hum to yahi chahte hain ye khushiyon ki narm dhup sada aapke
jeevan main rahe aur aapke hoton par sada muskaan thirakti rahe.
didi kya aap mujhse dosti karengi.
karke dekhiye main aapko bore nahi
karungi...aage aapki marzi.:)

PRIYANKA RATHORE Tue Aug 02, 11:57:00 am  

bahut khoob sangeeta ji...aabhar

संजय भास्कर Tue Aug 02, 12:02:00 pm  

एक-एक शब्द भावपूर्ण ...
संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता.

सागर Tue Aug 02, 12:26:00 pm  

jitne hi kam shabd utni hi gahraayi....

सदा Tue Aug 02, 12:30:00 pm  

बहुत खूब ।

इमरान अंसारी Tue Aug 02, 12:37:00 pm  

सुन्दर अहसास........इन्द्रधनुष का नाम लेते हुए सिर्फ इशारा भर......

mridula pradhan Tue Aug 02, 12:50:00 pm  

bahut pyari hai ye satrangi......

वर्ज्य नारी स्वर Tue Aug 02, 01:08:00 pm  

Bikhare moti ko samet liya hai ...aur hame bhent kiya hai...jee shukriya

संध्या शर्मा Tue Aug 02, 01:15:00 pm  

खुशियों की धूप सी चटख बहुत सुन्दर रचना...आभार

mahendra srivastava Tue Aug 02, 01:25:00 pm  

छोटे छोटे शब्दों को आपने जिस तरह पिरो कर माला बनाई है। वाकई तारीफ के काबिल है।
बहुत अच्छी रचना

रंजना [रंजू भाटिया] Tue Aug 02, 01:26:00 pm  

बहुत खूब ..बहुत सुन्दर

ashish Tue Aug 02, 01:36:00 pm  

इन्द्रधनुषी आकाश मुबारक हो . मन प्रफुल्ल हुआ .

Sadhana Vaid Tue Aug 02, 01:59:00 pm  

यह सतरंगी इन्द्रधनुष मन के कोने कोने को आल्हादित कर जाता है संगीता जी ! इसकी उपलब्धि के लिये हार्दिक बधाई !

Dr.Nidhi Tandon Tue Aug 02, 02:16:00 pm  

ये धनक....अपनी मुस्कान के साथ...यूँ ही सारे ग़मों को पार करके ....खुशियों की धुप को साथ लाये ..............सुन्दर रचना

अरुण चन्द्र रॉय Tue Aug 02, 03:09:00 pm  

चादर में धूप को समेट लाना अच्छा प्रयोग है .. बढ़िया कविता..

वाणी गीत Tue Aug 02, 03:14:00 pm  

ग़म के बादलों की ओट से सुन्दर इन्द्रधनुष ...
खूबसूरत !

अनुपमा पाठक Tue Aug 02, 03:27:00 pm  

सतरंगी इन्द्रधनुष सदा खिला रहे!

Er. सत्यम शिवम Tue Aug 02, 05:26:00 pm  

बहुत ही खुबसूरत....।

वन्दना Tue Aug 02, 05:27:00 pm  

गागर मे सागर भरने की कला मे आप माहिर हैं…………बहुत सुन्दर नज़्म्।

मनोज कुमार Tue Aug 02, 06:03:00 pm  

हर बाद्ल के पीछे सतरंगी सूरज छुपा होता है, देर-सवेर वह बाहर आता ही है।

Amrita Tanmay Tue Aug 02, 06:24:00 pm  

वाह ! बहुत ही सुन्दर लिखा है आप ने .अर्थपूर्ण..

डॉ टी एस दराल Tue Aug 02, 07:01:00 pm  

बहुत सुन्दर । आशावादी रचना ।

sushma 'आहुति' Tue Aug 02, 07:04:00 pm  

बहुत कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया....

kumar Tue Aug 02, 07:23:00 pm  

भावनाओं से सजी हुई रचना....

स्वप्निल कुमार 'आतिश' Tue Aug 02, 08:11:00 pm  

उम्मीद बांधती ख़ूबसूरत क्षणिका है मम्मा

अनामिका की सदायें ...... Tue Aug 02, 08:20:00 pm  

satrangi ke rango k bare me thoda aur bata deti to kya chala jata apka ?
:):)

sunder kshanika.

S.N SHUKLA Tue Aug 02, 09:12:00 pm  

गम के
बादलों की ओट से
उग आया है
एक सतरंगी

संगीता जी
चाँद शब्दों में बहुत कुछ,कह दिया , यह विधा सबको कहाँ आती है ,
बहुत सुन्दर पोस्ट और उतनी ही सुन्दर प्रस्तुति भी , आभार

प्रतिभा सक्सेना Tue Aug 02, 09:19:00 pm  

ये इन्द्रधनुषी रंग आपके रचना-संसार को सजाते रहें !

प्रवीण पाण्डेय Tue Aug 02, 10:24:00 pm  

उल्लास ऐसे ही उगता रहे।

Roshi Tue Aug 02, 10:27:00 pm  

sunder nazam ,sunder bhav.............

Dr Varsha Singh Tue Aug 02, 11:12:00 pm  

बहुत खूबसूरत है यह सतरंगी .....और बहुत खूबसूरत है यह कविता संगीता जी, बिलकुल आपकी ही तरह ....
मेरी हार्दिक शुभकामनायें।

Dr (Miss) Sharad Singh Tue Aug 02, 11:14:00 pm  

जीवन्त विचारों की बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !हार्दिक बधाई।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने Tue Aug 02, 11:32:00 pm  

आठ लाइनों में सतरंगी छटा बिखेर दी आपने, संगीता दी!! यादें, गम, बादल और धूप.. कमाल के रंग भरे हैं आपने इस पेंटिंग में!!

Varun Tue Aug 02, 11:37:00 pm  

A nice poem to fill the heart with happiness!

Ojaswi Kaushal Wed Aug 03, 12:10:00 am  

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Taru Wed Aug 03, 12:38:00 am  

mumma, achhi hai kshanika..:)

डॉ॰ मोनिका शर्मा Wed Aug 03, 03:33:00 am  

सुंदर ..बहुत ही सुंदर

ताऊ रामपुरिया Wed Aug 03, 10:45:00 am  

अति सुंदर, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

Babli Wed Aug 03, 04:03:00 pm  

संगीता जी आपकी टिप्पणी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया! आपके कहने के अनुसार मैंने आखरी पंक्ति में "कैसे" के जगह "क्या" कर दिया है अब बेहतर लग रहा है! इसी तरह आप सुझाव देते रहिएगा!
छोटी सी प्यारी सी ख़ूबसूरत नज़्म ! बेहद सुन्दर और चित्र भी लाजवाब!

Vaanbhatt Wed Aug 03, 09:57:00 pm  

धुंध पर जब धूप की किरणें पड़तीं हैं...तो इन्द्रधनुषी छटा छा ही जाती है...

Surendra shukla" Bhramar"5 Thu Aug 04, 12:33:00 am  

आदरणीया संगीता जी -छोटी नज्मों की तो आप माहिर हैं एक एक शब्द इन्द्रधनुषी रंग बिखेर जाते हैं ..सुन्दर
भ्रमर ५

Dorothy Thu Aug 04, 07:55:00 am  

बेहद खूबसूरती से पिरोई दिल को छू जाने वाली रचना. आभार.
सादर,
डोरोथी.

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, Thu Aug 04, 06:08:00 pm  

waah kya baat hai......bahut acche se mausam ke sawaroop ko darshaya hai aapne....

Bhushan Thu Aug 04, 09:34:00 pm  

यह एक चमकदार कविता है.

Vaneet Nagpal Fri Aug 05, 08:40:00 am  

संगीता जी,
नमस्कार,
आपके इस ब्लॉग को भी "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगपोस्ट डाट काम"के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

Kunwar Kusumesh Fri Aug 05, 10:02:00 am  

गागर में सागर.

Babli Fri Aug 05, 12:05:00 pm  

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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सुमन'मीत' Sat Aug 06, 03:10:00 pm  

kam lafjon me behtreen prastuti...

Maheshwari kaneri Sat Aug 06, 05:48:00 pm  

कम शब्दों में गहरी बात....

POOJA... Sat Aug 06, 10:18:00 pm  

waah, waah aur bas waah...
itni chhoti-si rachna ur itne bhaaw... itni khoobsoorati...
padhte-padhte aakhir mei yunhi muh se nikal aaya... INDRADHANUSH...

S.N SHUKLA Sun Aug 07, 02:30:00 pm  

मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं,आपकी कलम निरंतर सार्थक सृजन में लगी रहे .
एस .एन. शुक्ल

ज्योति सिंह Mon Aug 08, 11:39:00 pm  

bahut hi achchhi rachna dhoop chhanv lekar .

गीता पंडित Tue Aug 09, 01:07:00 pm  

आपके ब्लॉग पर पहली बार आयी हूँ संगीता जी...बहुत अच्छा लग रहा है....

सुंदर रचनाएं
पढ़ने को मिलीं...

बधाई आपको...

Rachana Fri Aug 12, 07:36:00 pm  

bahut sunder sangeeta ji aap jitni achchhi kavita likhti hain utni hi achchhi insan bhi hain me aapse mili nahi hoon pr patanahi kyu aesa lagta hai sabke liye sochti hai aap
rachana

Dr.Bhawna Tue Aug 16, 09:15:00 am  

k\ya aabhivyakti hai javab nahi..

दिगम्बर नासवा Thu Aug 18, 04:31:00 pm  

कुछ शब्दों में गहरी बात ....

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri Thu Aug 25, 02:31:00 pm  

इन्द्रधनुषी रंगों से सजे मोतियों को पिरोती अत्यंत सुन्दर नज्म ....बिखरे मोती समेट कर
सुन्दर भाव पूर्ण कब्यांजलि पिरोने के लिए कोटि कोटि अभिनन्दन ....शुभकामनायें !!!

आशा जोगळेकर Tue Aug 30, 12:46:00 am  

बारिश के बाद धूप निकले तो इंद्र धनुष के सतरंग खिल उठते हैं ।

NISHA MAHARANA Wed Aug 31, 08:46:00 pm  

यादें ही तो सहारा है
जीने का सभी
साथ छोड दें
कभी हम यादों
को किसी के भूलाना
भी चाहें तो
वो ज्यादा ही याद
आते है बिल्कुल
सतरंगी बनकर
बहुत अच्छा लिखा है।

shikha varshney Thu Sep 15, 09:26:00 pm  

इस सतरंगी के रंग बिखरे रहें जीवन में .यही दुआ है.

Reena Maurya Tue Nov 08, 10:22:00 pm  

bahut sundar..
kam shabdo me sari bato ko kah deti hai aap

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