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मुखरित मौन ...

>> Saturday, 30 October 2010




भाषा हो 

मौन की ,

एहसास हों 

ज़िंदगी के 

व्यवहार में थोड़ी 

गहराई लाइए 

भावनाएं हो जाएँ 

न कहीं दूषित 

इसलिए मुझे 

शब्द नहीं चाहिए .





85 comments:

मनोज कुमार Sat Oct 30, 10:47:00 pm  

इस रचना की संवेदना और शिल्पगत सौंदर्य मन को भाव विह्वल कर गए हैं।

Amrita Tanmay Sat Oct 30, 10:58:00 pm  

सुन्दर , भावपूर्ण रचना ......... ह्रदय को छू रहा है . बधाई ...........

Shekhar Suman Sat Oct 30, 11:17:00 pm  

कभी कभी ख़ामोशी वो सब कुछ बयां कर जाती है जो बोलते लब नहीं कर पाते... बहुत ही ख़ूबसूरत रचना...
मेरे ब्लॉग पर इस बार चर्चा है जरूर आएँ..
लानत है ऐसे लोगों पर....

Sadhana Vaid Sat Oct 30, 11:27:00 pm  

बहुत बड़ी बात कह गयीं आप संगीता जी ! निश्चित रूप से अनर्गल प्रलाप से सार्थक मौन कहीं अधिक श्रेयस्कर है ! अति सुन्दर !

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' Sun Oct 31, 12:05:00 am  

हमेशा की तरह..उम्दा...बेहतरीन

Anjana (Gudia) Sun Oct 31, 12:31:00 am  

bahut sunder... jaise dil ki awaaz ho...

प्रतिभा सक्सेना Sun Oct 31, 05:37:00 am  

'भाषा हो
मौन की ,
एहसास हों
ज़िंदगी के '
- सही कहा है !

प्रतिभा सक्सेना Sun Oct 31, 05:38:00 am  

'भाषा हो
मौन की ,
एहसास हों
ज़िंदगी के '
- सही कहा है !

हास्यफुहार Sun Oct 31, 05:43:00 am  

मौन रख के भी बोलना चाहिए, और बोलकर फिर मौन हो जाना चाहिए।
अच्छी कविता।

M VERMA Sun Oct 31, 06:24:00 am  

भावनाएँ शब्दों से परे होती हैं. भावनाओं को शब्द मिलते ही उसमें चातुर्य और अतिरेक का समावेश हो जाता है .. इसलिये भावनाएँ शब्दों से परे रहें तो ही अच्छा,
सुन्दर भाव सम्प्रेषण.. सुन्दर रचना

M VERMA Sun Oct 31, 06:24:00 am  

भावनाएँ शब्दों से परे होती हैं. भावनाओं को शब्द मिलते ही उसमें चातुर्य और अतिरेक का समावेश हो जाता है .. इसलिये भावनाएँ शब्दों से परे रहें तो ही अच्छा,
सुन्दर भाव सम्प्रेषण.. सुन्दर रचना

ललित शर्मा Sun Oct 31, 07:47:00 am  

नि:शब्द होकर भी बात कही जा सकती है।

सुंदर कविता

आभार

संगीता पुरी Sun Oct 31, 07:49:00 am  

बहुत भावपूर्ण ..

रश्मि प्रभा... Sun Oct 31, 08:07:00 am  

yun lagta hai bhawnaaon aur shabdon ne aapke aangan me ghar bana liya hai

केवल राम Sun Oct 31, 09:55:00 am  

भावनाएं हो जाएँ

न कहीं दूषित

इसलिए मुझे

शब्द नहीं चाहिए
चंद शब्दों में पूरी सचाई कह डाली आपने , भावनाओं की कदर कितनी है ......, जिन्दगी में शब्द नहीं भावनाएं महव रखती है
सुंदर ...सार्थक

अनुपमा पाठक Sun Oct 31, 11:16:00 am  

भावनाएं हो जाएँ

न कहीं दूषित

इसलिए मुझे

शब्द नहीं चाहिए .
waah! sundar!!!

mukti Sun Oct 31, 12:39:00 pm  

अच्छी लगी मौन की भाषा.

राज भाटिय़ा Sun Oct 31, 01:04:00 pm  

बहुत अच्छी कविता धन्यवाद

वाणी गीत Sun Oct 31, 01:27:00 pm  

यही है मुखरित मौन ...शब्दहीन या निःशब्द !

सम्वेदना के स्वर Sun Oct 31, 01:44:00 pm  

संगीता दी..इसके पूर्व भी आपने मौन पर कविताएँ लिखी हैं और सभी अलग अलग भावों और अभिव्यक्ति से भरपूर... यहाँ भी आपने शब्दों के द्वारा भवनाओं के दूषित होने की बात कही है जो सर्वथा नूतन है... एक अच्छी रचना के लिए हमारी बधाई!!

वन्दना Sun Oct 31, 02:39:00 pm  

मौन मे छुपी वेदना का स्वर बेहद गंभीर है……………बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

दिगम्बर नासवा Sun Oct 31, 03:34:00 pm  

बहुत खूब ... शब्द मतलब बदल देते हैं भावनाओं के .... अच्छी रचना ....

डा. अरुणा कपूर. Sun Oct 31, 04:02:00 pm  

....अति सुंदर भावोक्ति!

भावनाएं हो जाएँ


न कहीं दूषित


इसलिए मुझे


शब्द नहीं चाहिए .

NK Pandey Sun Oct 31, 04:02:00 pm  

बहुत खूब! कम शब्दों मे बहुत गहरी बात लिखती हैं आप।

प्रवीण पाण्डेय Sun Oct 31, 04:24:00 pm  

शब्द कई बार भावों को धोखा दे जाते हैं।

ashish Sun Oct 31, 04:25:00 pm  

मौन अभिव्यक्ति को मूक सलाम , हम क्यू चर्चा करे सरे आम .

दीर्घतमा Sun Oct 31, 04:42:00 pm  

मौनता में ही सबकुछ छिपा है बहुत सुन्दर-----

दीर्घतमा Sun Oct 31, 04:42:00 pm  

मौनता में ही सबकुछ छिपा है बहुत सुन्दर-----

Udan Tashtari Sun Oct 31, 04:52:00 pm  

बहुत खूब मौन मुखरित हुआ...

डॉ टी एस दराल Sun Oct 31, 05:08:00 pm  

बहुत खूब । निशब्द भी बहुत कुछ कहा जा सकता है ।

mahendra verma Sun Oct 31, 05:35:00 pm  

बहुत ही अच्छी पंक्तियां...भावनाओं को व्यक्त करने में अक्सर शब्द पंगु हो जाते है, उसके बाद तो मौन का ही सहारा लेना पड़ता है।

ALOK KHARE Sun Oct 31, 06:04:00 pm  

sahi kaha , har abhivyakti ke liye , shabd ka hona anivarye nhi, manun rehkar bhi aap bahut kuch aur prabhavi dhang se apne aapko vyakt kar sakte hain!


bahut hi uchh koti ke bhav aapk is kavita me nihit hain

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) Sun Oct 31, 07:01:00 pm  

बहुत सुन्दर!
--
जब भी बोलता है मेरे भीतर का मौन!
मैं उससे पूछता हूँ "कौन"

अनामिका की सदायें ...... Sun Oct 31, 07:21:00 pm  

बहुत सुंदर...निशब्द हो कर भी बहुत कुछ कह जाना यही तो आपकी पहचान है.

वन्दना अवस्थी दुबे Sun Oct 31, 07:54:00 pm  

भावनाएं हो जाएँ

न कहीं दूषित

इसलिए मुझे

शब्द नहीं चाहिए .
अरे!!! कमाल है!!!

Dorothy Sun Oct 31, 10:45:00 pm  

खामोशी ही तो हमारी भावनाओं की सबसे खूबसूरत अभिव्यक्ति होती है. निशब्द संसार अर्थों का अथाह अतल सागर होता है जो हर बात में नए आयामों को रच देता है. बेहद गहन अर्थों को समेटती एक खूबसूरत और भाव प्रवण रचना. आभार.
सादर,
डोरोथी.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने Sun Oct 31, 11:17:00 pm  

वो जो साधु ने कहा था कि आँखों ने देखा है पर वो बोल नहीं सकतीं और ज़ुबान जो बोल सकती है उसने देखा नहीं... ठीक वैसे ही जिन भावों को दिल ने महसूस किया हो उसे ज़ुबान से निकलने वाले शब्द कैसे बयान कर सकते हैं... तभी तो प्रायः भावनाओं का प्रकटन आँसुओं या मुस्कुराहट से होता है... जिनकी कोई भाषा नहीं होती... बहुत सुंदर भाव संगीता दी!!

shikha varshney Mon Nov 01, 12:58:00 am  

दी ! कहा तो सही है आपने कभी कभी मौन बहुत कुछ कह जाता है जो शब्दों में भी कहने की ताकात नहीं होती.
पर आजकल लगने लगा है कि मौन को कमजोरी मान लिया जाता है.
पर मुझे आपकी कविता इतनी अच्छी लग रही है कि मैं अब मौन हो जाती हूँ और इसे पढ़ती हूँ बस.

क्षितिजा .... Mon Nov 01, 10:18:00 am  

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति ... सच में शब्द नहीं चाहिए ... आभार

Babli Mon Nov 01, 10:22:00 am  

बहुत ख़ूबसूरत और शानदार रचना लिखा है आपने! बधाई!

rashmi ravija Mon Nov 01, 02:30:00 pm  

भावनाएं हो जाएँ

न कहीं दूषित

इसलिए मुझे

शब्द नहीं चाहिए

सच...कभी कभी शब्द....बहुत पीड़ा पहुंचाते हैं...मौन ही श्रेयस्कर है.

अरुण चन्द्र रॉय Mon Nov 01, 03:42:00 pm  

"
भावनाएं हो जाएँ

न कहीं दूषित

इसलिए मुझे

शब्द नहीं चाहिए ."... बहुत गंभीर रचना.. कम शब्दों में बहुत गहरी बात..

अरुण चन्द्र रॉय Mon Nov 01, 03:42:00 pm  

"
भावनाएं हो जाएँ

न कहीं दूषित

इसलिए मुझे

शब्द नहीं चाहिए ."... बहुत गंभीर रचना.. कम शब्दों में बहुत गहरी बात..

Parul Mon Nov 01, 03:43:00 pm  

shbdon se pare ...bhawnayen kitni gehri hoti hain ..ye to malum nahi..par aapki rachna vahin kahin chod aayi hai mujhe..ultimate!

sheetal Mon Nov 01, 04:59:00 pm  

bahut sundar,
kabhi-kabhi dil ke ehsaas ko baya karne ke liye nisabdh hona bahut zaroori hota hain.
bahut khubsurat abhivyakti.

Dorothy Mon Nov 01, 06:45:00 pm  

संगीता स्वरुप जी, अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देकर मेरी रचना को अपना स्नेहाशीष देने के लिए धन्यवाद. आपने मेरी रचना को चर्चामंच में शामिल कर के जो सम्मान दिया है उस के लिए बेहद आभारी हूं.
सादर
डोरोथी.

VIJAY KUMAR VERMA Mon Nov 01, 07:29:00 pm  

सुन्दर भाव सम्प्रेषण.. सुन्दर रचना

डॉ. नूतन - नीति Mon Nov 01, 09:48:00 pm  

बहुत सुंदरता से आपने बात कह भी दी और मान भी रखा .. बात कहने का ये तरीका..कविता का सार्थकता को बताता है.. सुन्दर रचना..

सतीश सक्सेना Mon Nov 01, 10:04:00 pm  

दीवाली की शुभकामनाएं स्वीकार करें

रानीविशाल Mon Nov 01, 10:12:00 pm  

वाह ! बहुत सही व सुन्दर विचार ....जवाहर लाल नेहरू जी ने इसीलिए कहा है कि -"ख़ामोशी हमारे पवित्र विचारों का देवालय है" .
बहुत अच्छी रचना लगी दी

त्रिपुरारि कुमार शर्मा Mon Nov 01, 11:48:00 pm  

कभी-कभी शब्दों की ज़रूरत महसूस नहीं होती...मुझे भी !

निर्मला कपिला Tue Nov 02, 10:10:00 am  

भावनाओं के बिना शब्दों का क्या मोल। सुन्दर अभिव्यक्ति। शुभकामनायें।

दीप Tue Nov 02, 12:03:00 pm  

बहुत सुन्दर रचना, बहुत - बहुत शुभ कामना

कविता रावत Tue Nov 02, 02:09:00 pm  

भावनाएं हो जाएँ
न कहीं दूषित
इसलिए मुझे
शब्द नहीं चाहिए
..बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
दीवाली की शुभकामनाएं

Shaivalika Joshi Tue Nov 02, 10:57:00 pm  

भावनाएं हो जाएँ

न कहीं दूषित

इसलिए मुझे

शब्द नहीं चाहिए .

bilkul sahi kahaa aapne
Bhawnaye shabdo me bayaa nhi ho sakti

ज्योति सिंह Wed Nov 03, 12:20:00 am  

भावनाएं हो जाएँ

न कहीं दूषित

इसलिए मुझे

शब्द नहीं चाहिए
ati uttam .happy diwali aapke poore parivaar ko . .

babanpandey Wed Nov 03, 11:18:00 am  

दीपावली मंगलमय हो

sandhyagupta Thu Nov 04, 10:57:00 am  

शब्दों की नि:सारता को बखूबी प्रस्तुत किया आपने.शुभकामनायें.

Ravi Rajbhar Thu Nov 04, 02:42:00 pm  

Bahut sunder.. aur bhavpurn

subh diwaali.

sheetal Thu Nov 04, 07:29:00 pm  

Deepavali ki hardik subhkamnai.

गिरीश बिल्लोरे Thu Nov 04, 08:34:00 pm  

“नन्हें दीपों की माला से स्वर्ण रश्मियों का विस्तार -
बिना भेद के स्वर्ण रश्मियां आया बांटन ये त्यौहार !
निश्छल निर्मल पावन मन ,में भाव जगाती दीपशिखाएं ,
बिना भेद अरु राग-द्वेष के सबके मन करती उजियार !! “

हैप्पी दीवाली-सुकुमार गीतकार राकेश खण्डेलवाल

ताऊ रामपुरिया Thu Nov 04, 08:40:00 pm  

आपको परिवार एवं इष्ट स्नेहीजनों सहित दीपावली की घणी रामराम.

रामर

Gourav Agrawal Thu Nov 04, 10:46:00 pm  

क्या बात है ! बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति

Gourav Agrawal Thu Nov 04, 10:46:00 pm  

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आपको, आपके परिवार और सभी पाठकों को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं ....
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

archana Fri Nov 05, 12:48:00 am  

bhasha ho maun ki ehsaas hon zindagi ke...............kya baat hai ..badhaai.

डा.राजेंद्र तेला "निरंतर" Fri Nov 05, 12:56:00 am  

इसी तरह आप से बात करूंगा
मुलाक़ात आप से जरूर करूंगा

आप
मेरे परिवार के सदस्य
लगते हैं
अब लगता नहीं कभी
मिले नहीं है
आपने भरपूर स्नेह और
सम्मान दिया
हृदय को मेरे झकझोर दिया
दीपावली को यादगार बना दिया
लेखन वर्ष की पहली दीवाली को
बिना दीयों के रोशन कर दिया
बिना पटाखों के दिल में
धमाका कर दिया
ऐसी दीपावली सब की हो
घर परिवार में अमन हो
निरंतर दुआ यही करूंगा
अब वर्ष दर वर्ष जरिये कलम
मुलाक़ात करूंगा
इसी तरह आप से
बात करूंगा
मुलाक़ात आप से
जरूर करूंगा
01-11-2010

डॉ० डंडा लखनवी Fri Nov 05, 01:00:00 pm  

सराहनीय लेखन........
+++++++++++++++++++
चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
मंगलमय हो आपके, हेतु ज्योति का पर्व॥
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

डॉ० डंडा लखनवी Fri Nov 05, 01:01:00 pm  

सराहनीय लेखन........
+++++++++++++++++++
चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
मंगलमय हो आपके, हेतु ज्योति का पर्व॥
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

Meenu Khare Fri Nov 05, 01:27:00 pm  

ख़ूबसूरत पंक्तियाँ !दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !

मनोज कुमार Fri Nov 05, 02:04:00 pm  

चिरागों से चिरागों में रोशनी भर दो,
हरेक के जीवन में हंसी-ख़ुशी भर दो।
अबके दीवाली पर हो रौशन जहां सारा
प्रेम-सद्भाव से सबकी ज़िन्दगी भर दो॥
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
सादर,
मनोज कुमार

वन्दना अवस्थी दुबे Fri Nov 05, 07:07:00 pm  

दीपावली की असीम-अनन्त शुभकामनायें.

BrijmohanShrivastava Fri Nov 05, 10:26:00 pm  

आप को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
मैं आपके -शारीरिक स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करता हूँ

पलाश Fri Nov 05, 11:40:00 pm  

दीपावली की ढेर सारी शुभकामनायें ।

Babli Sat Nov 06, 07:44:00 pm  

आपको एवं आपके परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें!

विनोद कुमार पांडेय Sat Nov 06, 10:39:00 pm  

बहुत ही खूबसूरत...सुंदर अभिव्यक्ति...बधाई संगीता जी

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" Sun Nov 07, 07:00:00 pm  

बेहतरीन ... मौन शब्द से ज्यादा शक्तिशाली है

Mired Mirage Tue Nov 09, 11:02:00 am  

अति सुंदर!
घुघूती बासूती

ज्ञानचंद मर्मज्ञ Wed Nov 10, 01:03:00 pm  

वाह! इतने कम शब्दों में इतनी गहन अभिव्यक्ति !
कमाल है!
मेरी बधाई स्वीकार करें !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

मंजुला Wed Nov 24, 04:37:00 pm  

bahut badia ...der say pad pane ke liye khed hai....

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