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बादल ....और ..आसमां

>> Wednesday, 10 November 2010





उदासी के बादल 
छा गए हैं 
मेरे ज़िंदगी के 
फ़लक पर 
अब कुछ 
बरसें 
तो उजला 
आसमां  हो ...


48 comments:

Avinash Chandra Wed Nov 10, 05:05:00 pm  

उदासी है न, बरस ही जायेगी...:)

वन्दना Wed Nov 10, 05:30:00 pm  

होता है ऐसा कभी कभी……………चंद लफ़्ज़ों मे ही हाल कह दिया……………बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

Majaal Wed Nov 10, 05:38:00 pm  

बादलों की तो तबीयत ही आवारा होती है, कभी इधर कभी उधर, सबर रखिये, अपने आप ही उड़ कर कही और चले जाएंगे, तब तक आप एक दो कविताएँ और निकाल लें उस से, कवियों के लिए उदासी वैसे भी भरपूर अवसर होता है, इसलिए हे पार्थ ! इसे व्यर्थ न करो ! अवसर को भुनाओ पार्थ ! भुनाओ ... !

बढिया अभिव्यक्ति, लिखते रहिये ....

mahendra verma Wed Nov 10, 05:44:00 pm  

कम शब्दों में जिंदगी का एक बड़ा यथार्थ सिमट आया है...बहुत खूब।

shikha varshney Wed Nov 10, 05:51:00 pm  

उफ़ खुदारा ! कितना बरसाओगी ? बरस जायेगा कब तक टिकेगा?और आस्मां तो उजला ही है बस नजरें बदल कर देखिये ,नज़ारे बदल जायेंगे :)
हमेशा की तरह बिहारी टाइप पंक्तियाँ दी !

संगीता पुरी Wed Nov 10, 05:52:00 pm  

बादल बनते है तो देर सवेर बरस ही जाते हैं !!

ashish Wed Nov 10, 05:53:00 pm  

ख़ुशी की बयार चलेगी तो उदासी के बादल छट जायेंगे . ऐसे कहो बादलों से जाने को तो नट जायेंगे

रचना दीक्षित Wed Nov 10, 06:07:00 pm  

कम शब्दों में सच्ची बात,बहुत अच्छी लगी

राजेश उत्‍साही Wed Nov 10, 06:16:00 pm  

बरसो रे मेघा बरसो।

arvind jangid Wed Nov 10, 07:02:00 pm  

आपकी कविता ने मेरी लिखी कुछ पंक्तियाँ, मुझे याद दिला दी....

"दुखों के साथ,
रिश्ता मेरा पुराना है,
तुम साथ चलो,
ये फैसला तुम्हारा है,
आज फिर दिल भर आया,
इन बूंदों का आँखों से,
रिश्ता कोई पुराना है."

सुन्दर रचना के लिए आपका आभार.

क्षितिजा .... Wed Nov 10, 07:13:00 pm  

बस एक ख़ुशी का झोंका... और ये बदल छंट जाएंगे ... ये ही जीवन है ...

sheetal Wed Nov 10, 07:32:00 pm  

udaasi ke baadal tikte nahi hamesha,
unhe to ek din chatna hi hota hain,aur jis din yeh chatenge us din bas charo aur ujaala hi ujaala hoga.
bahut sundar likha aapne.
mera ek aur blog bhi hain uska link de rahi hun kabhi waqt mile to zaroor aaye.
http://kisseaurkahaniyonkiduniya.blospot.com

कविता रावत Wed Nov 10, 07:34:00 pm  

कम शब्दों में जिंदगी का यथार्थ
....बढिया अभिव्यक्ति के लिए आपका आभार

मनोज कुमार Wed Nov 10, 08:01:00 pm  

बरस कर सब शांत हो जाएगा....ये तो आना जाना है।

अनामिका की सदायें ...... Wed Nov 10, 08:04:00 pm  

जल्दी बरसाइये इन बादलों को वर्ना और बोझ बढ़ जाएगा....उफ़...फिर क्या होगा ???

:):):)

देवेन्द्र पाण्डेय Wed Nov 10, 08:22:00 pm  

अच्छे भाव जगाती पंक्तियां..शुभकामनाएं..

अनुपमा पाठक Wed Nov 10, 08:58:00 pm  

मौसम आने जाने हैं
बादल छट जायेंगे....
अश्रु बूंदों के बीच से
इन्द्रधनुष खिल जायेंगे!!!!
sundar!

Dorothy Wed Nov 10, 09:02:00 pm  

अंतर्मन की गहराईयों की खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार
सादर,
डोरोथी.

रेखा श्रीवास्तव Wed Nov 10, 09:50:00 pm  

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, चंद शब्दों में इतनी गहरी बात कहने का गुण आपमें ही है.

मोहसिन Wed Nov 10, 10:28:00 pm  

वाह क्या पंक्ति लिखी है आपने. लाजवाब.

सुमन'मीत' Wed Nov 10, 10:30:00 pm  

वाह क्या बात है...........

rashmi ravija Wed Nov 10, 10:44:00 pm  

सुन्दर अभिव्यक्ति....

केवल राम Wed Nov 10, 11:00:00 pm  

जीवन का यथार्थ अभिव्यक्त किया है आपने ...शुभकामनायें

Dr. Ashok palmist blog Wed Nov 10, 11:37:00 pm  

बहुत ही सुन्दर पँक्तियाँ हैँ और लाजबाव प्रस्तुति के लिए आभार दी।

प्रवीण पाण्डेय Thu Nov 11, 07:39:00 am  

बादलों की नमी समेटे पंक्तियाँ।

ALOK KHARE Thu Nov 11, 08:32:00 am  

well composed di,

jab badal chha hi gaye hain to barsenge bhi

रानीविशाल Thu Nov 11, 08:55:00 am  

आजकी रचना सच में गागर में सागर सी बात ही है ...कम शब्दों में बहुत बड़ी बात समेट ली आपने

saanjh Thu Nov 11, 09:46:00 am  

:) as usual great...luv u

RAJWANT RAJ Thu Nov 11, 10:23:00 am  

ye kvita aapki udas bhavnao ki nmi ko shiddt se mhsoos kra rhi hai . is nmi ko aap hi door kr skti hai to fir der kis bat ki . mai mutmeen hu subah hogi jroor hogi . aameen .

दिपाली "आब" Thu Nov 11, 10:47:00 am  

barsenge jarur barsenge.. Love u masi

ZEAL Thu Nov 11, 01:41:00 pm  

.

चंद शब्दों में इतनी गहरी बात कहने का गुण आपमें ही है...

I agree with Rekha ji.

.

ajit gupta Thu Nov 11, 03:20:00 pm  

संगीता जी, हमारे रहते आखिर आप उदास ही क्‍यों हैं?

यश(वन्त) Thu Nov 11, 03:21:00 pm  

देखन में छोटें लगें,घाव करें गंभीर!...बहुत कुछ कहती पंक्तियाँ!

सादर.

डॉ. हरदीप संधु Thu Nov 11, 03:28:00 pm  

अच्छे भाव...सुन्दर कविता..गागर में सागर !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) Thu Nov 11, 08:44:00 pm  

उपयोगी पोस्ट सुन्दर रचना!
इसकी चर्चा यहाँ भी है-
http://charchamanch.blogspot.com/2010/11/335.html

जेन्नी शबनम Thu Nov 11, 09:08:00 pm  

kam shabdon mein bhaavpurn rachna, shubhkaamnaayen.

M VERMA Thu Nov 11, 10:12:00 pm  

इसे कहते हैं 'भावों की दरियादिली और लफ्जो की कंजूसी'
बेहतरीन

Amrita Tanmay Thu Nov 11, 11:34:00 pm  

हाँ ........... सत्य व सुन्दर रचना

रश्मि प्रभा... Fri Nov 12, 07:05:00 am  

chahker ye aankhen nahi chhalakti
naa dard jard jata hai
per sach hai
khuda hamesha paas hota hai

वाणी गीत Fri Nov 12, 08:11:00 am  

घुट जाता है जब दिल घने बादलों की तरह ,
बरस आती हैं आँखें बारिश की बूंदों की तरह ..

डा. अरुणा कपूर. Sat Nov 13, 02:28:00 pm  

wow!....kya baat hai!...jarur jarur barsebgenge!..sundar rachana!

दिगम्बर नासवा Sun Nov 14, 03:02:00 pm  

ये बादल तो बरसने के लिए ही होते हैं ... बरस जाते हैं ...

usha rai Tue Nov 16, 11:04:00 pm  

संगीता जी कितनी सुंदर सुंदर प्यारी प्यारी कविताएँ हैं आपकी ,और कितना मंजा हुआ ! सुघड़ हांथो से रचा हुआ ! आज तो मै धन्य हो गई !चित्र भी एक से बढकर एक ! मार्ग दर्शनाभिलाषी हूँ !

sumit das Fri Nov 19, 01:52:00 am  

सुन्दर अभिव्यक्ति.

Swarajya karun Sun Nov 21, 01:58:00 pm  

गागर में सागर जैसी सार्थक अभिव्यक्ति. अच्छी लगी कविता. बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं .

***Punam*** Tue Dec 28, 09:48:00 am  

उदासी के बादल जब छंट जाते हैं तो सूरज की रौशानी आसमान को उजला कर देती है..सब साफ़-साफ़ नज़र आने लगता है...संगीताजी,बधाई!

उदगार Sat Feb 26, 06:51:00 pm  

उदासी के बादल जरूर बरसेंगे, पर इन के बीच ही कहीं खुशियों का इन्द्रधनुष भी छुपा है..उसे देखिये

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