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दंश ..

>> Tuesday, 24 May 2011




जब  भी 
मन के 
चूल्हे पर 
मैंने 
ख़्वाबों क़ी
रोटी  सेकी
तेरे 
दंश भरे 
अंगारों ने 
उसे जला डाला ...


99 comments:

shikha varshney Wed May 25, 12:06:00 am  

उफ़ उफ़ ...ये तस्वीर वाली रोटी पतिदेव देखते तो कहते - एक काम ठीक से नहीं कर सकतीं रोटी भी जला दी ..
अब उन्हें कौन बताये कि उन्हीं कि वजह से जलती है :)
मजाक के अलावा दी! क्या गज़ब पंक्तियाँ लिखीं है. मन के छाले जैसे रोटी पर उभर आये हैं. .

Dr.Nidhi Tandon Wed May 25, 01:10:00 am  

दंश,तंज के अंगारे कलेजा जला डालते हैं...ख़्वाबों कि रोटी तो अदना सी चीज़ है..............आपने बहुत अच्छा लिखा है........गज़ब कि बात समेत ली है ७-८ पंक्तियों में..........साधुवाद

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" Wed May 25, 03:53:00 am  

बहुत सुन्दर क्षणिका ... मन की रोटी सेंकी भी अंगारों के सहारे जाती है !

डॉ॰ मोनिका शर्मा Wed May 25, 04:04:00 am  

बहुत सुंदर और गहन अभिव्यक्ति लिए हैं पंक्तियाँ.....

Rajesh Kumari Wed May 25, 08:24:00 am  

bahut gahan bhaav liye hua hai aapka yeh sher...really..nice...umda.

कुश्वंश Wed May 25, 08:32:00 am  

बहुत ही सुन्दर भाव लिए मन की आवाज़ , आपने मोती समेत लिए बिखरे जो पड़े थे बधाई

Babli Wed May 25, 08:48:00 am  

तेरे
दंश भरे
अंगारों ने
उसे जला डाला ...
वाह! संगीता जी बहुत खूब लिखा है आपने! मन की गहराई को बहुत ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है! आपकी लेखनी को सलाम!

kunwarji's Wed May 25, 09:03:00 am  

waah!....kuchh hi shabdo me itni badi baat...

kunwar ji,

दर्शन कौर धनोए Wed May 25, 09:22:00 am  

वाह ! वाह ! वाह ! रोटी पर उभरे काले दाग मानो सच मुंच के छाले हो... क्या बात कही है संगीता दी..

प्रतिभा सक्सेना Wed May 25, 09:47:00 am  

बहुत सही ,एकदम सटीक !

ajit gupta Wed May 25, 10:03:00 am  

इन दंशों के कारण ही कुछ कर गुजरने का जज्‍बा भी आता है। इसलिए दंश अच्‍छे भी है। जैसे दाग अच्‍छे हैं।

Sadhana Vaid Wed May 25, 10:04:00 am  

ख़्वाबों का यह हश्र मन को भी जला देता है ! चंद शब्दों में मन की गहनतम अनुभूतियों को इतनी सशक्त अभिव्यक्ति देने में आपको महारत हासिल है संगीता जी ! रचना की जितनी सराहना की जाये कम ही होगी ! बहुत ही सुन्दर ! बधाई एवं आभार !

वन्दना Wed May 25, 11:03:00 am  

जब भी
मन के
चूल्हे पर
मैंने
ख़्वाबों क़ी
रोटी सेकी
तेरे
दंश भरे
अंगारों ने
उसे जला डाला ..

दर्द का चित्रण इससे बेहतर कैसे हो सकता है।

रंजना [रंजू भाटिया] Wed May 25, 11:08:00 am  

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...बेहतरीन रचना है यह आपकी

Dr (Miss) Sharad Singh Wed May 25, 11:55:00 am  

तेरे
दंश भरे
अंगारों ने
उसे जला डाला ...

वाह...बहुत भावपूर्ण...बहुत सुन्दर...
ख्वाबों की रोटी और अंगारों के दंश ने सब कुछ बयां कर दिया है...
हार्दिक बधाई.

Sonal Rastogi Wed May 25, 12:28:00 pm  

jab baat dil par lagti hai to esaa hi mehsoos hota hai

डा. अरुणा कपूर. Wed May 25, 12:34:00 pm  

kyaa baat hai!...roti par bhi bahut kuchh likha jaa sakta hai....behtareen!

mahendra srivastava Wed May 25, 01:16:00 pm  

बहुत अच्छी रचना है। वधाई

रेखा श्रीवास्तव Wed May 25, 02:55:00 pm  

ये रोटी भी न कहाँ कहाँ पहुच जाती है ? पेट की ज्वाला बुझाने के लिए तो है ही पक भी जाती कहाँ कहाँ की आग पर.
ये मजाक कि बात है लेकिन बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया हैं अपने अंतर के भावों को.

रेखा श्रीवास्तव Wed May 25, 02:55:00 pm  

ये रोटी भी न कहाँ कहाँ पहुच जाती है ? पेट की ज्वाला बुझाने के लिए तो है ही पक भी जाती कहाँ कहाँ की आग पर.
ये मजाक कि बात है लेकिन बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया हैं अपने अंतर के भावों को.

सदा Wed May 25, 03:13:00 pm  

तेरे
दंश भरे
अंगारों ने
उसे जला डाला ..

गहन भावों को समेटे यह पंक्तियां ।

Kailash C Sharma Wed May 25, 03:31:00 pm  

कुछ शब्दों में गहन चिंतन समाहित कर देना आपकी रचनाओं की विशेषता है...यह प्रस्तुति भी इसका अपवाद नहीं..आभार

Maheshwari kaneri Wed May 25, 04:28:00 pm  

बहुत ही सुन्दर भाव ....गहन अभिव्यक्ति ....
आभार

somali Wed May 25, 05:13:00 pm  

sara dard ubhar aya panktiyon me,isse acchi abhivyakti dard ki ho nahi sakti

***Punam*** Wed May 25, 06:31:00 pm  

man ko dikhane ka is se achchha doosra koi tareeka nahin hai...!
bahut sundar...!!

कविता रावत Wed May 25, 07:03:00 pm  

सच दंश में आग से भी ज्यादा दहन करने की क्षमता होती है...
कितनी गहरी बात आपने इस क्षणिका के माध्यम से कह दी. सीधे दिल पर असर हुआ...आभार

kshama Wed May 25, 08:05:00 pm  

In chand alfaazon me kitna kuchh kah daalaa!

मनोज कुमार Wed May 25, 09:48:00 pm  

शिखा की बातें मैं भी कोट करना चाहता हूं ...“ मन के छाले जैसे रोटी पर उभर आये हैं”!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) Wed May 25, 09:51:00 pm  

कम शब्दों में बहुत गहरी बात कह दी आपने तो!

Vaanbhatt Wed May 25, 11:50:00 pm  

रोटी सेंकना...अच्छी बात नहीं है...नेता भी तो रोटियां सेंकते है...पर जलते तो नहीं जलाते हैं...काश कोई दिल से आपकी तरह रोटियां सेंके...

रचना दीक्षित Thu May 26, 12:23:00 am  

मन का चूल्हा और खावों की रोटी. काफी स्वादिष्ट और रोचक सृजन. शुभकामनाएँ.

ज्योति सिंह Thu May 26, 01:17:00 am  

is baar tasvir bhi takkar ki hai ,bahut hi sundar dono cheeze

Rahul Thu May 26, 10:29:00 am  

अगर आच तेज हो तो सपने जल ही जाते है , सुन्दर रचना ...

दिगम्बर नासवा Thu May 26, 12:56:00 pm  

बहुत खूब .. कुछ ही शब्दों में गहरी बात ....

इमरान अंसारी Thu May 26, 02:49:00 pm  

सुभानाल्लाह....बहुत खूब....रोटी और मन....वाह

ashish Thu May 26, 03:04:00 pm  

मै जरा देर से आया लेकिन दुरुस्त आया . जली रोटी के फफोले ह्रदय की बात कह गए ., देखन में छोटन लगे------.

निवेदिता Thu May 26, 04:03:00 pm  

दी,कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह दी ....सादर !

lokendra singh rajput Thu May 26, 05:27:00 pm  

सुन्दर अभिव्यक्ति... उस पर शिखा जी कि पहली टिप्पणी भी जबरदस्त रही.....

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' Thu May 26, 06:49:00 pm  

वाह वाह वाह
संगीता जी,
गागर में सागर इसे ही कहा जाता है.

Neha Thu May 26, 07:07:00 pm  

bahut khub...kahan to log kalam ghiste jate hain...par guni to wahi hai jo gagar me sagar bhar de....aapki tarah..

Swarajya karun Thu May 26, 11:27:00 pm  

छोटी सी कविता में चौंका देने वाली बहुत बड़ी बात कह दी आपने.आभार .बहुत-बहुत शुभकामनाएं .

आशा Fri May 27, 06:32:00 am  

बहुत गहरे भाव छिपे हैं इस क्षणिका में |बहुत बहुत बधाई |

Kunwar Kusumesh Fri May 27, 10:27:00 am  

गागर में सागर.

संजय भास्कर Fri May 27, 01:06:00 pm  

दंश भरे
अंगारों ने
उसे जला डाला ..

गहन भावों को समेटे यह पंक्तियां ।

Sachin Malhotra Sun May 29, 07:43:00 pm  

लाजवाब.. पढ़ कर मज़ा आ गया
मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है : Blind Devotion

Dr Varsha Singh Mon May 30, 10:38:00 am  

शब्द-शब्द संवेदनाओं से भरी मार्मिक रचना ....
गहन मनोभाव हैं आपकी इस रचना में...

नूतन .. Mon May 30, 11:49:00 am  

गहन विचारों के साथ सार्थक प्रस्‍तुति ।

वीना Mon May 30, 09:27:00 pm  

दंश तो बहुत कुछ जला डालते हैं...
बहुत सुंदर...

Babli Tue May 31, 09:30:00 am  

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

प्रतीक माहेश्वरी Tue May 31, 11:46:00 am  

चंद शब्दों में काफी गहरी बात...

सुख-दुःख के साथी पर आपके विचारों का इंतज़ार है..
आभार

hem pandey Wed Jun 01, 11:37:00 am  

'दंश ' की तीव्रता का अहसास कराती सारपूर्ण पंक्तियाँ !

नश्तरे एहसास ......... Wed Jun 01, 08:13:00 pm  

बहुत सुंदर लिखा है आपने,
हर शब्द एहसासों का समंदर समेटे है !!

Richa P Madhwani Wed Jun 01, 08:58:00 pm  

http://shayaridays.blogspot.com

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) Thu Jun 02, 12:12:00 am  

बारह शब्दों में बारह महीनों की व्यथा.ह्रदय स्पर्शी रचना.

Anju Thu Jun 02, 08:16:00 pm  

कम शब्दों में बहुत कुछ कहना ....आपकी छोटी छोटी नज़्मों की खासियत
बहुत ही सुंदर भावपूर्ण रचनायें
दंश ,हरसिंगार ,हसरत या पलाश ...
समंदर रेत का,बाढ़ का कहर ,या फिर
तेरे होने का अहसास.....
मन को कहीं गहरे तक छू जायें ,पर प्रत्युतर में कुछ कह न पाएं ..
....??????????.......बस इतना ही
"जिन खोजा तिन पाइया गहरे पानी पैठ "
शुभकामनाएं ...

Anjana (Gudia) Fri Jun 03, 01:20:00 am  

तेरे
दंश भरे
अंगारों ने
उसे जला डाला

bahut tees bhari hai in panktiyon mein....

विजय रंजन Fri Jun 03, 08:16:00 pm  

yah dansh pet puja ke liye bhari na pare...laghu kavya mein anant vyatha ki katha...

यादें Sat Jun 04, 05:07:00 pm  

निशब्द !

जो दिल ने कहा ,लिखा वहाँ
पढिये, आप के लिये;मैंने यहाँ:-
http://ashokakela.blogspot.com/2011/05/blog-post_1808.html

Coral Sun Jun 05, 11:45:00 am  

बहुत सुन्दर पंक्तिया

Happy Environmental Day !

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति Tue Jun 07, 12:21:00 pm  

वाह संगीता जी ..क्या बात है... जली रोटी और ख्वाबों का चूल्हा .. वाह

Taru Tue Jun 07, 07:09:00 pm  

main to smiley banane ke liye bhi late ho gayi mumma...:(

anyways.....mail account kharab tha yahi kaaran tha.....:)

Er. सत्यम शिवम Tue Jun 07, 10:51:00 pm  

आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके पोस्ट की है हलचल...जानिये आपका कौन सा पुराना या नया पोस्ट है यहाँ...........

"नयी पुरानी हलचल"

M VERMA Wed Jun 08, 06:29:00 am  

अंगारों का साहचर्य
जलना तो तय है

निर्मला कपिला Wed Jun 08, 05:30:00 pm  

निशब्द इतने कम शब्दों मे गहरी बात और अद्भुत बिम्ब। शुभकामनायें।

Mrs. Asha Joglekar Thu Jun 09, 07:23:00 am  

Man ke chulhe parkwabon kee rotee kyq bqt hai ? Jalne kee bat se jaise man ka dard ubhar aaya. Bahut sunder,\.

Swati Vallabha Raj Thu Jun 09, 01:34:00 pm  

man ki vyatha ka chitran behtarin dhang se kiya.....taarif ke liye shabd nahi..........

डॉ० डंडा लखनवी Fri Jun 10, 11:52:00 pm  

gagar men sagar bhara hai......aapane. Bhavsampann racana..
badhyee.

Minakshi Pant Sat Jun 11, 05:28:00 pm  

bahut hi khubsurti se dil ki baat btai rachna .

Amrita Tanmay Sat Jun 11, 05:40:00 pm  

सुन्दरता से लिखा है आपने..शुभकामनायें

Udan Tashtari Sun Jun 12, 11:04:00 pm  

बहुत बढ़िया...

ZEAL Tue Jun 14, 09:07:00 am  

अक्सर ऐसे दंश मन को उदास कर जाते हैं , लेकिन शायद यही ज़िन्दगी है।

JHAROKHA Wed Jun 15, 07:19:00 pm  

sangeeta di
soch rahi hun ki kya comments dun --
likhne ko shabd nahi mil rahe hain.
in chohti-chhoti si panktiyon ne apne andar sab kuchh samet liya hai .
bahut behtareen xhanika
bahut bahut bdahi
poonam

Mired Mirage Fri Jun 17, 01:51:00 pm  

वाह.बहुत दिन से दिख नहीं रहीं.
घुघूती बासूती

neelima sukhija arora Sat Jun 18, 07:11:00 pm  

गहन अभिव्यक्ति लिए हैं पंक्तियाँ.....

Bhushan Sun Jun 19, 04:35:00 pm  

मन के चूल्हे पर पकते ख़्वाब वाक्यदंश से जलते रहते हैं.
बहुत सुंदर लिखा है.

Prity Mon Jun 20, 05:10:00 am  

तेरे दंश भरे अंगारों ने उसे जला डाला ...
थोड़े से शब्द सब कुछ कह गये...

Surendra shukla" Bhramar"5 Thu Jun 23, 07:27:00 pm  

एक दर्द न जाने कहाँ छुपा है उभर ही आता है लेखनी में -सुन्दर छवि और बहुत कुछ कह सुना गयी ये जली रोटी --

शुक्ल भ्रमर ५

veerubhai Tue Jun 28, 07:16:00 am  

ख़्वाबों की रोटी अभिनव प्रयोग ,नियति के आगे सब कुछ ढेर .

Ravi Rajbhar Tue Jun 28, 07:19:00 pm  

dekhan me chhote lage, ghaw kare gambhir .. :)

amrendra "amar" Thu Jun 30, 05:14:00 pm  

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

THANTHANPAL Tue Jul 05, 10:29:00 pm  

जब भी
मन के
चूल्हे पर
मैंने
ख़्वाबों क़ी
रोटी सेकी
मनमोहन तेरे
दंश भरे महंगाई के
अंगारों ने
उसे जला डाला ...

रचना Thu Aug 18, 02:53:00 pm  

no words to appreciate
excellent

Dr.Bhawna Fri Sep 02, 03:30:00 am  

bahut hi gahre bhav hai is rachna men...

NISHA MAHARANA Fri Sep 02, 11:38:00 am  

मेरे ब्लाग पर आने के लिये बहुत-बहुत आभार।
दंश हमेशा दु;ख नही देता बल्कि हमारे लिये
प्रेरक का भी काम करता है।अच्छा लगा पढकर।

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