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केसरिया चावल

>> Saturday, 9 July 2011


सोचा था 
मन की  हांड़ी में 
ज़िंदगी का केसरिया 
चावल पकाऊँगी  खास 
पर न केसरिया 
प्रेम मिला 
और न ही 
भावनाओं की मिठास .

91 comments:

वन्दना Sat Jul 09, 04:13:00 pm  

उफ़ चंद शब्दो मे गहरी बात कह दी।

Dr.Nidhi Tandon Sat Jul 09, 04:21:00 pm  

क्या बात है...वैसे यह चावल पकते तो यह तो तय है कि खुशबू दूर तलक जाती

mahendra srivastava Sat Jul 09, 04:37:00 pm  

क्या बात है, बहुत सुंदर

मनोज कुमार Sat Jul 09, 04:58:00 pm  

बिरियानी ...
पकते-पकते पक गई
सुगंध भी फैली
कुछ इधर
कुछ उधर!!
क्या हुआ जो केसर कम पड़ गया
क्या हुआ जो छौंक नहीं दी
अपनी भावनाओं की आंच ही काफ़ी थी!

कुश्वंश Sat Jul 09, 05:02:00 pm  

khubsurat jajbaat kahne ka andaaz nirala badhai

S.N.Shukla Sat Jul 09, 05:10:00 pm  

Sangeeta ji,
aap jaisi vidushi ki rachana par yah comment karna dhrishta hai,kintu fir bhee man maan nahin rahaa hai.

socho to saade chawal men mil jaata keshar ka ujaas .
jyaada meetha nukasandeh, achchhee hoti thodi mithaas .

ब्लॉ.ललित शर्मा Sat Jul 09, 05:13:00 pm  

सुंदर भावाभिव्यक्ति के लिए आभार

वन्दना महतो ! (Bandana Mahto) Sat Jul 09, 05:43:00 pm  

कम शब्दों में जीवन सार कह देना..... आपकी ही कलम हो सकती है....

प्रतिभा सक्सेना Sat Jul 09, 05:50:00 pm  

जो मिला, सभी नत-शिर हो कर स्वीकार लिया ,
किसलिये शिकायत, जब आगे चल देना है!

Sadhana Vaid Sat Jul 09, 06:06:00 pm  

भले ही केसर कम पड़ गयी हो लेकिन जो कुछ भी आपने पकाया वह इतना सौंधा और स्वादिष्ट है कि उसकी सुगंध दूर तक फ़ैली हुई है और उसे ही ग्रहण करने के लिये सब लालायित हो रहे हैं ! बहुत सुन्दर रचना ! बधाई एवं शुभकामनायें !

सुनीता शानू Sat Jul 09, 06:09:00 pm  

jo bhi pakaya hai aapane svadisht hai...aapke shabdon ki mithas kafi hai...:)

ashish Sat Jul 09, 06:48:00 pm  

केसरिया चावल भले ना पके. मिटटीकी हांड़ी भले ना चढ़े , लेकिन आपका जीवन कस्तूरी जैसा सुगन्धित रहे , आमीन.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने Sat Jul 09, 06:53:00 pm  

संगीता दी!
किसी और की बात होगी यह..आपकी तो हो ही नहीं सकती.. इतने सारे लोगों का प्रेम आपके साथ है और इतनी सद्भावनाएं आपके साथ जुडी हैं.. और हम सभी गुनगुना रहे हैं नीरज जी के गीत:
खुशबू सी आ रही है इधर ज़ाफ़रान की,
खिड़की खुली हुई है किसी के मकान की!

अरुण चन्द्र रॉय Sat Jul 09, 06:53:00 pm  

संगीता जी कम शब्दों में जीवन का सार कह देती हैं आप.... केसरिया चावल बढ़िया विम्ब बन गया है.....

यादें Sat Jul 09, 07:25:00 pm  

और मन की बात ज़ुबाँ
पर आ गई !
सुंदर भाव !!!

शुभकामनायें!

sushma 'आहुति' Sat Jul 09, 07:47:00 pm  

बहुत ही कम शब्दों ने कितनी गहरी बात कह दी.... बहुत खूब....

mridula pradhan Sat Jul 09, 07:56:00 pm  

lekin aapki kavita se keshariya chwal ke mithas ki khooshboo aa rahi hai......

smshindi By Sonu Sat Jul 09, 08:13:00 pm  

महोदय/ महोदया जी,
अब आपके लिये एक मोका है आप भेजिए अपनी कोई भी रचना जो जन्मदिन या दोस्ती पर लिखी गई हो! रचना आपकी स्वरचित होना अनिवार्य है! आपकी रचना मुझे 20 जुलाई तक मिल जानी चाहिए! इसके बाद आयी हुई रचना स्वीकार नहीं की जायेगी! आप अपनी रचना हमें "यूनिकोड" फांट में ही भेंजें! आप एक से अधिक रचना भी भेजें सकते हो! रचना के साथ आप चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक(ब्लॉग लिंक), ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिख सकते है! प्रथम स्थान पर आने वाले रचनाकर को एक प्रमाण पत्र दिया जायेगा! रचना का चयन "स्मस हिन्दी ब्लॉग" द्वारा किया जायेगा! जो सभी को मान्य होगा! मेरे इस पते पर अपनी रचना भेजें sonuagra0009@gmail.com या आप मेरे ब्लॉग “स्मस हिन्दी” मे टिप्पणि के रूप में भी अपनी रचना भेज सकते हो.
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Roshi Sat Jul 09, 08:26:00 pm  

pyar ke bhav sunder hai

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति Sat Jul 09, 08:47:00 pm  

बाप रे बाप.. आप कितना जबरदस्त लिख देती है.. वाह

Er. सत्यम शिवम Sat Jul 09, 09:33:00 pm  

क्या कहा है आंटी...बहुत सुंदर...अलग उपमानों को लेकर आप जीवनदर्शन की अद्भूत बात कह जाती है.....बहुत सुंदर।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " Sat Jul 09, 09:38:00 pm  

कुछ शब्दों में पूरा जीवन दर्शन ...........
प्रणम्य है लेखनी ...

संध्या शर्मा Sat Jul 09, 09:40:00 pm  

बहुत सुन्दर रचना....शुभकामनायें.....

डॉ॰ मोनिका शर्मा Sat Jul 09, 10:12:00 pm  

सधे हुए ..प्रभावित करते शब्द ... कैसे बांध लेती हैं आप कम शब्दों ऐसी गहन बातें....

शालिनी कौशिक Sun Jul 10, 12:44:00 am  

dil ko chhoo gayee aapki prastuti.badhai sangeeta ji.

shikha varshney Sun Jul 10, 01:41:00 am  

अरे आपको न केसर की जरुरत है न मिठास की.आप तो जिसे हाथ लगा दें अपने आप ही मीठा हो जाये.
कम शब्दों में सुन्दर ,गहरी बात.

Manish Sun Jul 10, 03:28:00 am  

समझने वाले उतने होशियार नही होते जितने की समझाने वाले. लेकिन जब बात समझ में आती है तो भावनाओं की मिठास वाली तलाश मन ही मन शुरू हो जाती है.

राजेश उत्‍साही Sun Jul 10, 10:14:00 am  

प्रेम का रंग तो हमारी आंखों में होता है अगर वह है तो आप उसे किसी भी रंग में देख सकते हैं। इसलिए तो कहा गया है सावन के अंधे को सब हरा हरा ही दिखता है।

Amrita Tanmay Sun Jul 10, 12:22:00 pm  

गहन अभिव्यक्ति ,बहुत सुन्दर

दिगम्बर नासवा Sun Jul 10, 02:36:00 pm  

जीवन में कई बार बसंत ओड़ा नहीं जा पाता ...
बहुत गहरी अभिव्यक्ति है ...

lokendra singh rajput Sun Jul 10, 05:55:00 pm  

गहरी बात है....

डॉ टी एस दराल Sun Jul 10, 06:32:00 pm  

अति सुन्दर . लेकिन किस की बात कह दी जी .
ज़ाहिर है यह बात खुद की नहीं , बात है ज़माने की .

kase kahun?by kavita verma Sun Jul 10, 09:07:00 pm  

kesariya prem aur bhavnaon ki mithas....ske intejar me jindagi hi beet jati hai...sunder bimb...

kase kahun?by kavita verma Sun Jul 10, 09:07:00 pm  

kesariya prem aur bhavnaon ki mithas....ske intejar me jindagi hi beet jati hai...sunder bimb...

kase kahun?by kavita verma Sun Jul 10, 09:07:00 pm  

kesariya prem aur bhavnaon ki mithas....ske intejar me jindagi hi beet jati hai...sunder bimb...

sm Mon Jul 11, 02:05:00 am  

man ki handi
beautiful poem

Bhola-Krishna Mon Jul 11, 06:58:00 am  

संगीता जी
मन की हांडी की मिठास से रंग देतीं यदि सादा चावल !
केसरिया बन जाता ,निश्चय ही वह साधारण चावल !
"भोला"

Akanksha~आकांक्षा Mon Jul 11, 10:17:00 am  

पर न केसरिया
प्रेम मिला
और न ही
भावनाओं की मिठास ...यह भी जीवन की अजीब विडम्बना है...

_______________
शब्द-शिखर / विश्व जनसंख्या दिवस : बेटियों की टूटती 'आस्था'

ज्ञानचंद मर्मज्ञ Mon Jul 11, 10:39:00 am  

kam shabdon men badi baat kahne ki adbhut kshamata hai aapmen !
abhaar

इमरान अंसारी Mon Jul 11, 03:24:00 pm  

हैट्स ऑफ.....इतने कम शब्दों में इतनी गहराई तक जाने के लिए|

प्रवीण पाण्डेय Mon Jul 11, 06:40:00 pm  

वह सुबह कभी तो आयेगी।

ehsas Mon Jul 11, 09:14:00 pm  

हमेशा की तरह एक शानदार रचना। कम शब्दों में कितनी गहरी बात कह दी आपने। आभार।

पी.एस .भाकुनी Tue Jul 12, 09:50:00 am  

pasand aaye kesariya chaawal, chawal km hain lakin swadisht hain..
abhaar......................

Dr (Miss) Sharad Singh Tue Jul 12, 02:23:00 pm  

केसरिया चावल के बिम्ब को लेकर बहुत कुछ कह दिया आपने...
बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !

जितेन्द्र देव पाण्डेय 'विद्यार्थी' Tue Jul 12, 08:29:00 pm  

संगीता जी इस खूबसूरती को मैं क्या कहूँ निःशब्द हूँ

Dr Varsha Singh Tue Jul 12, 09:12:00 pm  

बहुत खूब..हमेशा की तरह...कम शब्दों में गहरी बात....

Babli Wed Jul 13, 10:18:00 am  

अद्भुत सुन्दर पंक्तियाँ! बहुत गहरी बात कह दिया आपने! शानदार प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

प्रतीक माहेश्वरी Wed Jul 13, 11:59:00 am  

ओह! ये तो सुनकर अच्छा नहीं लगा...

हरकीरत ' हीर' Wed Jul 13, 12:21:00 pm  

केसरिया चावल....

नए बिम्ब हमेशा आकर्षित करते हैं .......

mahendra srivastava Wed Jul 13, 01:45:00 pm  

वाकई आपकी रचनाओं को जितनी बार पढिए हर बार नई तो लगती ही है, भाव भी बदलते रहते है।
बहुत सुंदर.. पहले भी पढ चुका हूं।

सदा Wed Jul 13, 03:20:00 pm  

वाह ...बहुत खूब ।

Maheshwari kaneri Wed Jul 13, 11:37:00 pm  

आप ने तो गागर में सागर भर दिया..

सदा Thu Jul 14, 12:12:00 pm  

लाजवाब करती प्रस्‍तुति ।

knkayastha Thu Jul 14, 02:16:00 pm  

क्या कहने...

Surendra shukla" Bhramar"5 Thu Jul 14, 08:40:00 pm  

आदरणीया संगीता जी सब कुछ मिलेगा देर है अंधेर नहीं -भावनाओं की मिठास तो भरी पड़ी है आप के पास
खूबसूरत रचना -बधाई
शुक्ल भ्रमर ५
भ्रमर का दर्द और दर्पण

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) Sat Jul 16, 08:04:00 pm  

अछूते बिम्बों से गागर में सागर भर दिया है.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' Sun Jul 17, 12:03:00 am  

संगीता जी, दुआ है कि ये भावनाओं की सुगंध हमेशा महकती रहे.

***Punam*** Tue Jul 19, 12:36:00 am  

काश.....
आपका चावल पाक जाए...!
फिर मैं भी अपना चावल पकाने की कोशिश करूँ ..!!!
चावल के दाने सी रचना..
पूरा मुंह मीठा कर गई !!

POOJA... Wed Jul 20, 08:34:00 pm  

sirf kuch gine-gine shabdon na jaane kitane bhaav...

Vivek Jain Wed Jul 20, 11:01:00 pm  

बहुत सुंदर तरीका है बात कहने का,
सादर,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Udan Tashtari Thu Jul 21, 10:26:00 am  

वाह! बहुत सुन्दर रचना...

निवेदिता Thu Jul 21, 12:43:00 pm  

सुंदर भावाभिव्यक्ति ..........

amrendra "amar" Thu Jul 21, 04:01:00 pm  

waah kitni khubsurti se bayan ker diya apne apne jajbaton ko , accha hua jo nahi paki .pak jati to itni acchi rachna humekaha se milti.badhai.........

kumar Fri Jul 22, 09:13:00 pm  

aaj pahli bar pada aapko...
achha laga....
har ek post naayaab hai...

naya naya sadasya hun blog jagat men
mere blog par aapka swaagat hai...

ज्योति सिंह Sat Jul 23, 05:11:00 pm  

bas yahi kami to khal gayi ,bahut hi badhiya .

Ankit pandey Sat Jul 23, 10:05:00 pm  

सुन्दर भावाभिव्यक्ति , आभार

सुनीता शानू Sun Jul 24, 08:47:00 am  

आपकी पोस्ट की चर्चा कृपया यहाँ पढे नई पुरानी हलचल मेरा प्रथम प्रयास

Mrs. Asha Joglekar Sun Jul 24, 09:03:00 pm  

क्या बात है । केसरिया चावल भा गये मन को ।

ZEAL Mon Jul 25, 11:10:00 am  

Soul stirring creation ! Quite often we live with unfulfilled desires !

Pappu Parihar Mon Jul 25, 11:39:00 am  

बड़ी बेवकूफ थी, तुझसे प्यार कर बैठी,
तेरी बातों में आकर, इज़हार कर बैठी,
न पता था तेरा यूँ जाने का,
मुझे छोड़कर किसी और को अपनाने का,

somali Wed Jul 27, 05:15:00 pm  

bahut kam shabdo me bahut gehri baat keh di aapne ...

Mukesh Kumar Sinha Wed Jul 27, 08:51:00 pm  

di aapki har baat kuchh apni si lagti hai.......:)

Ankit pandey Thu Jul 28, 08:21:00 am  

सुन्दर भाव, सार्थक रचना, आभार.

nilesh mathur Thu Jul 28, 05:15:00 pm  

बहुत सुंदर।

Minakshi Pant Sat Jul 30, 12:03:00 am  

बहुत खूबसूरत दीदी :)

Varun Sat Jul 30, 12:08:00 am  

Sangeeta Ji, ye sundar rachna hai. Kya agli rachna aap ullas par likh sakti hain?

अशोक बजाज Sat Jul 30, 09:14:00 am  

आपको हरियाली अमावस्या की ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं .

कविता रावत Sun Jul 31, 09:57:00 am  

laghu rachna mein bahut badiya bimb prastut kiya hai aapne... bahut achhi lagi rachna..

रचना दीक्षित Sun Jul 31, 01:03:00 pm  

क्या संगीता दी इतना कुछ तो मिला है अब और क्या चाहिए ....हा हा हा ...
बहुत बढ़िया
"यहाँ तो दाना दाना खिल रहा है
शब्द दर शब्द सुगंध भर रहा है"

सतीश सक्सेना Sun Jul 31, 02:16:00 pm  

शायद अच्छे दिल वालों के साथ ऐसा ही होता है ...कष्ट मज़बूत लोगों को अधिक मिलते हैं ! शुभकामनायें !

मेरा साहित्य Sun Jul 31, 07:42:00 pm  

dar ko bhi aap bahut sunder bana deti hai .aapko sari kshanikayen bahut hi sunder hoti hai .ye bhi unhi uttam shreni me shamil hai
rachana

Dr.Bhawna Mon Aug 01, 07:40:00 am  

Bahut sundar bimb , bahut pasnd aayi bahut-bahut badhai..

योगेन्द्र मौदगिल Mon Aug 01, 04:32:00 pm  

bahut khoob........

main kai baar sochta hoon par aisa likh nahi paata...bus fir aapko pad leta hoon.... badhaiiiiiiii

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) Sun Aug 14, 01:21:00 pm  

भावनाओं की मिठास.
आज कल सब इसी के लिए तरसते हैं।

सादर

Reena Maurya Tue Nov 08, 10:23:00 pm  

sundar bhav
acchi rachana..

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