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सर्द मौसम ( हाईकू)

>> Friday, 20 January 2012



घना कोहरा 
धूप चांदनी लगे 
ढूंढें तपिश 




सर्द रात में 
फुटपाथ आबाद 
जिंदा हैं लाशें .

61 comments:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) Fri Jan 20, 07:06:00 pm  

गहरे अर्थ समेटे हाइकू ।


सादर

पी.सी.गोदियाल "परचेत" Fri Jan 20, 07:09:00 pm  

लाजबाब ! थोड़े से शब्दों ने बहुत कुछ कह दिया

प्रवीण पाण्डेय Fri Jan 20, 07:30:00 pm  

बदहाली के अध्याय कहती कुछ ही पंक्तियाँ

ऋता शेखर मधु Fri Jan 20, 07:35:00 pm  

गागर में सागर सी अभिव्यक्ति|

डॉ टी एस दराल Fri Jan 20, 07:48:00 pm  

बढियां है जी । चंद शब्दों में में बहुत कुछ कह दिया ।

रश्मि प्रभा... Fri Jan 20, 08:45:00 pm  

घना कोहरा
धूप चांदनी लगे
ढूंढें तपिश
...nanhe kadam ,poora aakash

kshama Fri Jan 20, 08:49:00 pm  

Bahut sundar...pahla haiku to gazab kaa hai!

ashish Fri Jan 20, 09:10:00 pm  

satik abhivyakti , prashanshniy bhav .

sushma 'आहुति' Fri Jan 20, 09:12:00 pm  

गहन अभिवयक्ति........

Vaanbhatt Fri Jan 20, 09:23:00 pm  

बातें हाइकू की
गहरीं गयीं
जडें हिल गयीं...

shikha varshney Fri Jan 20, 10:12:00 pm  

हाइकू में इतने कम शब्द होते हैं कि उसमें पूरी बात कह जाना बहुत स्किल का काम है..पर आपने बखूबी कर दिखाया.

vidya Fri Jan 20, 10:32:00 pm  

जाये ये सर्दी
मिले ज़रा राहत
जिंदा लाशों को...

बहुत खूब.....................
सादर.

dheerendra Fri Jan 20, 10:45:00 pm  

अच्छी प्रस्तुति,बहुत सुंदर हाइकू ,बेहतरीन पोस्ट....
new post...वाह रे मंहगाई...

sangita Sat Jan 21, 12:37:00 am  

आपकी पोस्ट पर टिपण्णी करना मेरे लिए असंभव है | सार्थकता तथा जीवन के अनछुए पहलू को उजागर करती हैं आपकी सभी रचनाएँ | टूटते-सितारों की उड़ान में भी आपकी रचनाएँ पढ़ीं बधाई आपको |

डॉ॰ मोनिका शर्मा Sat Jan 21, 02:23:00 am  

सुंदर अर्थपूर्ण हाइकु.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) Sat Jan 21, 05:55:00 am  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) Sat Jan 21, 09:09:00 am  

अति सुंदर
सर्दी भी है गर्मी भी
सर्द मौसम.

Amrita Tanmay Sat Jan 21, 10:01:00 am  

कुछ ही पंक्तियाँ..कितना कुछ कहती हुई..

सदा Sat Jan 21, 11:50:00 am  

वाह ...अनुपम भाव संयोजन ।

डा. अरुणा कपूर. Sat Jan 21, 01:31:00 pm  

उत्तम रचनाएँ...उत्तम प्रस्तुति!

कविता रावत Sat Jan 21, 02:11:00 pm  

Sard mausam ka maarmiktabhara sateek chitran..

इमरान अंसारी (عمران انصاری) Sat Jan 21, 02:18:00 pm  

सर्द रात में
फुटपाथ आबाद
जिंदा हैं लाशें .

.........हैट्स ऑफ इसके लिए|

sheetal Sat Jan 21, 03:23:00 pm  

Didi aapne bahut sundar likha hain.
kam shabd main sab kuch keh jaana koi aasan kaam nahi.

Maheshwari kaneri Sat Jan 21, 05:00:00 pm  

बहुत कुछ कहती कुछ ही पंक्ति..गहरे भाव..

Shanti Garg Sat Jan 21, 08:29:00 pm  

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

sushila Sat Jan 21, 10:22:00 pm  

"सर्द रात में
फुटपाथ आबाद
जिंदा हैं लाशें ."

इस हाइकू ने तो गहरे तक झिंझोड़ दिया।
बेहतरीन !

ajit gupta Sun Jan 22, 10:04:00 am  

बस दो ही? और लिखिए। अच्‍छे हैं।

यशवन्त माथुर (Yashwant R B Mathur) Sun Jan 22, 01:43:00 pm  

कल 23/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

वन्दना Sun Jan 22, 03:17:00 pm  

घना कोहरा
धूप चांदनी लगे
ढूंढें तपिश

सर्द रात में
फुटपाथ आबाद
जिंदा हैं लाशें

ज़िन्दगी का यथार्थ हैं ये दोनो हाइकू…………कम लफ़्ज़ों मे गहरी बात कह देना ही तो आपकी खासियत है फिर चाहे कविता हो या अब ये नयी विधा हाइकू………दोनो गज़ब हैं।

मनोज कुमार Mon Jan 23, 12:19:00 am  

कम शब्दों में बड़ी मारक बातें कही है आपने।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') Mon Jan 23, 09:32:00 am  

शानदार हाईकू दी...
सादर.

Dr.Nidhi Tandon Mon Jan 23, 09:48:00 am  

गहनाभिव्यक्ति !!

अरुण चन्द्र रॉय Mon Jan 23, 11:54:00 am  

छोटी कविता बड़े भाव ..आपका ब्रांड बन चुका है...

Patali-The-Village Mon Jan 23, 04:49:00 pm  

लाजबाब| थोड़े से शब्दों ने बहुत कुछ कह दिया|
धन्यवाद।

दिगम्बर नासवा Mon Jan 23, 06:05:00 pm  

इन छोटे शब्दों में कितनी गहरी बात कह दी ... ये अंदाज़ है हाइकू कहने का ... बधाई ...

Pallavi Mon Jan 23, 07:35:00 pm  

आप इतने कम शब्दों में कविता कि पूरी खूबसूरती रखते हुए कैसे पूरी बात कह लेती है :)

Kunwar Kusumesh Tue Jan 24, 09:03:00 am  

अच्छे हाइकु
बधाई संगीता जी
मज़ा आ गया

Ravinderkumar Tue Jan 24, 03:24:00 pm  

बहुत खूब ! जारी रखें .

Bharat Bhushan Tue Jan 24, 08:42:00 pm  

सुंदर सृजन.

डॉ. जेन्नी शबनम Tue Jan 24, 09:55:00 pm  

दोनों हाइकु बहुत कमाल...

सर्द रात में
फुटपाथ आबाद
जिंदा हैं लाशें .

भावपूर्ण हाइकु के लिए बधाई संगीता जी. स्नेह और सहयोग के लिए ह्रदय से आभार.

Urmi Wed Jan 25, 11:16:00 am  

बहुत सुन्दर हाइकु लिखा है आपने! गहरे भाव और सुन्दर चित्र के साथ उम्दा प्रस्तुती!

minoo bhagia Wed Jan 25, 01:07:00 pm  

haaiku kya hota hai pata nahin , par dhoondhein tapish ki baat sach hai ,

कुमार राधारमण Wed Jan 25, 01:11:00 pm  

अच्छा है। हिंदी की प्रकृति और अपने शब्द-सामर्थ्य के हिसाब से,शब्दों का अनुपात नए सिरे से भी निर्धारित किया जा सकता है।

dheerendra Thu Jan 26, 04:15:00 pm  

बहुत सुंदर भावपूर्ण अच्छी रचना,..
WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....

सतीश सक्सेना Fri Jan 27, 08:06:00 pm  

वाकई धूप की बड़ी मांग है....
शुभकामनायें आपको !

Surendra shukla" Bhramar"5 Fri Jan 27, 08:09:00 pm  

आदरणीया संगीता जी गणतंत्र दिवस की बधाई ...इ छोटी सी रचना कितना कुछ कह गयी देश का जिम्मा जिन पर है जो इतना हांकते हैं उन्हें तमाचा मार गयी
जय हिंद
भ्रमर ५

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