copyright. Powered by Blogger.

तल्ख स्मृतियाँ ( हाइकु )

>> Tuesday, 14 May 2013



कड़वी यादें 
  चीर देती हैं  सीना 
     मैं हुयी मौन  ।

************

पीड़ित यादें 
  झटक ही तो दीं थीं
    पीले पत्ते सी । 

******************

विष से बुझा 
  याद है  व्यंग्य  बाण
     मरा मेरा   'मैं' ।

*****************

तल्ख स्मृतियाँ 
   जेहन में घूमतीं 
      चैन न आए । 

*****************

खुद से जंग 
  जंगरहित यादें 
     निज़ात नहीं .... 

***************


42 comments:

डॉ टी एस दराल Tue May 14, 02:14:00 pm  

स्मृतियों पर सुन्दर हाइकु।

Aruna Kapoor Tue May 14, 02:36:00 pm  

...सभी हाइकू सुन्दर और अर्थपूर्ण!

Dr.NISHA MAHARANA Tue May 14, 02:55:00 pm  

sabhi acche hain .....arthpurn ....

sadhana vaid Tue May 14, 03:29:00 pm  

सार्थक सृजन संगीता जी ! सभी एक से बढ़ कर एक ! बहुत सुंदर !

shikha varshney Tue May 14, 03:37:00 pm  

विष से बुझा
याद है व्यंग्य बाण
मरा मेरा 'मैं' ।
सुपर्ब ..
ये तल्ख़ यादें चैन कहाँ लेने देती हैं.कचोटती रहती हैं हर दम.

रेखा श्रीवास्तव Tue May 14, 03:41:00 pm  

बहुत अर्थपूर्ण एवं मर्मस्पर्शी हाइकू .

Rajendra Kumar Tue May 14, 04:46:00 pm  

बहुत ही बेहतरीन सार्थक सृजन,आभार.

vibha rani Shrivastava Tue May 14, 04:48:00 pm  

व्याकुल हाइकु
दिल को छूती
सादर

डॉ. मोनिका शर्मा Tue May 14, 07:48:00 pm  

तल्ख स्मृतियाँ
जेहन में घूमतीं
चैन न आए ।

बहुत सटीक और मन को छूने वाले हाइकु

रश्मि प्रभा... Tue May 14, 07:56:00 pm  

खुद से जंग
जंगरहित यादें
निज़ात नहीं .... कभी नहीं मिलती निजात -

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) Tue May 14, 07:59:00 pm  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (15-05-2013) के "आपके् लिंक आपके शब्द..." (चर्चा मंच-1245) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

expression Tue May 14, 08:06:00 pm  

बहुत सुन्दर!!!
चंद शब्दों में हाले दिल बयां हुआ....

सादर
अनु

ताऊ रामपुरिया Tue May 14, 08:10:00 pm  

मन की व्यथा को बहुत ही सटीकता से प्रकट करते हाइकू.

रामराम.

Maheshwari kaneri Tue May 14, 10:39:00 pm  

स्मृतियों का सुन्दर जंजाल....

वाणी गीत Wed May 15, 06:19:00 am  

खुद से जंग ..जंग रहित यादें ...
मुमकिन नहीं !
बहुत खूब सारी की सारी !

smt. Ajit Gupta Wed May 15, 10:34:00 am  

यह हाइकु की कला आपसे सीखनी पड़ेगी। मेरे पास भी एक आर्डर आया है लेकिन उसे मैं पूरा नहीं कर पा रही हूं।

vandana gupta Wed May 15, 11:42:00 am  

उफ़ एक से बढकर एक हाइकू गागर मे सागर भरते

रचना दीक्षित Wed May 15, 05:00:00 pm  

तल्ख़ स्मृतियों को शमित करना आवश्यक है वर्ना अशांति के सिवा कुछ नहीं. भावपूर्ण हायकू निहित संदेश देने में सक्षम.

NAVIN C. CHATURVEDI Wed May 15, 07:32:00 pm  

दीदी प्रणाम। आज आप के ब्लौग्स का आनंद लिया। मन प्रसन्न हुआ। इस विलक्षण हाइकु के लिए आप को सादर प्रणाम

खुद से जंग
जंगरहित यादें
निज़ात नहीं ....

Kailash Sharma Wed May 15, 08:13:00 pm  

बहुत सुन्दर...सभी हाइकु दिल को छू जाते हैं...

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) Thu May 16, 08:42:00 am  

बिखरे मोती
मन की गगरिया
कौन समेटे.

"मैं" मृतप्राय
अनंत अंतरिक्ष
नन्हा सा नीड़.

हीरे की कनी
जगमग स्मृतियाँ
रक्त-रंजित.

एक प्रयास
सफल - असफल
कौन विचारे.

सदा Thu May 16, 11:17:00 am  

तल्ख स्मृतियाँ
जेहन में घूमतीं
चैन न आए ।
स्‍मृतियाँ तल्‍ख हों तो चैन नहीं आता ... सच
मन को छूते भाव
सादर

रचना दीक्षित Thu May 16, 02:03:00 pm  

संगीता दी मेरा कमेन्ट गायब हो चूका है लगता.

Pallavi saxena Thu May 16, 02:20:00 pm  

सच है ऐसी ही तो होती है हर जीवन की कुछ कड़वी स्मृतियाँ...

Anita (अनिता) Thu May 16, 09:41:00 pm  

बहुत गहन, अर्थपूर्ण, भावपूर्ण हाइकु दीदी!
~सादर!!!

मनोज कुमार Sat May 18, 12:08:00 am  

सुन्दर हाइकु।

दिगम्बर नासवा Mon May 20, 11:47:00 am  

विष से बुझा
याद है व्यंग्य बाण
मरा मेरा 'मैं' ...

बहुत गहरी ...
कर हाइकू स्मृति के कुछ नए दृष्टिकोण को ले के लिखा है ... लाजवाब ...

sheetal Mon May 20, 01:07:00 pm  

bahut acchi...sabhi haiku dil ko chuti hui.

Suman Tue May 21, 01:22:00 pm  

सभी हाइकू सुन्दर ....

आशा बिष्ट Mon May 27, 08:57:00 am  

उफ़।।।
पर सुन्दर।।

Kunwar Kusumesh Wed May 29, 01:23:00 pm  

सुन्दर हाइकू

डॉ. जेन्नी शबनम Fri May 31, 06:49:00 pm  

बेहतरीन हाइकु, बधाई.

आशा जोगळेकर Wed Jun 05, 03:42:00 am  

प्यारे प्यारे हाइकू
बिखरे मोती से
चमकते सितारे ।

शिवनाथ कुमार Wed Jun 05, 09:33:00 pm  

हर हाईकू तल्ख़ स्मृतियाँ लिए हुए
सादर !

jyoti khare Thu Jun 06, 12:11:00 am  

गहन अनुभूति
उत्कृष्ट प्रस्तुति
सादर

Rajput Sat Jun 08, 08:30:00 am  

बहुत अर्थपूर्ण हाइकू

jyoti khare Sat Jun 15, 11:00:00 pm  

स्मृतियों के केंद्र में सुंदर हाइकू
सुंदर अनुभूति
बेहतरीन प्रस्तुति
सादर

VenuS "ज़ोया" Fri Dec 13, 05:19:00 pm  

तल्ख स्मृतियाँ
जेहन में घूमतीं
चैन न आए ।


hmmmmm..........haan di...sch..smritoun se pichaa shudaana bilkul vaisa he jaise hwaaa kokhud se alag krna...hum chahe na chahe...wo hmeshaa ird girf ghumti rehati hain.......aur jab unka zor bdhtaa he...jhtkaa jaati hain hume...............sabhii haiku...pdeh..mzaa aa gya..bahut achee hain sab

About This Blog

Labels

Lorem Ipsum

ब्लॉग प्रहरी

ब्लॉग परिवार

Blog parivaar

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

लालित्य

  © Free Blogger Templates Wild Birds by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP