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बरस ही गए बादल

>> Thursday, 11 November 2010





बादल....और आसमां    से  आगे की कड़ी .....





सबने कहा था कि-
बादल बरस ही जायेंगे 
देर - सबेर, 

कल हुयी थी 
बारिश  मूसलाधार, 

आज हल्की सी 
धूप निखर आई है, 

बस ज़रा आँखों में 
सुर्खी उतर आई है ...


.

64 comments:

sheetal Thu Nov 11, 05:21:00 pm  

baras hi gaye badal,
fir suhani dhup khili hain,
aankho ki ye surkhi bhi dhere -dhere utar jaayegi.
fir chehre par chit-parichit muskaan laut aayegi.

Navin C. Chaturvedi Thu Nov 11, 05:33:00 pm  

सुंदर संगीता स्वरूप जी| आँखों में सुर्खी उतर आई है| बहुत खूब| हमारे ब्लॉग पर भी पधारें http://thalebaithe.blogspot.com

ajit gupta Thu Nov 11, 05:39:00 pm  

चलिए बरसात हुई और आँखों में रंगों के इन्‍द्रधनुष उतर आए। अब मौसम साफ हो गया होगा?

विरेन्द्र सिंह चौहान Thu Nov 11, 05:58:00 pm  

बहुत बढ़िया प्रस्तुति .

अरुण चन्द्र रॉय Thu Nov 11, 06:01:00 pm  

बहुत सुन्दर... आँखों में सुर्खी का उतरना अच्छा लगा.

क्षितिजा .... Thu Nov 11, 06:18:00 pm  

धीरे धीरे सुर्खी भी चली जाएगी ... बहुत सुंदर संगीता जी ...

shikha varshney Thu Nov 11, 06:24:00 pm  

:) देखा कितना असर होता है लोगों के कहने का :)अब देखिये कैसे सतरंगी रंग फैलेंगे :)
सुन्दर पंक्तियाँ दी!

डॉ टी एस दराल Thu Nov 11, 06:33:00 pm  

सुर्खी भी चली जाएगी । हर रात के बाद दिन भी आता है ।

anita saxena Thu Nov 11, 06:47:00 pm  

बस जरा आंखों में
सुर्खी सी उतर आई है ....
वाह क्या सुंदर बात कही है , मन की गहराइयों तक उतर गई ।

दीप्ति शर्मा Thu Nov 11, 07:26:00 pm  

bahut khub

aap to hamare blog ko bhul hi gye
kabhi samay nikal kal aaye
mujhe achha lagega

केवल राम Thu Nov 11, 07:38:00 pm  

बादलों ने तो बरसना ही था , ....क्यूँकि समय सदा एक सा नहीं रहता, परिवर्तन प्रकृति का नियम है ..सुंदर भाव

M VERMA Thu Nov 11, 07:57:00 pm  

बादलों के बरसने के बाद सुर्खी लाज़िमी है.
सुन्दर रचना

धर्म सिंह ( इक अजनबी ) Thu Nov 11, 07:59:00 pm  

दी नमस्ते
बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ...
दिल को छू गयी...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) Thu Nov 11, 08:00:00 pm  

गहरे अर्थ लिए हुए,
भावप्रणव रचना!

kshama Thu Nov 11, 08:11:00 pm  

आज हल्की सी
धूप निखर आई है,

बस ज़रा आँखों में
सुर्खी उतर आई है ...

Kya gazab kaa likha hai!

ज्योति सिंह Thu Nov 11, 08:12:00 pm  

आज हल्की सी
धूप निखर आई है,

बस ज़रा आँखों में
सुर्खी उतर आई है
bahut hi khoob .

ashish Thu Nov 11, 08:19:00 pm  

चलिए बादल बरसे तो ,सुर्खियों का क्या , वो बादलों की तरह ज्यादा वक़्त नहीं लेगी . जल्दी ही विलुप्त हो जाएगी ,

बूझो तो जानें Thu Nov 11, 08:56:00 pm  

बहुत ही सुन्दर पंक्तिया.

उपेन्द्र Thu Nov 11, 09:09:00 pm  

इस छोटी सी कविता मे काफी गहरे भाव है .....

डॉ॰ मोनिका शर्मा Thu Nov 11, 09:14:00 pm  

बहुत सुन्दर पंक्तिया....

सुमन'मीत' Thu Nov 11, 09:18:00 pm  

इतने कम शब्दों में बहुत कुछ डाला आपने.............

Dr. Ashok palmist blog Thu Nov 11, 10:21:00 pm  

लाजबाव पँक्तियाँ, गहरे भाव तथा शब्दोँ के बहतरीन चुनाव के लिए बहुत- बहुत आभार।

अनामिका की सदायें ...... Thu Nov 11, 10:26:00 pm  

हर दिन एक सामान नहीं रहते..सुर्खी भी उतर जायेगी...आप हमेशा हँसती मुस्कुराती रहें यही दुआ है.

रानीविशाल Thu Nov 11, 10:29:00 pm  

वाह ! बेहतरीन पंक्तियाँ ...

Shah Nawaz Thu Nov 11, 10:43:00 pm  

सबने कहा था कि-
बादल बरस ही जायेंगे
देर - सबेर,

कल हुयी थी
बारिश मूसलाधार,

आज हल्की सी
धूप निखर आई है,

बस ज़रा आँखों में
सुर्खी उतर आई है ...



बेहतरीन......






प्रेमरस.कॉम

Amrita Tanmay Thu Nov 11, 11:32:00 pm  

और सुर्खी न जाने क्या- क्या बयां कर गयी ......... सुन्दर रचना .

मनोज कुमार Fri Nov 12, 05:06:00 am  

ये बादल रुलाते क्यों हैं?
नीर भरी दुख की बदरी ,,,,

रश्मि प्रभा... Fri Nov 12, 07:07:00 am  

khuda ka karishma aankhon ki surkhi bana
chalo baarish to hui
nishchesht patte dhule to

saanjh Fri Nov 12, 10:29:00 am  

kyun...ho gaya na !!

hihihiihihhihi....... :P :D

chalo badhiya hai...ab aap smile karo...
:):):):):):):):):):):)

एस.एम.मासूम Fri Nov 12, 12:32:00 pm  

आज हल्की सी
धूप निखर आई है,
अच्छा लगा

Shekhar Suman Fri Nov 12, 01:03:00 pm  

बहुत ही ख़ूबसूरत गीत,,...

आपका लेखन काफी सराहनीय है | यूँ ही लिखती रहें | मेरे ब्लॉग में इस बार आशा जोगलेकर जी की रचना |
सुनहरी यादें :-4 ...

rashmi ravija Fri Nov 12, 01:25:00 pm  

सुन्दर अभिव्यक्ति.....सुर्खी की परवाह किए बिना.....मुसलाधार बारिश हो जाए, यही अच्छा

रचना दीक्षित Fri Nov 12, 06:01:00 pm  

ये भी सच है. बादल हैं तो बरेंगे और बरसेंगे तो सुर्खी भी होगी पर सुर्खी जाने के बाद ही तो सुहाना मौसम फिर आता है.

Dorothy Fri Nov 12, 08:07:00 pm  

बादल बरसने के बाद मौसम का बदलना प्रकृति का नियम है. घनी उदासी के बादल बरसते हैं, तो मन के सरोवर में इंद्रधनुषी कमल खिलते हैं. खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार
सादर,
डोरोथी.

lokendra singh rajput Sat Nov 13, 02:25:00 am  

बहुत सुन्दर पंक्तिया....

डा. अरुणा कपूर. Sat Nov 13, 02:30:00 pm  

are wah!....to ham ne thhik hi kaha thaa!...sundar!

निर्मला कपिला Sat Nov 13, 07:27:00 pm  

उमदा रचना। लेकिन दो किश्तों मे क्यों लिखी? ये समझ नही आया।

दिगम्बर नासवा Sun Nov 14, 03:04:00 pm  

ये सुर्खी भी हवा उड़ा ले जायगी ... फिर सपने दे जायगी ये बारिश ....

Kajal Kumar Sun Nov 14, 06:20:00 pm  

वाह बहुत सुंदर

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" Mon Nov 15, 07:37:00 am  

बहुत सुन्दर ! बारिश के बाद धुप खिलना ज़रूरी है !

deepak saini Mon Nov 15, 02:21:00 pm  

धूप निकल गयी है तो आंखो की नमी भी सूख जायेगी
बहुत सुन्दर, प्रेरणादयक कविता

muskan Mon Nov 15, 03:29:00 pm  

बहुत सुन्दर...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ Mon Nov 15, 05:16:00 pm  

संगीता जी, कैसे भर देती हैं शब्‍द रूपी गागर में भाव रूपी सागर। बहुत सुंदर।

---------
जानिए गायब होने का सूत्र।
….ये है तस्‍लीम की 100वीं पहेली।

Akanksha~आकांक्षा Mon Nov 15, 05:20:00 pm  

बहुत खूबसूरती से लिखा आपने...बधाई.


_________________
'शब्द-शिखर' पर पढ़िए भारत की प्रथम महिला बैरिस्टर के बारे में...

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι Mon Nov 15, 10:33:00 pm  

कल हुई थी हल्की बारिश , आज धूप निखर आई है।

बहुत ही मनभावन और मुलायम रूह वाली रचना। आपकी जी की जितनी भी तारीफ़ की जाये कम है।

Manish Tue Nov 16, 12:00:00 pm  

क्या बात है, बादलों पर रिसर्च चल रही है.. :P
इधर तो सिर पे ओले पड़ रहे हैं

कविता रावत Tue Nov 16, 05:15:00 pm  

आज हल्की सी
धूप निखर आई है,
बस ज़रा आँखों में
सुर्खी उतर आई है ...
..bahut sundar marmsparshi rachna...

देवेन्द्र पाण्डेय Wed Nov 17, 08:27:00 pm  

..वाह..अभी लगता है कई रंग दिखाएंगे बादल।

Parul Thu Nov 18, 03:47:00 pm  

hamesha ki tarah....man ko bhayi hai :)

narayani singh Mon Dec 13, 12:03:00 am  

Sangeeta Di,
Your imagination is at heights.The picture posted is touching.I can't see the tears in anybodies eyes. I simply hate them and have tried to wipe them from the eyes of my small students.

Thanks for guiding me to save the changes on my blog pages. I am feeling proud to connect with you.
Thank you very much.
Regards.

***Punam*** Tue Dec 28, 09:41:00 am  

कई बार आँखों की सुर्खी भी न जाने कितनी बारिशें ले आती है....बस भीगते केवल हम हैं.....संगीता जी आपकी हर कविता मुझको अपने भीतर नया विचार,नया एहसास सा दिला जाती है..इतना अच्छा लिखने के लिए धन्यवाद..

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