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बाढ़ का कहर

>> Sunday, 13 March 2011






सजा तो लिए थे 

मैंने पलकों पर 

फिर से 

मना कर 

रूठे हुए ख्वाब 


पर आज 

इतनी बारिश हुयी 

कि सारे ख्वाब 

बाढ़ में बह गए .......


.

79 comments:

वन्दना Sun Mar 13, 12:51:00 pm  

कभी कभी ख्वाब यूं ही चकनाचूर होते हैं………॥सुन्दर भावाव्यक्ति।

Sadhana Vaid Sun Mar 13, 01:01:00 pm  

शायद ख़्वाबों के नसीब में यही लिखा होता है या तो पलकों से गिर कर चकनाचूर हो जायें या आँसुओं की बाढ़ में बह जायें ! बहुत ही मर्मस्पर्शी और भावुकता से परिपूर्ण सुन्दर रचना ! आभार !

डॉ टी एस दराल Sun Mar 13, 01:03:00 pm  

ये बारिस भी कभी कभी बेमौसम हो जाती है ।
और सुनामी आ जाता है ,भावनाओं का ।

सुन्दर रचना संगीता जी ।

पी.सी.गोदियाल "परचेत" Sun Mar 13, 01:15:00 pm  

पर आज


इतनी बारिश हुयी


कि सारे ख्वाब


बाढ़ में बह गए .......

Bahut laajabab panktiyaan hai Sangeeta ji.

aur main bas tinka-tinkaa bahtaa dekhta rah gayaa.........

Er. सत्यम शिवम Sun Mar 13, 01:40:00 pm  

अक्सर बिखर जाते है ख्वाब आँसूओं की बाढ़ में....बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

Kailash C Sharma Sun Mar 13, 01:40:00 pm  

बहुत मार्मिक सुन्दर रचना..कितना दुःख होता है जब ख्वाब बाढ में बह जाते हैं..आभार

nilesh mathur Sun Mar 13, 02:00:00 pm  

बहुत ही कम शब्दों में गहरी बात! बेहतरीन अभिव्यक्ति!

Dr Varsha Singh Sun Mar 13, 02:46:00 pm  

आज
इतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए .......

बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए बधाई।

Ravi Rajbhar Sun Mar 13, 02:56:00 pm  

Sach me khwab ....aise hi bah jate hain.

प्रवीण पाण्डेय Sun Mar 13, 03:27:00 pm  

भावपूर्ण, प्रवाहमयी।

vijaymaudgill Sun Mar 13, 03:37:00 pm  

kam shabdo main gehri baat
bahut khoob

kshama Sun Mar 13, 03:45:00 pm  

Kewal do stanza aur kitna kuchh kah diya!Sach! Kya kuchh nahee bah jata aansunon kee baadh me!

राज भाटिय़ा Sun Mar 13, 03:59:00 pm  

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति संगीता जी, धन्यवाद

पद्म सिंह Sun Mar 13, 04:21:00 pm  

सुंदर अभिव्यक्ति !

via-http://www.blogprahari.com

sandhya Sun Mar 13, 04:47:00 pm  

बेहतरीन भावपूर्ण रचना......

ताऊ रामपुरिया Sun Mar 13, 04:59:00 pm  

अत्यंत मर्मस्पर्षी भाव.

रामराम.

रचना दीक्षित Sun Mar 13, 05:06:00 pm  

गहरी मर्मस्पर्शी रचना, बहुत बधाई संगीता जी.

क्षितिजा .... Sun Mar 13, 05:23:00 pm  

गहरे भाव लिए रचना संगीता जी ... बहुत खूब ..

रश्मि प्रभा... Sun Mar 13, 06:52:00 pm  

itna manaker rakha tha khwaab ... bah gaye ... sangeeta ji kya kahun , bas doobi hun us bahaw me

mridula pradhan Sun Mar 13, 07:02:00 pm  

कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए .......choti si kavita men kini bari baat rakh di hai...wah.

अनामिका की सदायें ...... Sun Mar 13, 07:32:00 pm  

itni barish na laao ki baadh aa jaye waise hi aajkal is baadh ka bahut kahuf hai har jagah.

ashish Sun Mar 13, 07:45:00 pm  

कम लब्जों में प्रभाव छोड़ती कविता . हम भी बह लिए भावों के लहर में .

Deepak Saini Sun Mar 13, 07:48:00 pm  

gagar me sagar
behtreen bhawpurn kavita

Deepak Saini Sun Mar 13, 07:48:00 pm  

gagar me sagar
behtreen bhawpurn kavita

मनोज कुमार Sun Mar 13, 07:58:00 pm  

इस बाढ को रोकने का तरीक़ा भी कावियों को ढूंढना चाहिए। फिलहाल तो यही कहूंगा,

अब तो अक्सर नज़र आ जाता है दिल आंखों में
मैं न कहता था कि पानी है दबाए रखिए
कौन जाने कि वो कब राह इधर भूल पड़े
अपनी उम्मीद की शम्‍ओं को जलाए रखिए

Dr. Ashok palmist blog Sun Mar 13, 08:18:00 pm  

ख्याबोँ को भी संभालना होगा ,
बाढ़ोँ से बचाना होगा । क्योँकि ये बहुत कीमती होते हैँ । बहुत ही खूबसूरत नज्म है । आभार संगीता दी ।

प्रतिभा सक्सेना Sun Mar 13, 08:54:00 pm  

ख़्वाबों को बचाना बहुत मुश्किल होता है !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) Sun Mar 13, 08:54:00 pm  

भावनाओं की बरसात का सुन्दर चित्रण किया है आपने इस रचना में!

रेखा श्रीवास्तव Sun Mar 13, 09:23:00 pm  

khvaab to khvaab hai kab pure hote hain tabhi to aansuon ke pravah men bah jate hain.

bahut sundar bhav.

daanish Sun Mar 13, 09:39:00 pm  

ऐसी बाढ़ की ज़द में तो जाने
कई कई खूबसूरत ख़्वाब ग़र्क हो गए ...
कम शब्दों में
बहुत गहरी बात ...
अच्छी रचना .

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι Sun Mar 13, 09:43:00 pm  

बेहतरीन कविता, वैसे ख़्वाब बिना बाढ के भी बह जाते हैं अक्सर।।

Dr (Miss) Sharad Singh Sun Mar 13, 10:30:00 pm  

पर आज
इतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए .......


अंतस को झकझोरती हुई रचना...

Vaanbhatt Sun Mar 13, 10:57:00 pm  

man ke samunder main sunami ayegi to badh ka to aana to tai hai...sapnon ke mahal ka ye hashra hona hi tha...sunami ke aage T zaroor lagalijiyega...

lokendra singh rajput Mon Mar 14, 12:17:00 am  

संवेदनशील रचना संगीता जी।

: केवल राम : Mon Mar 14, 06:18:00 am  

जिन्दगी में यह ख्बाब कभी बनते हैं तो कभी बिगड़ते है ..यह सिलसिला अनवरत यूँ ही चलते रहता है

दर्शन कौर धनोए Mon Mar 14, 09:20:00 am  

बहुत सुंदर रचना !

' याद कुछ ऐसी आई आखो से रोया न गया
जख्म कुछ ऐसे छिले फूलो पे सोया न गया '

रानीविशाल Mon Mar 14, 09:58:00 am  

हृदयस्पर्शी प्रस्तुति ....आभार

ajit gupta Mon Mar 14, 10:45:00 am  

गनीमत है कि सुनामी नहीं आयी नहीं तो साथ में कितनों के ख्‍वाब बह जाते।

धीरेन्द्र सिंह Mon Mar 14, 11:30:00 am  

ख्वाबों को मेहनत से सजाया जाता है परन्तु कभी-कभी ऐसी बारिश में ख्वाब बह जाते हैं फिर वाष्पीकृत होकर बादल बनते हैं फिर ख्वाब बनता है और फिर कुछ पूरे होते हैं और कुछ रह जाते हैं। जीवन की मृगमरीचिका को दर्शाती एक सुंदर,नैनो रचना.

Rahul Mon Mar 14, 11:57:00 am  

पर आज


इतनी बारिश हुयी


कि सारे ख्वाब


बाढ़ में बह गए ....

bhavuk rachna....

Mukesh Kumar Sinha Mon Mar 14, 12:53:00 pm  

sapne tutte dekhe the...ab baddh me bahte dekh liya..!!

bahut jayda bhaw-prawan rachna..!

पी.एस .भाकुनी Mon Mar 14, 02:22:00 pm  

बहुत ही मर्मस्पर्शी और भावुकता से परिपूर्ण सुन्दर रचना ! आभार !

इमरान अंसारी Mon Mar 14, 02:39:00 pm  

संगीता जी,

आज बहुत दिनों बाद आपकी कोई पोस्ट पड़ने को मिली.....आपकी खूबी है कम शब्दों में बात को कह जाना.......बहुत खूबसूरत लगी ये पोस्ट...प्रशंसनीय|

सुशील बाकलीवाल Mon Mar 14, 03:25:00 pm  

उत्तम भावाभिव्यक्ति...

सदा Mon Mar 14, 03:47:00 pm  

आज
इतनी बारिश हुयी
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए .......

बह‍ुत खूब ...बेहतरीन ।।

दिगम्बर नासवा Mon Mar 14, 05:04:00 pm  

बहुत खूब ... निःशब्द इन चंद शब्दों पर ...

सम्वेदना के स्वर Mon Mar 14, 06:16:00 pm  

यादों की बारिश ऐसे ही सैलाब लाती है! बहुत सुंदर नज़्म संगीता दी!!

हरकीरत ' हीर' Mon Mar 14, 07:55:00 pm  

सुभानाल्लाह ...!
इस बाढ़ से तो नज़रें ही नहीं हटतीं ......

सुमन'मीत' Mon Mar 14, 09:34:00 pm  

kam shabdon me bahut kuchh kah jati hain aap...

सुमन'मीत' Mon Mar 14, 09:35:00 pm  

kam shabdon me bahut kuchh kah jati hain aap...

Mrs. Asha Joglekar Tue Mar 15, 11:51:00 am  

वाह वाह ।
कभी कभी ख्वाब आंसूओं में बह ही जाते हैं ।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " Tue Mar 15, 01:16:00 pm  

'पर आज
इतनी बारिस हुई
कि सारे ख्वाब
बाढ़ में बह गए '
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

सुनील गज्जाणी Tue Mar 15, 04:36:00 pm  

नमस्कार
बहुत ही कम शब्दों में गहरी बात! बेहतरीन अभिव्यक्ति!
साधुवाद !

आचार्य परशुराम राय Tue Mar 15, 08:08:00 pm  

धुलते रहे ख्वाब
आँसुओं से
पर क्या करूँ
सपनों का पनपना
रुक न पाया।
शायद
संजीवनी दे गया कोई।

अच्छी कविता। आभार।

Ajayendra Rajan Tue Mar 15, 08:18:00 pm  

कभी बाढ़, तो कभी आंसू का बहाना बना लेते हैं
बेदर्दों को बस मौका चाहिए रुखसती का

"पलाश" Tue Mar 15, 10:26:00 pm  

आप हमेशा ही कम शब्दों मे बहतु गहरी बात कह देती है
जो बस सीधे दिल पर असर करती है

Khare A Wed Mar 16, 03:42:00 pm  

kya baat he, kehna padega!


aap dhire se gambhir bat keh jati hain!

bas kammal karti hain di!

लक्ष्‍मीकांत त्रिपाठी Wed Mar 16, 08:27:00 pm  

aaj aapka blog dekha, bahut achha laga. kavitaen dil ko chhoo gain.akathniy! laxmi Kant.

Kunwar Kusumesh Thu Mar 17, 03:42:00 pm  

पर आज

इतनी बारिश हुयी

कि सारे ख्वाब

बाढ़ में बह गए ..


वाह वाह वाह वाह .

सपने भी गज़ब के थे ,बारिश भी गज़ब की थी.
बहते हुए ख्वाबों की ख्वाहिश भी गज़ब की थी.

shikha varshney Thu Mar 17, 11:35:00 pm  

इस बेमौसम बरसात से तो हम भी बहुत परेशां हैं.
पर आपके भावों की बाढ़ में मन बह ही गया ..बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं.

muskan Fri Mar 18, 10:28:00 am  

आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!

ZEAL Fri Mar 18, 01:02:00 pm  

khwaabon ki baadh ...mazedaar lagi .

डा. अरुणा कपूर. Mon Mar 21, 04:24:00 pm  

अति सुन्दर भावोक्ति ..मानो अन्तरात्मा से निकली आवाज!

amrendra "amar" Thu Mar 24, 01:56:00 pm  

gagar me sagar bhar diya hai aapne

वन्दना महतो ! (Bandana Mahto) Fri Apr 01, 06:56:00 pm  

जिंदगी ऐसी ही होती है. हम तो सिर्फ कोशिश कर सकते है. आगे खवाब कि किस्मत में देखे क्या लिखा है? पूरा होना या बह जाना?

Amrita Tanmay Sat Apr 09, 08:53:00 pm  

बहुत खूब..बहुत सुन्दर पंक्तियाँ..आभार।

venus****"ज़ोया" Sun Apr 24, 01:21:00 am  

Sangeeta dii....aaj tassli se aapkaa blog praaa............ruh ko swaad aa gyaa aaj...thanx a lot for aal of yr work
take care

Surendrashukla" Bhramar" Sun May 01, 11:07:00 pm  

आदरणीया संगीता जी नमस्कार ऐसे ही होती है जिन्दगी इसके अनोखे रंग कब क्या बिखर जाये क्या बन जाये पता नहीं रूठने मनाने का ये सिलसिला ये आंधी तूफान कुछ भी कहर बरपा जाते हैं
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

Sachin Malhotra Mon Jun 06, 01:58:00 pm  

बहुत खूबसूरत !
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - स्त्री अज्ञानी ?

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