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हसरत ...

>> Sunday, 27 March 2011




एक वक्त था 
कि 
छाये रहते थे 
मेघ नेह के 
इन आँखों में , 
आज 
पसर गया है 
एक रेगिस्तान 
और 
तरस गयीं हैं 
ये आँखें 
एक बूँद 
नमी के लिए .

73 comments:

वन्दना Sun Mar 27, 03:22:00 pm  

हसरतों को मुकाम कब मिले हैं वक्त सब चुरा ले जाता है………बहुत सुन्दर गहरे भाव भरे हैं।

वन्दना Sun Mar 27, 03:46:00 pm  

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (28-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

संध्या शर्मा Sun Mar 27, 03:56:00 pm  

एक वक्त था
कि
छाये रहते थे
मेघ नेह के
इन आँखों में ,
आज
पसर गया है
एक रेगिस्तान

ये वक़्त है, न जाने कल कैसा हो...
बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति...

baabusha Sun Mar 27, 03:57:00 pm  

तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए .

sach baat hai ! kabhi aisa bhi ho jaata hai..! Touching !

रश्मि प्रभा... Sun Mar 27, 04:10:00 pm  

dil chahta hai ek tukda baadal aankhon me utar aaye

Sadhana Vaid Sun Mar 27, 04:21:00 pm  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ! आँखों के रेगिस्तान पसर कर मन मस्तिष्क तक छा जाते हैं ! शुष्कता की दरारें ऐसी भयावह स्थिति पैदा कर दें इससे पहले ही इनकी तराई कर लीजिये ! कल्पना के विस्तार के नये आयाम खोलती एक बहुत खूबसूरत रचना ! बधाई स्वीकार करें !

प्रवीण पाण्डेय Sun Mar 27, 04:33:00 pm  

पसरा रेगिस्तान,
जीवन का व्यवधान।

Er. सत्यम शिवम Sun Mar 27, 04:54:00 pm  

हसरते कहाँ होती है पूरी..समय के साथ सब कुछ बदल जाता है..वो कल का सवेरा और ये आज की अँधेरी जिंदगी...सत्य का परिचय कराती और जीवन के गुढ़ रहस्यों को बताती सु्ंदर अभिव्यक्ति....धन्यवाद।

ashish Sun Mar 27, 05:03:00 pm  

रेगिस्तान में नखलिस्तान जल्दी ही नजर आये , रेत का हर कण नेह जल में भीगा हो . हम तो घोर आशावादी है और इस रचना में भी हमने ढूंढ़ ली आशा की किरन .

राज भाटिय़ा Sun Mar 27, 05:04:00 pm  

जीवन कुछ ऎसे ही चलता हे..
बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति...

ajit gupta Sun Mar 27, 05:10:00 pm  

प्रत्‍येक का अपना नजरिया है
आधा गिलास खाली या आधा भरा है।

Dr (Miss) Sharad Singh Sun Mar 27, 05:58:00 pm  

तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए ....


बहुत भावुक एवं मार्मिक कविता...

डॉ टी एस दराल Sun Mar 27, 08:17:00 pm  

वक्त वक्त की बात है ।
सुन्दर अभिव्यक्ति ।

डा. अरुणा कपूर. Sun Mar 27, 08:52:00 pm  

वाह!...क्या बात है!

Manav Mehta Sun Mar 27, 09:09:00 pm  

waah ji waah ..kya baat hai...photo to kmaal kar gaye

विशाल Sun Mar 27, 09:10:00 pm  

अच्छा लिखा है.
सलाम

कुश्वंश Sun Mar 27, 10:24:00 pm  

एक बेहतरीन काव्य , संगीताजी . आपकी रचनाएँ सही रूप मैं कविताये होती है, बेहद संवेदनशील, ह्रदय से निकल कर सीधे हृदय मैं घर करती रचनाये , बधाई

प्रतिभा सक्सेना Sun Mar 27, 10:33:00 pm  

संक्षिप्त और सुन्दर ,वाह !!

: केवल राम : Sun Mar 27, 10:46:00 pm  

तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए .

और यह नमी हर किसी के नसीब में नहीं होती ...व्यक्ति की संवेदना उभर कर सामने आई है ...आपका आभार

मनोज कुमार Sun Mar 27, 10:50:00 pm  

संवेदनशील रचना।

डॉ॰ मोनिका शर्मा Sun Mar 27, 11:14:00 pm  

एक वक्त था
कि
छाये रहते थे
मेघ नेह के
इन आँखों में ,
आज
पसर गया है
एक रेगिस्तान

उम्दा संवेदनशील रचना

रचना दीक्षित Sun Mar 27, 11:34:00 pm  

आँखों की नमी बरक़रार रहे यही कामना है.
सुंदर पंक्तियाँ दिल को छू लेने वाली.

shikha varshney Mon Mar 28, 12:12:00 am  

दी ३ बार आकर पढ़ गई हूँ ये पंक्तियाँ ..और अभी तक शब्द नहीं ढूंढ पाई कि क्या कहूँ.

Kunwar Kusumesh Mon Mar 28, 07:44:00 am  

गागर में सागर भर दिया है आपने.

saanjh Mon Mar 28, 09:27:00 am  

zindagi jab mausam badalti hai to yahi hota hai....amazing

sushma 'आहुति' Mon Mar 28, 09:36:00 am  

bhut hi khubsurat panktiya hai..very nice..

ZEAL Mon Mar 28, 10:17:00 am  

सुन्दर अभिव्यक्ति ।

Khare A Mon Mar 28, 10:40:00 am  

kitna dard he is kavita me, sagar si gehrai,,,..liye hue aapki ye panktiyaan..\
\

पी.सी.गोदियाल "परचेत" Mon Mar 28, 10:45:00 am  

एक वक्त था

कि
छाये रहते थे
मेघ नेह के
इन आँखों में ,
आज
पसर गया है
एक रेगिस्तान
और
तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए .
दोनों ही प्रतिकूल वक्त ! सुन्दर अभिव्यक्ति !

रंजना [रंजू भाटिया] Mon Mar 28, 11:54:00 am  

हसरतें ..वाकई बहुत सुन्दर ...बहुत पसंद आई यह रचना

इमरान अंसारी Mon Mar 28, 01:02:00 pm  

सुभानाल्लाह.....वाह.....आपकी इस खूबी को सलाम है जो इतने कम शब्दों में इतनी गहराई उंडेल देती है .....बहुत खूब

amrendra "amar" Mon Mar 28, 02:04:00 pm  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

सदा Mon Mar 28, 03:15:00 pm  

तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए ....

भावमय करते शब्‍द ।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने Mon Mar 28, 03:50:00 pm  

एक और अनोखी अभिव्यक्ति... आपकी कविता में दुख और वेदना भी सुंदरता से निखर जाती है!!

ज्ञानचंद मर्मज्ञ Mon Mar 28, 05:11:00 pm  

जीवन का हर उतर चढ़ाव आँखों से झांकता है !
और कविता जिंदगी की आँखें ही तो है !
बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति !

lokendra singh rajput Mon Mar 28, 07:21:00 pm  

वर्तमान जीवन का चित्र खींचती ये रचना बेहद संवेदनशील है...

Dr Varsha Singh Mon Mar 28, 10:35:00 pm  

बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
शुभकामनायें !

POOJA... Mon Mar 28, 11:20:00 pm  

बहुत ही खूबसूरत...

ज्योति सिंह Mon Mar 28, 11:37:00 pm  

एक वक्त था
कि
छाये रहते थे
मेघ नेह के
इन आँखों में ,
आज
पसर गया है
एक रेगिस्तान
kabhi kabhi aesa bhi hota hai ,sundar .

रानीविशाल Tue Mar 29, 06:36:00 am  

एक बार फिर बेहद मर्मस्पर्शी प्रस्तुति दी .....कमाल है

अनामिका की सदायें ...... Tue Mar 29, 08:18:00 pm  

kavita ke maadhyam se ehsaas hota hai ki aankho me nami ka hona bhi kitna jaruri aur nami ki anupasthiti me registaan ka hona kitna dardnaak.

sashakt lekhan.

Mrs. Asha Joglekar Tue Mar 29, 11:41:00 pm  

वक्त कब एक सा रहता है। आज सूका है तो कल बारिस भी होगी । बहुत कोमल प्रस्तुति ।

Akshita (Pakhi) Wed Mar 30, 09:02:00 am  

तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए .

Bahut sundar najm..badhai.

दिगम्बर नासवा Wed Mar 30, 12:22:00 pm  

कुछ ही शब्दों में गहरी बात .... आशा की नमी ज़रूर नज़र आएगी ...

anupama's sukrity ! Fri Apr 01, 09:51:00 am  

बदलते वक्त के साथ बदलते एहसास -
कैसे मानू के तुम वही हो .....वही ... ?
बहुत सुंदर उदगार -

Anand Dwivedi Fri Apr 01, 11:08:00 am  

ख़ुशी से तरबतर हसीन एक पल था वो
मगर वो आज नही है जनाब कल था वो !
बहुत खूब संगीता जी......निवेदन है कि मेरी ये ग़ज़ल जरूर पढ़ें आप एक बार !
http://anandkdwivedi.blogspot.com/2010/12/blog-post_1598.html

वन्दना महतो ! (Bandana Mahto) Fri Apr 01, 06:48:00 pm  

सच में ऐसा ही तो होता है!......

डा. अरुणा कपूर. Sat Apr 02, 07:59:00 pm  

तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए .

...एक एक शब्द गूढार्थ लिए हुए है संगीता जी, ...धन्यवाद!....!..और 'उजला आसमां 'सही में नीले आसमां की खुबसूरती बयां कर रहा है...जल्दी ही मै समीक्षा पेश करने जा रही हूं!

कविता रावत Sun Apr 03, 11:16:00 am  

तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए .
..बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति... धन्यवाद

vedvyathit Sun Apr 03, 11:57:00 am  

smy ke privrtn ko sheje sundr rchna ke liye bdhai
aap ne antr mn puetk ko neh diya hardik aabhar vykt krta hoon kripya swikar kren
aap se smvad kr ke prsnnta hogi
ved vyathit
09868842688

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' Sun Apr 03, 01:11:00 pm  

तरस गयीं हैं
ये आँखें
एक बूँद
नमी के लिए.
वाह....
बिल्कुल अलग
बेहतरीन अंदाज़.

mridula pradhan Sun Apr 03, 01:48:00 pm  

bahut achcha likha hai.....wah..

Sawai Singh Rajpurohit Sun Apr 03, 04:04:00 pm  

दिन मैं सूरज गायब हो सकता है

रोशनी नही

दिल टू सटकता है

दोस्ती नही

आप टिप्पणी करना भूल सकते हो

हम नही

हम से टॉस कोई भी जीत सकता है

पर मैच नही

चक दे इंडिया हम ही जीत गए

भारत के विश्व चैम्पियन बनने पर आप सबको ढेरों बधाइयाँ और आपको एवं आपके परिवार को हिंदी नया साल(नवसंवत्सर२०६८ )की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

आपका स्वागत है
"गौ ह्त्या के चंद कारण और हमारे जीवन में भूमिका!"
और
121 करोड़ हिंदुस्तानियों का सपना पूरा हो गया

आपके सुझाव और संदेश जरुर दे!

Sawai Singh Rajpurohit Sun Apr 03, 04:04:00 pm  

दिन मैं सूरज गायब हो सकता है

रोशनी नही

दिल टू सटकता है

दोस्ती नही

आप टिप्पणी करना भूल सकते हो

हम नही

हम से टॉस कोई भी जीत सकता है

पर मैच नही

चक दे इंडिया हम ही जीत गए

भारत के विश्व चैम्पियन बनने पर आप सबको ढेरों बधाइयाँ और आपको एवं आपके परिवार को हिंदी नया साल(नवसंवत्सर२०६८ )की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

आपका स्वागत है
"गौ ह्त्या के चंद कारण और हमारे जीवन में भूमिका!"
और
121 करोड़ हिंदुस्तानियों का सपना पूरा हो गया

आपके सुझाव और संदेश जरुर दे!

तदात्मानं सृजाम्यहम् Sun Apr 03, 07:05:00 pm  

मैं तो बहुत डरते-डरते ब्लाग पर आया हूं। वो दरअसल क्या है कि मैं कई दिनों से बीमार था...लिखना-पढ़ना तो बंद था ही बात करना भी। कुछ सेहत सुधरी तो सोचा फिर से संबंध बहाल किए जाएं...अभी तो सिर्फ आपके बिखरे मोती पर "एक बूंद नमी के लिए" आया ूं...अगर सब ठीक रहा तो धाराप्रवाह शुरू हो जाएंगे....फिर से "सृज्याम्यहम्" को लेकर

VIJUY RONJAN Mon Apr 04, 08:58:00 am  

Behad Khoobsoorat nazm Sangeeta ji...AAnkhein jab sookh jaati hain to fir baadlon ka umarna yaad aata hai...rone ka jab man karta to toot ke bikharna yaad aata hai...

Bahut khoob...

VIJUY RONJAN Mon Apr 04, 08:58:00 am  

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Bahut khoob...

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VIJUY RONJAN Mon Apr 04, 08:58:00 am  

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Bahut khoob...

usha rai Tue Apr 05, 02:49:00 pm  

भली कही आपने इन आँखों कि बाते ..हमरे देश में खून की आंसू रो रही हैं !marmik !!!

Amrita Tanmay Sat Apr 09, 08:50:00 pm  

खूबसूरत प्रस्तुति... मर्मस्पर्शी!. बधाई

Surendrashukla" Bhramar" Mon Apr 18, 10:21:00 am  

आदरणीय संगीता जी

रेत का समंदर और रेगिस्तान के जज्बात और एक छुपे हुए समाज के दर्द को रस में भीगा बहुत अच्छी तरह से उकेरा है आपने रचनाओं में -बधाई हो

आप के हिंदी और कविता के रुझान को देख मन खुश हुआ , चूंकि इस बाल जगत में मै नया हूँ कोशिश करूँगा छोटी रचना छोटे नन्हे मुन्नों के लिए , मेरी तो आदत पड़ गयी है भ्रमर के दर्द और दर्पण में लम्बे दर्द ले चलने की न इसलिए बात पूरी होती ही नहीं अपना सुझाव व् समर्थन भी दीजिये न ! शब्द जांच में हटा ले रहा हूँ
धन्यवाद
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५

संजय भास्कर Tue Apr 19, 12:32:00 pm  

एक बूँद
नमी के लिए.
वाह....
बिल्कुल अलग
.........बेहतरीन अंदाज़.

Surendrashukla" Bhramar" Tue Apr 26, 01:01:00 am  

सच अमृता जी आत्मा में निहित न्याय ही सब कुछ का सही नियंत्रण कर भी सकता है वह नियंता तो है ही -बाकी तो सब उपरी दिखावा है हम अपने मन की मानें जायज करें तो क्या संभव नहीं -सुन्दर रचना बधाई हो

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

kewal patel Sat Aug 01, 12:44:00 am  

यही तो है रेगिस्तान की महत्ता

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