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मोती

>> Friday, 5 February 2010



इश्क के पैरों में



ना जाने क्यों


गम के घुंघरू


बंध जाते हैं


आँखों में


हंसी भी हो


तो भी रुखसार पर


अश्क के मोती


टपक जाते हैं
 
 
 
 

5 comments:

ताऊ रामपुरिया Fri Feb 05, 07:21:00 pm  

वाह लाजवाब, शुभकामनाएं.

रामराम.

अनामिका की सदाये...... Sat Feb 06, 12:18:00 am  

इश्क ऐसा रब ने दिया..
मीठा सा दर्द है जिसमे..
और अनंत एक कसक भी..
कबी दर्द नम कर देता है आँखे
तो, कसक आँखों में एक हंसी चमक भी....

Babli Sun Feb 07, 03:04:00 pm  

बहुत ही सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है!

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