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उम्मीद

>> Tuesday, 2 February 2010


उम्मीद के रोशनदान पर



लगा दिए हैं पहरे


बंद कर पलकों को


कान खोल लिए हैं


हर आहट पर


लगता है कि


उम्मीद पूरी हो गयी
 
 
 
 

13 comments:

दुलाराम सहारण Tue Feb 02, 10:11:00 pm  

अच्‍छा प्रयास है, बधाई

सादर

श्याम कोरी 'उदय' Tue Feb 02, 10:23:00 pm  

..... बेहतरीन रचना "शार्ट एंड स्वीट" !!!!

अनामिका की सदाये...... Tue Feb 02, 10:42:00 pm  
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shikha varshney Tue Feb 02, 10:42:00 pm  

chalo aahat to baki hai kam se kam...nice one di

अनामिका की सदाये...... Tue Feb 02, 10:46:00 pm  

उम्मीद के रोशनदान बंद करने से आँख रोती ही है जो आपकी रचना की पिक. दिखा रही है..अब इस से आगे क्या कहू...बाकि ये आँखे कहे देती है.

ताऊ रामपुरिया Wed Feb 03, 12:32:00 pm  

बहुत सुंदर रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

kshama Thu Feb 04, 02:07:00 pm  

Har aahat pe lagta hai,ummeed pooree honewalee hai...aah!

Parul Thu Feb 04, 06:28:00 pm  

mujhe ye moti chunne hai..
bahut hi prabhavi!!

निर्मला कपिला Thu Feb 04, 06:31:00 pm  

उमीद के रोशन दान पर लगा दिये हैं पहरे----- वाह बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है शुभकामनायें

sada Fri Feb 05, 01:09:00 pm  

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

Ashok Sharma Wed Feb 17, 03:48:00 pm  

gagar men Sagar.
Bahut Sundar

H K Dubey Sat Mar 26, 01:13:00 pm  

बहुत ही सुंदर और अर्थपूर्ण कविता |

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