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गुजारिश

>> Sunday, 21 February 2010





टुकड़ा ए दिल



सहेज लिया है मैंने


तू बस


फिरा दे ज़ख्म पर


अपनी अंगुली .

23 comments:

Apanatva Mon Feb 22, 01:03:00 am  

kitne masoom hote hai dil pyar ka sparsh matr ilaj sabit ho jata hai......
:)

Ravinderkumar Mon Feb 22, 08:25:00 am  

wow simply great .. keep it up..what pathoes.
ravi pipal

ताऊ रामपुरिया Mon Feb 22, 10:43:00 am  

वाह कमाल का लिखा है. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

मनोज कुमार Mon Feb 22, 12:25:00 pm  

भावपूर्ण अभिव्यक्ति है।

sada Mon Feb 22, 05:30:00 pm  

क्‍या बात है बहुत ही सुन्‍दर अल्‍फाज़ दियें है आपने इन पंक्तियों को, बधाई ।

ज्योति सिंह Mon Feb 22, 05:40:00 pm  

chhote se dil ke bade afsaane ,thik usi tarah rachna ek moti ki tarah ,small and sweet .

अनामिका की सदाये...... Mon Feb 22, 07:41:00 pm  

उफ़ क्या लिखते हो, पढ़ कर ही आह निकल जाए.

Babli Mon Feb 22, 07:49:00 pm  

छोटी सी सुन्दर सी प्यारी सी रचना बहुत अच्छी लगी! अद्भुत सुन्दर!

रचना दीक्षित Tue Feb 23, 12:11:00 pm  

बहुत लाजवाब, बहुत कुछ कह डाला इतने में ही बधाई

दिगम्बर नासवा Wed Feb 24, 01:21:00 pm  

बहुत खूब ... कमाल का लिखा है ..

निर्मला कपिला Wed Feb 24, 03:42:00 pm  

दो शब्दों मे इतनी कमाल की बात अद्भुत। शुभकामनायें

KK Yadava Thu Feb 25, 06:02:00 pm  

शब्दों की अद्भुत संगति..भावपूर्ण रचना..बधाई.
______________
शब्द सृजन की ओर पर पढ़ें- "लौट रही है ईस्ट इण्डिया कंपनी".

दिनेश शर्मा Fri Feb 26, 05:20:00 am  

वाह!!!होली पर शुभकामनाएं।

psingh Fri Feb 26, 10:55:00 am  

क्या वाकई दिल इसे ही टूटता है सुन्दर रचना
आभार

Mumukshh Ki Rachanain Sat Feb 27, 09:18:00 am  

गागर में सागर............

होली पर आपको हमारी हार्दिक बधाइयाँ.

चन्द्र मोहन गुप्त

Indranil Bhattacharjee Tue Mar 02, 08:33:00 am  

Phira de zakhm par apni Ungli...

Ye padhkar aisa laga ki jaise....kahin na kahin har kisi ke man me yahi baat rehti hai...

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