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विश्वास की ईंट

>> Thursday, 30 September 2010




झूठ की एक 

नन्हीं सी फांस 

उखाड़ देती है 

विश्वास की 

जमी हुई नींव को 

फिर कितना ही 

सच का गारा 

लगाओ 

जम नहीं पाती 

एक भी ईंट 

विश्वास की ...

103 comments:

JHAROKHA Thu Sep 30, 06:03:00 pm  

Adaraneeya Sangita di,
apne bahut kam shabdon men badee bat kah dee hai.Vishvas--aur sach ka to bahut bada rishta hai.sundar kavita.
Poonam

विरेन्द्र सिंह चौहान Thu Sep 30, 06:12:00 pm  

बहुत बढ़िया लिखा है ....
सार्थक, सत्य और उम्दा.
बधाई .

दिगम्बर नासवा Thu Sep 30, 06:23:00 pm  

सच कहा ... धागा टूटना आसान है जुड़ना बहुत मुश्किल ... बहुत खूब ...

ajit gupta Thu Sep 30, 06:28:00 pm  

एक दृष्टि से देखने पर कविता अच्‍छी लग रही है लेकिन गम्‍भीरता से पढें तो लगेगा कि क्‍या विश्‍वास इतना कमजोर है कि किसी ने झूठ का एक कतरा कहा और हमारी नींव ही धंस गयी?

वन्दना Thu Sep 30, 06:32:00 pm  

विश्वास पर ही तो ज़िन्दगी टिकी होती है और यदि वो ही डोर टूट जाये तो सारी ज़िन्दगी के लिये गाँठ पड जाती है…………………बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

ashish Thu Sep 30, 06:35:00 pm  

सत्यम ब्रूयात प्रियम ब्रूयात , असत्यं प्रियम न ब्रूयात

mukti Thu Sep 30, 06:37:00 pm  

मुझे भी झूठ से सख्त नफ़रत है. मुझे लगता है कि संबंधों में झूठ का स्थान नहीं होना चाहिए, पर कुछ लोग इससे उल्टा सोचते हैं कि दुःख देने वाले सच से अच्छा है कि झूठ बोल दिया जाये. मैं अक्सर इस मामले पर कन्फ्यूज्ड हो जाती हूँ.

shikha varshney Thu Sep 30, 06:41:00 pm  

दी !!!!!!..क्या बोलूं मैं:) एक दोहा याद आ रहा है
रहिमन धागा प्रेम का मत तोडो चटकाए
टूटे से फिर न जुड़े ,जुड़े गाँठ पड़ जाये.

विश्वास का धागा भी बहुत नाजुक होता है जिससे बनने में बहुत वक्त लगता है और जिसे बहुत सहेज कर रखा जाये तो आसानी से नहीं टूटता ...परन्तु जहाँ जरा लापरवाही हुई एक फांस ही कमजोर कर देती है और वो झट से टूट जाता है
और अगर एक बार टूट जाये फिर कभी दुबारा वैसा नहीं बन सकता.

महेन्द्र मिश्र Thu Sep 30, 06:48:00 pm  

बहुत सही सौ टके की बात आपने रचना के माध्यम से कह दी....आभार

प्रवीण पाण्डेय Thu Sep 30, 06:49:00 pm  

सच है, बस थोड़ा सा अविश्वास सम्बन्धों के बड़े भवन ढहा देता है।

संगीता पुरी Thu Sep 30, 06:51:00 pm  

बहुत अच्‍छी अभिव्‍यक्ति .. आज ऐसा ही देखने को मिल रहा है .. पर झूठ के कतरे से तबतक विश्‍वास नहीं डिगता .. जबतक संवादहीनता न बनें !!

Majaal Thu Sep 30, 06:54:00 pm  

सही बात है :

सादा रहिये रिश्तों को,
जर्दा कैसा ?
अपने है वो, कह दीजिये,
पर्दा कैसा ?

लिखते रहिये,
हर्जा कैसा ? !

rashmi ravija Thu Sep 30, 06:58:00 pm  

सच्चाई दर्शाती कविता....ईंट जम भी जाए पर उसमे दरारें नज़र आएँगी.

arun c roy Thu Sep 30, 07:25:00 pm  

विश्वास का धागा बहुत नाजुक होता है जिससे बनने में बहुत वक्त लगता है और जिसे बहुत सहेज कर रखा जाये तो आसानी से नहीं टूटता ...

Dr. Ashok palmist blog Thu Sep 30, 07:54:00 pm  

वाह! कटु सत्य व्यक्त करती बहुत ही खूबसूरत पँक्तियाँ। शानदार गहरी अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति। बहुत-बहुत आभार। -: VISIT MY BLOG :- तपा सके अगर सोना तो हृदय मेँ अगन होनी चाहिए।..............गजल को पढ़कर अपने अमूल्य विचार व्यक्त करने के लिए आप सादर आमंत्रित हैँ। आप उपरोक्त लिँक पर क्लिक कर सकती हैँ।

डॉ टी एस दराल Thu Sep 30, 08:08:00 pm  

रिश्तों में सच झूठ के महत्त्व को उजागर करती रचना । उम्दा ।

अनामिका की सदायें ...... Thu Sep 30, 08:09:00 pm  

कुछ रिश्तों में विश्वास के धागे मज़बूत होते हुए भी रेशमी नजाकत लिए होते है...जिन्हें सहेज कर रखने में ही समझदारी है.

विषय सटीक और विचारणीय है.

बधाई.

राज भाटिय़ा Thu Sep 30, 08:28:00 pm  

बहुत सुंदर बात कही आप ने, विश्वास बनाना बहुत कठिन है ओर उसे तोडना बहुत आसान, ओर अगर टूट जाये तो दोवारा कभी नही बनता, धन्यवाद

Udan Tashtari Thu Sep 30, 08:34:00 pm  

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरहु चटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ पड़ जाय।

मनोज कुमार Thu Sep 30, 09:19:00 pm  

ई पढके त सबका दिल कह रहा होगा कि ई का ई त हमरे दिल का बात लिख दिया भाई। अब ई मत पूछिएगा कि आपके दिल में क्या है.... मैं तो यही कहे जा रहा हूं
दुनिया में कुछ नहीं इन आंखों में दोष था
हर झूठ मुझको सच ही लगता रहा यहां।

Kewal Ram Thu Sep 30, 09:20:00 pm  

kavita main vishwas or avishwas ki nahi walki ek sachai jo hum per prabhav dalti hai uski avhivyakti hui hai

Bahut khub
Dhanyavaad

Dr.Ajeet Thu Sep 30, 09:37:00 pm  

उम्दा रचना...हमेशा की तरह से...

अब आपको भी बुलाना पडेगा क्या अपने ब्लाग पर...! वैसे ही मुझ निर्धन के यहाँ इक्का-दुक्का लोग आते है आप कुछ समर्थन कर देती है तो मनोबल बढ जाता है...

आभार सहित
डा.अजीत

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' Thu Sep 30, 09:38:00 pm  

झूठ की एक...नन्हीं सी फांस
उखाड़ देती है...विश्वास की...जमी हुई नींव को...
सच कहा है...
इसीलिए तो कहा है-
बुनियाद तो यक़ीन है रिश्ता कोई भी हो.

शुभम जैन Thu Sep 30, 09:48:00 pm  

किसी भी रिश्ते की बुनियाद विश्वास ही है बहुत ही सही कहा आपने...


बच्चो के उत्साहवर्धन हेतु एक लघु प्रयास, कृपया आप अवश्य पधारे :

मिलिए ब्लॉग सितारों से

उपेन्द्र " the invincible warrior " Thu Sep 30, 10:21:00 pm  

Jitne sunder chitra utne hi kavita ki sachchai ne man ko chhoo liya

धर्म सिंह........;;;;;.. (इक अजनबी) Thu Sep 30, 11:12:00 pm  

bhut khoob
di namaste
aap ki choti choti bate dil me kitne gahare prabhau chod jati hai bayan nahin kar sakta
lajawab rachna

अनामिका की सदायें ...... Thu Sep 30, 11:26:00 pm  

आप की रचना 01 अक्टूबर, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव देकर हमें अनुगृहीत करें.
http://charchamanch.blogspot.com


आभार

अनामिका

हास्यफुहार Thu Sep 30, 11:27:00 pm  

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

ज्योति सिंह Thu Sep 30, 11:39:00 pm  

ye to sach hai
झूठ की एक...नन्हीं सी फांस
उखाड़ देती है...विश्वास की...जमी हुई नींव को..

चला बिहारी ब्लॉगर बनने Thu Sep 30, 11:46:00 pm  

संगीता दी,
सम्बंधों की सच्ची व्याख्या कर दी आपने... जहाँ बुनियाद ही झूठ की कच्ची ईंट पर रखी जाए , वहाँ संबंध भरभरा कर गिर जाते हैं. मनोज जी ने मेरी ज़ुबान में टिप्पणी कर दी इसलिए मैं उनकी ज़ुबान में टिप्पणी कर रहा हूँ.
सलिल

kshama Thu Sep 30, 11:57:00 pm  

Mai hamesha dang rah jati hun,ye dekh ki,aap itni badi baat kitni sahajta se kah jaati hain! Hats off!

दीपक 'मशाल' Fri Oct 01, 02:55:00 am  

कबीर की साखी की तरह उत्तम सीख देती लगी कविता... बेहतरीन..

M VERMA Fri Oct 01, 05:02:00 am  

आपकी सूक्ष्म दृष्टि ने विश्वास और सच-झूठ को बखूबी रेखांकित किया है.

Sadhana Vaid Fri Oct 01, 06:57:00 am  

अत्यंत प्रभावशाली और एक शाश्वत सत्य को स्थापित करती सशक्त अभिव्यक्ति ! अति सुन्दर !

रेखा श्रीवास्तव Fri Oct 01, 08:08:00 am  

विश्वास ही तो इस जीवन का आधार है, बहुत कटु सत्य को सहज शब्दों में बाँध दिया.
बहुत सुन्दर रचाना. बधाई.

रश्मि प्रभा... Fri Oct 01, 08:10:00 am  

vishwaas me ek daraar aur sab ek bojh yaa khatm ...

प्रतिभा सक्सेना Fri Oct 01, 09:17:00 am  

ईमानदारी ही रिश्तों का आधार है-यह बिलकुल सच है.

Shaivalika Joshi Fri Oct 01, 09:56:00 am  

फिर कितना ही


सच का गारा


लगाओ


जम नहीं पाती


एक भी ईंट


विश्वास की ...

Sach fir se Vishwas pana bahut kathin hota hai

डा. अरुणा कपूर. Fri Oct 01, 11:58:00 am  

....विश्वास एक शिशे की तरह है....मजबूत होते हुए भी टूट ने आशंका हंमेशा बनी रहती है!....अति सुंदर रचना!

राजभाषा हिंदी Fri Oct 01, 12:06:00 pm  

ये सच का गारा कहां मिलता है? इधर तो बहुत दिनों से आउट ऑफ़ स्टॉक चल रहा है। आपको कहीं दिखे तो बताइएगा। बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
बदलते परिवेश में अनुवादकों की भूमिका, मनोज कुमार,की प्रस्तुति राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

स्वप्निल कुमार 'आतिश' Fri Oct 01, 12:30:00 pm  

heheh raheem revisited ....

toote fir to na jude types..mast nazm hai chhoti wali

ZEAL Fri Oct 01, 12:37:00 pm  

रहिमन धागा प्रेम का मत तोडो चटकाए
टूटे से फिर न जुड़े ,जुड़े गाँठ पड़ जाये.

अजय कुमार झा Fri Oct 01, 01:24:00 pm  

सच कहा आपने ....और आजकल इस ईंट को स्नेह , साथ , पारस्परिकता के आग पर ठीक से सेंका नहीं जा रहा है ..तभी स्थिति ऐसी है मानो विश्वास न हुआ कच्ची मिट्टी की लोई हो गया ...


जाने क्या सोच कर ये सब लिख गया ........आपकी रचना उत्प्रेरक की तरह लगी मुझे ..

ज्योत्स्ना पाण्डेय Fri Oct 01, 01:54:00 pm  

एक मनोविज्ञान पढाती रचना....

शुभकामनाएं...

Kailash C Sharma Fri Oct 01, 03:02:00 pm  

इतने कम शब्दों में इतनी गहन अभिव्यक्ति ! कमाल है......आभार

sheetal Fri Oct 01, 03:47:00 pm  

kisi bhi rishte main vishvaas ki ek aham bhumika hoti hain jhuth ki inth se koi sambandho ki imarat thaharti nahi, fir chahe laakh sach ke gaara lagao darare nazar aati hain.
kam sabdo main gehri baat.

अनुपमा पाठक Fri Oct 01, 03:51:00 pm  

विश्वास की नीव कभी न हिले!
सुन्दर रचना!

sada Fri Oct 01, 04:14:00 pm  

यह विश्‍वास की नींव सदा यूं ही मजबूत रहे, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

NK Pandey Fri Oct 01, 05:23:00 pm  

बिलकुल सही कहा आपने। बहुत सुन्दर कविता लिखी है धन्यवाद।

राजकुमार सोनी Fri Oct 01, 07:28:00 pm  

विश्वास की नींव हमेशा मजबूत रहे यही कामना है। शानदार प्रस्तुति

सुनीता शानू Fri Oct 01, 07:31:00 pm  

विश्वास सदा बना रहे यही कामना करते हैं। एक बात कहें। यदि उम्र पर न जायें तो आपका मेरी माँ मे पूरा चेहरा मिलता है जाने कैसे उनकी तो कोई छोटी बहन भी नही है न ही कोई बहन कुम्भ के मेले मे खोई थी...:) बुरा मत मानियेगा बस यूँ ही आपसे हँसी कर रही थी. हाँ चेहरा सच मे मिलता है।

महफूज़ अली Fri Oct 01, 08:55:00 pm  

यह विश्वास बना रहे हमेशा ... यही कामना करता हूँ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) Fri Oct 01, 09:00:00 pm  

समझदार को इशारा ही काफी होता है!
--
धर्म के ठेकेदारों को भगाकर
निर्धनों के लिए एक चिकित्सालय
बनवाइए ना!

रचना दीक्षित Fri Oct 01, 10:49:00 pm  

देखा !!!!तभी तो मैंने झूठ नहीं बोला और सच लिख दिया की वाकई बहुत पते की बात की है

सुमन'मीत' Sat Oct 02, 12:02:00 am  

बहुत सुन्दर........

saanjh Sat Oct 02, 01:18:00 am  

kabhi kabhi jhooth bolna padta hai...kya keeje. agar ye sach ke main yahan aapki nazm padh rahi hoon aur aapko apni padha rahi hoon..itni adnaa si baar unhe naagavaar guzre....to jhooth na bolun to aakhir kya karun..

kabhi kabhi jinhe pyaar karte hai, unse unhi ki khushi ke liye khooth bolna padta hai
:(

nazm magar bohot khoobsurat hai...

डॉ. हरदीप संधु Sat Oct 02, 01:51:00 am  

सच और विश्वास
रिश्तों को देता
हवा ....
लेने को हर सांस
संगीता जी बहुत ही सुनदर रचना ।
ऐसे ही कुछ रिश्तों की बात असीम आसमान(The sky is limitless) पर हो रही है....नन्ही सी बच्ची कुछ कहना चाह रही है आपसे...
http://limitlesky.blogspot.com

वाणी गीत Sat Oct 02, 09:09:00 am  

सच कहा झूठ की एक जरा सी भी फांस विश्वास की नींव को खोखला कर देती है ...
फिर से विश्वास का महल खड़ा हो भी जाए तो भी एक भय तो रहता ही है ...कब भरभरा कर गिर जाए ...ईश्वर कभी किसी का विश्वास ना तोड़े ...!

कुमार राधारमण Sat Oct 02, 03:05:00 pm  

रहिमन बिगड़े दूध को मथे न माखन होय...........

Babli Sat Oct 02, 06:55:00 pm  

बिल्कुल सही कहा है आपने! एक झूठ सौ झूठ के बराबर होता है और चाहे हम कितनी ही सच्चाई से उस झूठ को छुपाना चाहे लेकिन वो नामुमकिन होता है! बहुत सुन्दर रचना!

निर्मला कपिला Sat Oct 02, 09:11:00 pm  

बिलकुल सही कहा आपने बहुत सुन्दर रचना है। बधाई संगीता जी।

vedvyathit Sun Oct 03, 09:31:00 am  

sngeeta ji nirntr sneh v smvad bnaye rkhne ke liye aap ka hridy se aabhari hoon
yh aap ki shridyta hi hai jo anam vyktion ko bhi protsahit krtin hain
aap ka sundr blog dekh kr mn prsnn ho gya sundr rchna ke liye kripya bdhai swikar kren
mithk ka bhi is rchna me sundr pryog huaa hai
toote pichhi n jude jude ganth pd jay vastv me vishvash hi prem ka aadhar hai pun bahut 2 bdhai

DEEPAK BABA Sun Oct 03, 07:21:00 pm  

कम शब्दों में सुंदर बात................

बहुत ही सुंदर और सार्थक.........

इमरान अंसारी Mon Oct 04, 02:11:00 pm  

संगीता जी,

मेरे ब्लॉग पर आने और हौसलाफजाई करने का मैं तहेदिल से आपका शुक्रगुज़ार हूँ ..............आपकी छोटी सी रचना वाकई शानदार है .......इसे पड़कर रहीम साहब का प्रसिद्ध दोहा याद आ गया ........

"रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाए
जो टूटे तो फिर न जुडे, जुड़े तो गांठ पड़ जाये"

Tripat "Prerna" Mon Oct 04, 02:24:00 pm  

wah kya baat hai!!! :)

thx for dropping by :)

हरकीरत ' हीर' Mon Oct 04, 03:10:00 pm  

वाह संगीता जी क्या बात कही है खूब खूब .....!!


ये जाहिद जी गलती से मेरे ब्लॉग पे छोड़ आये थे ....
लौटा रही हूँ .....

संगीता जी,

मेरे ब्लॉग पर आने और हौसलाफजाई करने का मैं तहेदिल से आपका शुक्रगुज़ार हूँ ..............धन्यवाद |

क्षितिजा .... Mon Oct 04, 04:37:00 pm  

बहुत खूब संगीता जी .... सुंदर रचना ...

आप मेरे ब्लॉग पर आयीं और हौसला बढाया उसे लिए धन्यवाद ... आपके शब्द 'भीगी भीगी नज़्म' बहुत अच्छे लगे ... वो वाकई कई तरह से भीगी हुई नज़्म है ... शुभकामनाएं...

योगेन्द्र मौदगिल Mon Oct 04, 07:16:00 pm  

sahaj rachnatmak abivyakti ke liye sadhuwad swikaren......

विनोद कुमार पांडेय Mon Oct 04, 08:51:00 pm  

विश्वास जल्दी नही हो ही नही पाता...ऐसा टाइम चल रहा है...सुंदर प्रस्तुति..बधाई

Mrs. Asha Joglekar Tue Oct 05, 01:02:00 am  

झूट और विश्वास का साथ हो सकता ही नही । सुंदर कविता ।

सतीश सक्सेना Tue Oct 05, 09:43:00 am  

"अफ़सोस दिल की चोट कोई देखता नहीं
सब कह रहें हैं की तेरी सूरत बदल गयी "

RAJWANT RAJ Wed Oct 06, 03:19:00 pm  

didi
jhooth ki umr beshak lmbi ho skti hai lekin sach shashvt hai our isme itni takat hoti hai ki jab iski ek iit jhooth ke mahal pr pdti hai tb vo tash ke ptto ki trha bhrbhra ke jmeen pr bikhar jata hai .
mafi chahti hu didi, mai aapke is vichar se ittefak nhi rkh pa rhi hu. aasha krti hu aap ise anytha nhi lengi .

संगीता स्वरुप ( गीत ) Wed Oct 06, 06:41:00 pm  

राजवंत जी ,
यहाँ झूठ और सच कि बात नहीं है..झूठ और विश्वास कि बात है ...

झूठ पता चलने पर उसके बाद विश्वास नहीं रहता चाहे बाद में कितना ही सच क्यों न बोल लिया जाए ..बस यही कहना चाह रही थी इसमें ...

अल्पना Wed Oct 06, 08:36:00 pm  

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

UNBEATABLE Thu Oct 07, 01:15:00 am  

Shabdo ko nayee Paribhasha de kar Jeevan ke Mol seekhana to koi aapse seekhe Sangeeta G ... Bahut Khoob

UNBEATABLE Thu Oct 07, 01:16:00 am  

Shabdo ko nayee Paribhasha de kar Jeevan ke Mol seekhana to koi aapse seekhe Sangeeta G ... Bahut Khoob

Akanksha~आकांक्षा Thu Oct 07, 11:13:00 am  

बहुत खूब...दिल को छूने वाले भाव..बधाई.


__________________________
"शब्द-शिखर' पर जयंती पर दुर्गा भाभी का पुनीत स्मरण...

Anjana (Gudia) Fri Oct 08, 09:31:00 pm  

सत्य!!! बहुत ही सुंदर भाव, आभार

Anand Rathore Sat Oct 09, 02:52:00 pm  

bahut hi sunder rachna hai....

KK Yadava Sat Oct 09, 03:13:00 pm  

एक सच को कितने खूबसूरती से कलम-बंद किया...बहुत खूब.

मनोज भारती Sat Oct 09, 05:11:00 pm  

झूठ की एक फांस ही संबंधों को हिला कर रख देती है ...कम शब्दों में बड़ी अभिव्यक्ति ।

http://gunjanugunj.blogspot.com
पर पढ़िए लेखक और संवेदना !

डा. अरुणा कपूर. Sat Oct 09, 08:50:00 pm  

नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं, संगीताजी!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" Sun Oct 10, 06:43:00 am  

बेहतरीन कविता है ... विश्वास एक बार टूटे तो फिर नहीं जुड़ता !

Akshita (Pakhi) Sun Oct 10, 01:37:00 pm  

छोटी सी पर कित्ती प्यारी सी कविता..अच्छी लगी.

डॉ. नूतन - नीति Sun Oct 10, 05:15:00 pm  

बहुत सच्ची और बहुत सुन्दर पोस्ट... धन्यवाद ..आपको और एक गलती सुधरने के लिए कहा था आपने .. आपका धन्यवाद पुनः . . मुझे कलम से लिखना आता है किन्तु हिंदी टाइपिंग नहीं आती है .. और रोमन हिंदी में टाइप करते समय निगाह कीबोर्ड में होती है तो ऐसी गलतियाँ हो जाती है.. मुझे चिंता नहीं क्यूंकि आप सभी का प्रेम और सानिध्य मिलता रहा है शुरू से .. सो ये सुधार कर लुंगी| धन्यवाद ..शुभकामनाएं

archana Sun Oct 10, 11:29:00 pm  

अति सुन्दर सुनीता जी ....विश्वास के धागे रिश्तों को जितनी मजबूती से बांधते हैं ख़ुद उतने ही नाज़ुक होते हैं ........सार्थक कविता...... आज आप मेरे ब्लॉग पर आयीं तो आपसे परिचय का सौभाग्य प्राप्त हुआ.........शुभकामनाएं

Ravindra Ravi Mon Oct 11, 10:49:00 pm  

अत्यधिक सुन्दर रचना!

हास्यफुहार Tue Oct 12, 12:59:00 pm  

अपकी यह पोस्ट अच्छी लगी।
तीन गो बुरबक! (थ्री इडियट्स!)-2 पर टिप्पणी के लिए आभार!

S.M.MAsum Wed Oct 13, 12:41:00 pm  

satya kehaa hai aapne behtareen andaaz main एक ऐसा विडियो जिसे सबको देखना चहिये है? अगर हां तो बताएं अवश्य..

Nishant Dixit Sun Oct 24, 09:48:00 pm  

कम अलफ़ाज़ पूरी बात .... बहुत बढ़िया ... .

babanpandey Thu Oct 28, 10:52:00 pm  

aap mere blog par aaii ...mujhe bahut hi achha laga ..sneh banaaye rakhe ...

***Punam*** Mon Nov 08, 12:52:00 pm  

एकदम सच बात कही है आप ने........

एक बार गर आ जाये दरार

रिश्तों में झूठ की

फिर चाहे कितना भी सच का गारा हो..

या सच का मरहम,

वो पहले वाली बात नहीं आ पाती है,

बस निभाना ही रह जाता है उनमें

डॉ. नूतन - नीति Thu Nov 11, 06:31:00 pm  

100 comment number 100
mera saubhagya hai ki mai comment number 100 par punah.. bahut acchi aur rochak rachna lagi . atah kal charcha manch par iska link de rahi hoon.....aapka abhaar

Navin C. Chaturvedi Fri Nov 12, 01:28:00 pm  

आदरणीय संगीता स्वरूप जी, सच-झूँठ, विश्वास-अविश्वास की सहज और सकारात्मक विवेचना करती आपकी इस कृति के सम्मान में मेरी दो पंक्तियाँ:-

आपसी विश्वास ना हो जब तलक|
सुलह के सब फ़ैसले बेकार हैं||

सच कहूँ, आपकी इस महज ३० शब्दों वाली कविता ने एक पूरा का पूरा खण्ड काव्य कह दिया है|
ऐसा लगता है शायद पहले भी पढ़ा है इसे कहीं, और शायद टिप्पणी भी दी है|

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι Mon Nov 15, 10:37:00 pm  

आपकी लघु कविताओं का कोई ज़वाब नहीं।

Yagya Sun Nov 28, 08:16:00 pm  

Bahut inspiring hai...thank you

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