निर्मल धारा
>> Wednesday, 22 December 2010
मन की अगन को
बढा देती हैं
काम , क्रोध,
मोह , लोभ
की आहुतियाँ .
बढ़ाना है
गर इसको
तो
बहानी होगी
प्रेम की निर्मल धारा .
बढाने के दो अर्थ हैं --
१--- अधिक करना
२-- बुझाना
खलिश होती है तो यूँ ही बयां होती है , हर शेर जैसे सीप से निकला हुआ मोती है
मन की अगन को
बढा देती हैं
काम , क्रोध,
मोह , लोभ
की आहुतियाँ .
बढ़ाना है
गर इसको
तो
बहानी होगी
प्रेम की निर्मल धारा .
बढाने के दो अर्थ हैं --
१--- अधिक करना
२-- बुझाना

तेरी बातों की
© Free Blogger Templates Wild Birds by Ourblogtemplates.com 2008
Back to TOP