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सौगातें

>> Saturday, 30 January 2010




मैंने महज़ तुझसे


प्यार माँगा था


मैंने बस तुझसे


वफ़ा चाही थी


मैंने तेरी ही


खुशियों के लिए


अपनी झोली


फैलाई थी


पर तूने


भेज दीं हैं


सौगातें


मेरे हिस्से की


जिसमें हैं


तेरी नफरत ,


रुसवाई औ बेवफाई

10 comments:

shikha varshney Sat Jan 30, 01:05:00 pm  

हम्म एसा ही होता है..प्यार बफा के बदले यही मिलता है आज की दुनिया में :)
बहुत खूब दी

Rakesh Sat Jan 30, 01:32:00 pm  

satya bayan kiya hai aapnedhode mein sab kuch keh diya hai ...soogate ant mein yehi prapt hoti hai jab pyar pyar nahi rehker suvidhaon ka madhyam matraban ker reh jata hai aur jab ve suvidhaye puri nahi hoti tab pyar ki ais hi soogaate milti hai ...dhanyawad achi rachna ke liye

अनामिका की सदाये...... Sat Jan 30, 06:26:00 pm  

कैसे बे-दर्द है वो
और कैसे बदनसीब भी..
प्यार, वफ़ा देते नहीं..
और खुशियों के बदले
लुटाते है नफरत अपनी..
ऐसे बे-वफाओ को दो न
वफ़ा ना दवा

Apanatva Sat Jan 30, 07:08:00 pm  

very touching poem.......

मनोज कुमार Sat Jan 30, 08:36:00 pm  

कविता इतनी मार्मिक है कि सीधे दिल तक उतर आती है ।

Mithilesh dubey Sat Jan 30, 10:29:00 pm  

न जांने हमेशा यही क्यूं होता है ।

Babli Tue Feb 02, 04:01:00 pm  

बहुत ही सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार कविता प्रस्तुत किया है! बधाई!

Avinash Chandra Tue Feb 02, 07:53:00 pm  

Aaj kitne din baad aapko padha....aur utna hi achchha padha

bahut khoob

ताऊ रामपुरिया Tue Feb 02, 08:42:00 pm  

बहुत सुंदर और स्पर्षी रचना. शुभकामनाएं.

रामराम.

Dikshya Sat Feb 20, 04:29:00 pm  

dil ko chhu lene wali hai ye rachana
aap ko bahot shubh kamana

dikshya
www.sheeroshayari.blogspot.com

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