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ख्वाब और ख्वाहिश

>> Thursday, 1 July 2010





लबों पर 

मुस्कान 

और 

आँखों में 

नमी है 

ख़्वाबों के 

अम्बार 

पर 

ख्वाहिशों की 

कमी है .




55 comments:

Etips-Blog Team Thu Jul 01, 09:58:00 pm  

सानदार प्रस्तुती के लिऐ आपका आभार


सुप्रसिद्ध साहित्यकार व ब्लागर गिरीश पंकज जीइंटरव्यू पढेँ >>>>
एक बार अवश्य पढेँ

मनोज कुमार Thu Jul 01, 10:00:00 pm  

ख़्वाबों के
अम्बार
पर
ख्वाहिशों की
कमी है .
अपनी इन्द्रियों पर सम्‍पूर्ण नियन्‍त्रण ही सच्‍ची विजय है।

राजेश उत्‍साही Thu Jul 01, 11:01:00 pm  

माफ करें संगीता जी, बात कुछ जमी नहीं। बिना मुस्‍कान और आंखों की नमी तो साथ साथ हो सकती है। पर बिना ख्‍वाहिशों के ख्‍वाबों के अम्‍बार कैसे लग सकते हैं। हां आप अगर कहतीं कि ख्‍वाहिशों के अम्‍बार पर ख्‍वाबों की कमी है तो बात बनती है। खैर यह मेरा नजरिया है।

राजेश उत्‍साही Thu Jul 01, 11:03:00 pm  

कृपया मेरी पहली टिप्‍पणी में दूसरी पंक्ति को इस तरह पढें -लबों पर मुस्‍कान और आंखों में नमी तो साथ साथ्‍ा हो सकती है।

अनामिका की सदाये...... Thu Jul 01, 11:32:00 pm  

मन की बात को थोड़े ही शब्दों में कह देने की आपकी कला का कोई सानि नहीं है..
बहुत सुन्दर

Vivek Jain Thu Jul 01, 11:42:00 pm  

वाह, वाकई शानदार
vivj2000.blogspot.com

rashmi ravija Thu Jul 01, 11:56:00 pm  

चंद शब्दों में ,बहुत कुछ कह दिया...

kshama Fri Jul 02, 12:11:00 am  

Kam alfaaz aur athaah gahrayi..yahi khasiyat hai aapki...
Mai apni malika"Bikhare Sitare" punah prakashit kar rahi hun...iltija hai ki,gar samay mile to zaroor padhen ek samajik sarokar aur maqsad rakhte hue yah jeevani safar karegi...safarname me shamil hoke rahnumayi karen!

mukti Fri Jul 02, 12:20:00 am  

बहुत प्यारी कविता है और क्या कहूँ???? आपके शब्द सच में मोती हैं... पर बिखरे नहीं गुंथे हुए...

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Jul 02, 12:32:00 am  

राजेश जी ,

सच है की सबका नजरिया अलग अलग होता है....और हर बात अलग नज़रिए से लिखी जाती है..पर पढने वाला अपने नज़रिए से सोचता है...आपकी बात भी अपनी जगह सही है...कि ख्वाहिशें होतीं हैं तो ख्वाब देखे जाते हैं....पर वो उम्र कम से कम मेरी तो निकल चुकी है..और यथार्थ के धरातल पर आज ख्वाब तो बरकरार हैं पर सच्चाई ने ख्वाहिशों का दम तोड़ दिया है....

आपने इतने गौर से पढ़ा...अच्छा लगा..आभार

सभी पाठकों का आभार

सम्वेदना के स्वर Fri Jul 02, 12:52:00 am  

आज उधार के अल्फाज़ लेकर अपनी बात कह रहा हूँ… अल्फाज़ उधार के हो सकते हैं बयान मेरे दिल का है, एकदम हू ब हू
पहले हिस्से पर क़ैफी साहबः
“आँखों में नमी, हँसी लबों पर
क्या हाल है, क्या दिखा रहे हो.”
और दूसरे हिस्से पर चचा ग़ालिबः
“हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले.”
संगीता जी, आपकी व्याख्या कविता की परिपूरक है.

lokendra singh rajput Fri Jul 02, 01:24:00 am  

bahut khoob... chand alfaaj mein bahut kah gayein aap.....

दीपक 'मशाल' Fri Jul 02, 05:31:00 am  

चंद खूबसूरत शब्दों में बेहतरीन अभिव्यक्ति.. सच में यही कविता है..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक Fri Jul 02, 06:03:00 am  

यह बताशा जैसा मुक्तक तो बहुत ही बढ़िया रहा!

Deepak Shukla Fri Jul 02, 07:09:00 am  

Hi di..

Khwahish se hi khwab panapte..
Khwabon main khwahish dikhtin..
Kuchh unme pure ho jaate..
Kuchh bas khwahish hi rahtin..

Hothon par muskaan tumhaare..
Aankhen aakhir kyon nam hain..
Humko 'di' ye batla do..
Aakhir tumko kya gam hai..

Hothon par muskan ho tere..
Ankh kabhi bhi na hon nam..
Har khwahish ho puri teri..
Vinti Prabhu se karte hum..

Deepak..

ललित शर्मा Fri Jul 02, 09:07:00 am  

ख्वाबों और ख्वाहिशों के लिए कहीं
कभी कोई सीमाओं का बंधन नही।

उम्दा कवित्त

आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) Fri Jul 02, 10:07:00 am  

दीपक,

इतनी प्यारी कविता लिखने का बहुत सारा आभार..

स्वप्निल कुमार 'आतिश' Fri Jul 02, 11:04:00 am  

ख़्वाबों के

अम्बार

पर

ख्वाहिशों की

कमी है .

ye achha hai mumma...:)

वन्दना Fri Jul 02, 11:43:00 am  

ज़िन्दगी का यथार्थ दर्शाती बहुत ही सुन्दर कविता…………दिल मे उतर गयी…………………बेहद उम्दा ख्याल्।

स्वाति Fri Jul 02, 12:11:00 pm  

थोड़े ही शब्दों में बेहतरीन अभिव्यक्ति..

sheetal Fri Jul 02, 12:59:00 pm  

Kam sabdh mae gehri baat.

sanu shukla Fri Jul 02, 01:32:00 pm  

बहुत सुंदर रचना..!!

डा. अरुणा कपूर. Fri Jul 02, 01:50:00 pm  

धन्यवाद संगीताजी!.. बहुत अच्छा महसूस हुआ कि आप मेरे ब्लोग पर आई और गलतियों की तरफ इंगित किया!... आप की यह कविता मुझे भाव-विभोर कर रही है!... नपे-तुले शब्दों में आपने बहुत कुछ कह डाला है...फिर एक बार धन्यवाद!

asad ali Fri Jul 02, 02:27:00 pm  

लबों पर मुस्कान और आँखों में नमी है
ख़्वाबों के अम्बार पर ख्वाहिशों की कमी है .
तन्हाई का आलम अब इस तरह है
तेरे इंतजार में अब साँसे थमी है !
आपका ब्लॉग आच्छा है ऐसे ही लिखते रहिये

Shah Nawaz Fri Jul 02, 03:15:00 pm  
This comment has been removed by the author.
राजकुमार सोनी Fri Jul 02, 03:30:00 pm  

एक चर्चित शेर हैं-
हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले
बहुत निकले अरमान मेरे फिर भी बहुत कम निकले
ख्वाहिशों का मामला ही कुछ ऐसा है।
शानदार रचना। कम शब्दों का कमाल।

shikha varshney Fri Jul 02, 04:09:00 pm  

वाह दी वाह ... क्या दृश्य उभारा है ..
ख़्वाबों के अम्बार पर ख्वाहिशों की कमी है
वाह बहुत सुन्दर.

Avinash Chandra Fri Jul 02, 06:52:00 pm  

Bilkul sahi..sateek rachna...
kitne kam shabd kharchtee hain aap :) :)

khwaab to aate rahenge, doctor kahte hain aankhe badi nahi hoti bachpan se hi...

Din dekh dekh khwahishein sookh jaatin hain magar...


Kabhi pitaji ke liye likhi thi...


khet ki medein jodte,
khwaahishein nahi paalta,
kabhi khuda mera.
yon meri bulandiyon ke khawab,
jhaankte hain uske koron se.


waise hi ehsaas hue :)

Pranam

Asha Fri Jul 02, 07:32:00 pm  

बहुत सुन्दर भाव |संक्षेप मैं बहुत कुछ कह दिया आपने
बधाई
आशा

Shah Nawaz Fri Jul 02, 08:46:00 pm  

बेहतरीन ख्वाब और ख्वाहिशें! :-)

माफ़ कीजियेगा गलती से कहीं का कमेंट्स आपकी पोस्ट पर चिपका दिया था. कार्यालय में समय ही इतना कम होता है, जल्दी-जल्दी में गलती हो गई. :-)

Sadhana Vaid Sat Jul 03, 06:57:00 am  

अति सुन्दर ! गागर में सागर को आप ही परिभाषित कर लेती हैं ! बहुत खूब !

Divya Sat Jul 03, 08:39:00 am  

ख़्वाबों के

अम्बार

पर

ख्वाहिशों की

कमी है .

Kya baat hai !

Beautiful expression !

डा. अरुणा कपूर. Sat Jul 03, 01:18:00 pm  

संगीताजी, आपने मेरी इतनी प्रशंसा की...धन्यवाद!..लेकिन मै इसके काबिल नहीं हूं! मै एक साधारण लेखिका ही हूं!... हिन्दी साहित्य में मेरा योगदान तो गंगा में एक कटोरी पानी डालने के बराबर भी नहीं है!... मगर मै आप की फैन बन गई हूं!.. आप की सभी कविताएं मैने पढी...एक से बढ कर एक है!

Parul Sat Jul 03, 02:30:00 pm  

gagar mein sagar bharti hai aap :)

ज्योति सिंह Sat Jul 03, 03:04:00 pm  

ख़्वाबों के
अम्बार
पर
ख्वाहिशों की
कमी है
sach kya kahoon samjh nahi aa raha ,sach hi to kaha hai ,sach ke siva kuchh nahi .

Mukesh Kumar Sinha Sat Jul 03, 04:32:00 pm  

chhote lekin suljhe shabdo me apni baat rakhna koi aapse seekhe......sangeeta di, aapka koi shaani nahi......:)

सतीश सक्सेना Sat Jul 03, 09:35:00 pm  

हँसिये ! उदासी अपने आप भाग जायेगी !

रचना दीक्षित Sat Jul 03, 09:48:00 pm  

ख़्वाबों के
अम्बार
पर
ख्वाहिशों की
कमी है .
वाह क्या बात है !!!!!!!!!!!!

ana Sun Jul 04, 10:31:00 am  

kamaal ka lkha hai aapne............

**अंकित मित्तल** Sun Jul 04, 04:30:00 pm  

सुन्दर रचना ...

हसरतें मेरे अंतर में ख्वाब बनके के सोती हैं
आशाओं के समुन्दर में ख्वाहिशें बिखरे मोती हैं

बेचैन आत्मा Sun Jul 04, 10:08:00 pm  

sunder kavita.
Diipak jii kii kavita men tippani achchii lagi.

अरुणेश मिश्र Mon Jul 05, 10:28:00 am  

सूत्र में वस्तुस्थिति को स्वर दिया गया ।
प्रशंसनीय ।

Akshita (Pakhi) Mon Jul 05, 12:22:00 pm  

आपने तो बहुत अच्छे भाव प्रकट किये...

sada Mon Jul 05, 01:21:00 pm  

ख़्वाबों के
अम्बार
पर
ख्वाहिशों की
कमी है ।

गहरी बात सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

शहरोज़ Mon Jul 05, 02:09:00 pm  

निसंदेह अच्छी कविता बहुत ही asar है in panktiyon में

arun c roy Mon Jul 05, 03:16:00 pm  

khwab aur khwahishen...... sunder bhav.....

निर्मला कपिला Mon Jul 05, 07:17:00 pm  

ख़्वाबों के
अम्बार
पर
ख्वाहिशों की
कमी है .
बहुत खूब चंद शब्दों मे जिन्दगी का सच सब से अच्छी बात आपका स्पश्टीकरण। बहुत बहुत धन्यवाद।

Mrs. Asha Joglekar Tue Jul 06, 04:56:00 am  

बहुत खूब ।
ख्वाबों के अम्बारों पर ख्वाहिशों की कमी है ।
ख्वाहिशें हैं तभी तो ख्वाब हैं ।

Saumya Wed Jul 07, 10:33:00 pm  

very nice!...ek tees jhalakti hai

रेखा श्रीवास्तव Wed Jul 14, 11:28:00 am  

ख़्वाब देखने का हक होता लेकिन ख्वाहिशे सिर्फ की जाती हैं उनके पूरा होने या न होने का मलाल होता है.
बहुत सुन्दर लिखा देर से पहुँची इसके लिए .......

प्रतिभा सक्सेना Tue Jul 20, 04:24:00 am  

संगीता जी ,
आज आपके दोनों ब्लाग्ज़ पर गई .
काश कि पहले गई होती !
देर तक पढ़ती रही .बहुत अच्छा लिखती हैं आप !लिखे जाइये,
हमलोग पढ़ते रहेंगे .

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