copyright. Powered by Blogger.

गम के घुंघरू

>> Thursday, 19 August 2010




इश्क के पैरों में
ना जाने क्यों 
गम के घुंघरू 
बंध जाते हैं 
आँखों में 
हंसी भी हो 
तो भी रुखसार पर 
अश्क के मोती 
टपक जाते हैं 
  
  
  
 

58 comments:

Rahul Thu Aug 19, 06:09:00 pm  

so true...but love without hurts are like snacks without salt...

वन्दना Thu Aug 19, 06:27:00 pm  

यही तो इश्क की फ़ितरत होती है
कभी गुलज़ार होता है
कभी आफ़ताब होता है
इश्क सिर्फ़ इश्क होता है
कभी बाँध तोड्ता है
कभी सैलाब लाता है
इश्क सिर्फ़ इश्क होता है
ये कब किन्ही बंधनो
मे बंधता है
दरिया है बहता ही
रहता है क्यूँकि
इश्क सिर्फ़ इश्क होता है


बस आपकी पोस्ट पढ कर ये उदगार आये सो लिख दिये………………।सुन्दर अभिव्यक्ति।

shikha varshney Thu Aug 19, 06:29:00 pm  

ओ ओ ओ ..क्या यही प्यार है :( ..

राजकुमार सोनी Thu Aug 19, 06:32:00 pm  

हां... यहीं प्यार है
और प्यार कभी झुकता नहीं है

और इसी नही झुकने के कारण
आंसू टपक जाते हैं
संगीता जी की इस रचना को पढ़कर 80 के दशक के कई भावुक फिल्में याद आ रही है

ashish Thu Aug 19, 06:38:00 pm  

क्योकि ये इश्क है, जो बन्दे को खुदा करता है
और बंदा, इश्क में नाकाम हो आहे भरता है.

अनामिका की सदायें ...... Thu Aug 19, 06:47:00 pm  

सुंदर भावो से भरी रचना...अपना काम कर गयी.

सम्वेदना के स्वर Thu Aug 19, 07:00:00 pm  

संगीता दी... इश्क़ और अश्क..एक जैसे ही हैं, जुड़वाँ कहा लें… लिहाजा ग़म के घुंघरू बाँधने की कसक हो या निगाहों से अयाँ होने वाली ख़ुशी..अश्क़ पर किसका अख़्तियार है... कितनी सादगी से बयान कर देती हैं आप ये सब...

धर्म सिंह........;;;;;.. (इक अजनबी) Thu Aug 19, 07:29:00 pm  

प्यार के साथ गम का रिश्ता कितनी सादगी के साथ जोड़ा है दी आपने
बहुत खूब ....
बहुत अच्छी रचना है ...बधाई ..!

rashmi ravija Thu Aug 19, 07:37:00 pm  

सच कहा....इश्क की किस्मत में गम के घुंघरू और अश्कों के मोती ही
होते हैं...

संजय भास्कर Thu Aug 19, 07:38:00 pm  

एक अलग भाव दिया है आपने……………सुन्दर रचना।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक Thu Aug 19, 07:50:00 pm  

बहुत बढ़िया!
--
क्षणिका सच्चे मोती सी है!

kshama Thu Aug 19, 07:59:00 pm  

Alfaaz seedhe dilke paar utar jaate hain!

ana Thu Aug 19, 08:03:00 pm  

ati sundar ..........bahut achchha laga

डॉ टी एस दराल Thu Aug 19, 08:10:00 pm  

ऊपर वाला कहीं न कहीं हिसाब बराबर कर देता है ।

मनोज कुमार Thu Aug 19, 08:18:00 pm  

तमाम उम्र हथेलियों में सनसनाता है
जब हाथ किसी का हाथ में आकर छूट जाता है।

रचना दीक्षित Thu Aug 19, 08:34:00 pm  

बहुत खूब ....बहुत अच्छी रचना

ललित शर्मा-للت شرما Thu Aug 19, 08:50:00 pm  

वाह वाह-बहुत सुंदर अभिव्यक्ति संगीता जी
गागर में सागर

आभार

अनामिका की सदायें ...... Thu Aug 19, 09:03:00 pm  

आप की रचना 20 अगस्त, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
http://charchamanch.blogspot.com

आभार

अनामिका

मनोज कुमार Thu Aug 19, 09:05:00 pm  

आपकी इस क्शह्णिका पर एक और शे’र अर्ज़ है

जिसको चाहा वही मिला होता
तो मुहब्बत मज़ाक़ हो जाती

टिप्पणी बाद में
अभी आंसू थमे तो .....

महफूज़ अली Thu Aug 19, 09:29:00 pm  

बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति....

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' Thu Aug 19, 09:33:00 pm  

बहुत खूब संगीता जी.
किसी शायर ने सच ही कहा है-
कोई हद ही नहीं शायद मुहब्बत के फ़साने की
सुनाता जा रहा है जिसको जितना याद आता है.

काजल कुमार Kajal Kumar Thu Aug 19, 09:51:00 pm  

छोटा सा तीर घाव गंभीर. सुंदर.

Udan Tashtari Thu Aug 19, 11:40:00 pm  

क्या बात है-बहुत खूब!!

दीपक 'मशाल' Fri Aug 20, 02:53:00 am  

बाप रे दो मिनट तो सोचने में ही लग गए.. नए नए प्रतीक ला रही हैं आप.. बधाई दी..

Sadhana Vaid Fri Aug 20, 03:47:00 am  

आपकी हर रचना लाजवाब होती है साथ ही हमें भी लाजवाब कर जाती है ! इतनी गहरी और गंभीर बात आप थोड़े से शब्दों में कितनी आसानी से कह देती हैं ! क्या कहूँ ! बहुत बहुत बहुत खूब !

संगीता पुरी Fri Aug 20, 05:34:00 am  

इश्क की किस्मत में गम के घुंघरू और अश्कों के मोती .. क्‍या कल्‍पना है !!

Arvind Mishra Fri Aug 20, 07:42:00 am  

अहसास के मोती ...

Sonal Rastogi Fri Aug 20, 07:51:00 am  

wah wah sangeeta ji... mere dil ki baat likh di

राजभाषा हिंदी Fri Aug 20, 08:04:00 am  

सुंदर प्रस्तुति!
राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है।

ALOK KHARE Fri Aug 20, 11:30:00 am  

bahut badi baat, message
ek laghu kavita ke madhyam se

badhai sangeeta Di

anjana Fri Aug 20, 01:13:00 pm  

सुन्दर अभिव्यक्ति।

पी.सी.गोदियाल Fri Aug 20, 01:48:00 pm  

सुंदर अभिव्यक्ति संगीता जी !

रेखा श्रीवास्तव Fri Aug 20, 03:05:00 pm  

इश्क और अश्क में इतना गहरा रिश्ता है कि इनमें चाहे रोड़े आये या न आये, बिना अश्कों के इश्क मुनासिब ही नहीं है. बहुत गहरी बात कही है. वैसे सच यहीहै.

रंजना Fri Aug 20, 04:11:00 pm  

ओह...इतने संक्षेप में कितनी बड़ी बात कह दी आपने...
प्रेम में पगा ह्रदय हर्ष हो या विषाद किसी भी अवस्था में अपनी संगिनी "आंसू" का साथ नहीं छोडती..
रचना का माधुर्य और चमत्कार बस निःशब्द कर देने वाला है..

रंजना [रंजू भाटिया] Fri Aug 20, 05:05:00 pm  

कम लफ़्ज़ों में बहुत गहरी बात कह दी आपने बहुत सुन्दर

Asha Fri Aug 20, 06:53:00 pm  

बहुत भाव पूर्ण रचना |बधाई
आशा

arun c roy Fri Aug 20, 07:38:00 pm  

बहुत संवेदनशील रचना !

सुज्ञ Fri Aug 20, 07:45:00 pm  

वाह दीदी,

इसे कहूंगा, समस्या की पहचान।

कुछ ही शब्दो में

विनोद कुमार पांडेय Fri Aug 20, 11:53:00 pm  

बहुत सुंदर कम से कम शब्दों में एक बेहतरीन भाव..भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए आभार

lokendra singh rajput Sat Aug 21, 01:06:00 am  

कम्बखत इश्क है ही ऐसी चीज।

डॉ. हरदीप संधु Sat Aug 21, 01:19:00 pm  

कम लफ़्ज़ और गहरी बात
वाह! वाह !

दिगम्बर नासवा Sat Aug 21, 01:48:00 pm  

इश्क़ दर्द ही देता है अधिकतर ...
सच कहा है इश्क़ और आँसुओं का साथ जीवन भर का है ...

Babli Sat Aug 21, 03:34:00 pm  

वाह वाह क्या बात है! गहरे भाव के साथ उम्दा रचना!

अरुणेश मिश्र Sat Aug 21, 07:42:00 pm  

प्रेम कहता है-
जहाँ हम हैँ ।
वहाँ गम हैं ।
प्रशंसनीय रचना ।

upendra Sun Aug 22, 12:37:00 am  

प्रेम का सहज वर्णन..
गम इसलिए कि दर्द के बिना प्रेम की मिठास का पता नहीं

Gourav Agrawal Sun Aug 22, 09:33:00 am  

इश्क के पैर और गम के घूँघरू
क्या बात है .. बड़ी गहरी कल्पना है संगीता जी

रजनी नैय्यर मल्होत्रा Sun Aug 22, 12:30:00 pm  

sangeeta didi ishk ke kismat me gum ke ghunghru aur ashko ke moti hain fir bhi ये har dil me bazta hua saaj hai ,jise koi sari uamr baza leta hai aur koi iske tut jane se khud bikhar jata hai .......kafi diono baad aapki rachnayen padi maine ........ hamesha se maine kaha hai aapki rachnayen marm ko chhuti hain kabhi mere blog par bhi aaiye ....

ज्योति सिंह Wed Aug 25, 05:57:00 pm  

इश्क के पैरों में
ना जाने क्यों
गम के घुंघरू
बंध जाते हैं
sach hi to hai ,ati sundar kaha aapne .

shaffkat Mon Aug 30, 12:03:00 pm  

नरेश कुमार शाद साब ने लिखा है
तू मेरे गम में ना हँसती हुवी आँखों को रुला
में तो मर मर के भी जी सकता हूँ मेरा क्या है
दर्दे दिल की खलीष मेरे ही सीने में रहने दे
तू तो आँखों से भी रो सकता है तेरा क्या है
एक बड़े शायर का कलाम आपकी नज़्म को समर्पित

Virendra Singh Chauhan Fri Sep 03, 08:27:00 pm  

Ishq aisa hi hota hai..Sahi likha hai aapne....

About This Blog

Labels

Lorem Ipsum

ब्लॉग प्रहरी

ब्लॉग परिवार

Blog parivaar

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

लालित्य

  © Free Blogger Templates Wild Birds by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP