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सीला - सीला सा

>> Monday, 23 August 2010

सहेज लिए 

मैंने 

तेरे आंसू 

सारे के सारे 

अपनी कमीज़ की

जेब में 

अब 

हर पल 

मेरा दिल 

सीला - सीला सा 

रहता है ...


84 comments:

मनोज कुमार Mon Aug 23, 12:11:00 pm  

क्या बात है?!!!!
लाजवाब पोस्ट।
अभि तो बस इतना ही
कि.....

उसने कहा कौन सा तोहफा मैं तुम्हे दूँ
मैंने कहा वही आंसू जो तेरी आंखों से ढलकने को है

वन्दना Mon Aug 23, 12:14:00 pm  

बेहद सुन्दर भाव भर दिये हैं……………………बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' Mon Aug 23, 12:16:00 pm  

behad shandar nazm hai mumma.... jeb aansu...waah ......chamatkari nazm hai ,,,,, iski image bhi kitni pyari ban rahi hai .... :)

Mukesh Kumar Sinha Mon Aug 23, 12:53:00 pm  

kisi ki aanshu ko kisi ke dil se jor diya............di!!

aap sachmuch lajabab ho.....:)

Mukesh Kumar Sinha Mon Aug 23, 12:53:00 pm  

kisi ki aanshu ko kisi ke dil se jor diya............di!!

aap sachmuch lajabab ho.....:)

Deepak Shukla Mon Aug 23, 01:16:00 pm  

Hi Di...

Aansu se kandhen bheegen...
aur seele rahte sabke dil...
priyatam jab milta hai kisi ko..
Jo na us se raha ho mil...

Behtareen Bhavabhivyakti...

Deepak...

arun c roy Mon Aug 23, 02:04:00 pm  

भावों को व्यक्त करने के लिए शब्दों के अधिकता नहीं चाहिए.. आपकी रचनाये इसका उदहारण हैं.. बहुत भावपूर्ण कविता !

Shekhar Suman Mon Aug 23, 03:02:00 pm  

kya baat hai...
bahut hi lajawab rachna....

ALOK KHARE Mon Aug 23, 03:47:00 pm  

bahut khoob likha di

grr8 composition

Udan Tashtari Mon Aug 23, 04:07:00 pm  

हर पल सीला सीला सा...बहुत सुन्दर.

डा. अरुणा कपूर. Mon Aug 23, 04:07:00 pm  

आंसू भी अनमोल रतन जैसे होते है!....सुंदर अनुभूति!

राजेश उत्‍साही Mon Aug 23, 04:43:00 pm  

गले मेरे लगकर रोई थी वो
तभी में कहूं
कमीज की जेब में
कुछ मोती से हैं।

पी.सी.गोदियाल Mon Aug 23, 04:51:00 pm  

लाजवाब, बहुत सुन्दर !

ललित शर्मा-للت شرما Mon Aug 23, 04:53:00 pm  

वाह!सीळा-सीळा सा,बहुत खूब बात कही।

आभार

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' Mon Aug 23, 05:08:00 pm  

छोटी नज़्म...
बडे़ गहरे भाव...
यानी...
गागर में सागर.

Avinash Chandra Mon Aug 23, 05:24:00 pm  

वाह! कितनी प्यारी सी नज़्म हुई है. :)

ajit gupta Mon Aug 23, 05:37:00 pm  

बढिया है।

Ashok palmist blog Mon Aug 23, 06:17:00 pm  

दीदी नमस्कार ! आँसु छुपाने से भी छिपते नहीँ, किसी ना किसी रुप मेँ सामने आते ही हैँ क्योँकि ये वाष्पीकृत होते हैँ, कहीँ-कहीँ तो ये बहुत ही बरसते हैँ। बहुत ही गहरे भाव लिए हुए रचना हैँ। अति सुन्दर पंक्तियाँ। -: VISIT MY BLOG :- पूछता कौन हैँ परिन्देँ से तू किस डाली का महमान हैँ..........कविता को पढ़ने के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकती हैँ।

Coral Mon Aug 23, 06:20:00 pm  

बहुत ही खूबसूरत!

रचना दीक्षित Mon Aug 23, 06:22:00 pm  

बडे़ गहरे भाव बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

संगीता स्वरुप ( गीत ) Mon Aug 23, 06:34:00 pm  

सभी पाठकों का आभार ...आप आये हौसला बढा ....

@@ मनोज जी ,

आपका शेर लाजवाब है ..

@@ राजेश जी ,

आपकी पंक्तियों से मन मुग्ध हो गया ...

आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) Mon Aug 23, 06:34:00 pm  

सभी पाठकों का आभार ...आप आये हौसला बढा ....

@@ मनोज जी ,

आपका शेर लाजवाब है ..

@@ राजेश जी ,

आपकी पंक्तियों से मन मुग्ध हो गया ...

आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) Mon Aug 23, 06:48:00 pm  

Rekha Srivastava to me


क्या बात है? ख्यालों की दौड़ इतनी तेज और धारदार है कि संचय की परिधि और अहसास को कहाँ से जोड़ दिया?
बहुत बहुत मोहक प्रस्तुति.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक Mon Aug 23, 06:56:00 pm  

कमीज, जेब और आँसुओं का सामंजस्य तो बहुत सुन्दर रहा!

ताऊ रामपुरिया Mon Aug 23, 07:17:00 pm  

बहुत आनंदित करते से शब्द को आपने पिरो दिया है, मौसम भी सीला सीला सा ही है आजकल.

बहुत आभार.

रामराम

Sadhana Vaid Mon Aug 23, 07:49:00 pm  

आज आपने फिर धमाका किया है ! बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ हैं ! बस बार-बार पढती ही जा रही हूँ ! कितनी नाज़ुक बात आप कितने दम-ख़म से चंद शब्दों में कह देती हैं ! कमाल है !

rashmi ravija Mon Aug 23, 08:05:00 pm  

तो दिल के सीला सीला सा रहने का राज़ ये है.....सुन्दर नज़्म

rashmi ravija Mon Aug 23, 08:05:00 pm  

तो दिल के सीला सीला सा रहने का राज़ ये है.....सुन्दर नज़्म

PRIYANKA RATHORE Mon Aug 23, 08:08:00 pm  

दिल में उतर जाने वाली कविता है !
बहुत सुंदर !

धर्म सिंह........;;;;;.. (इक अजनबी) Mon Aug 23, 08:09:00 pm  

दी नमस्ते ....
बहुत ही खूब सूरत रचना ..
मंत्रमुग्ध हो गया मन ....

अजय कुमार Mon Aug 23, 08:34:00 pm  

खूबसूरत रचना ,अच्छे भाव ।

सम्वेदना के स्वर Mon Aug 23, 09:01:00 pm  

संगीता दी,
आँसुओं को हमेशा यही सिला मिला है,
चाक जिगर सिला नहीं पर दिल सीला सीला है.

आपकी इस नज़्म ने दिल को छू लिया. बे-ह-त-री-न!!

प्रवीण पाण्डेय Mon Aug 23, 09:11:00 pm  

आँसू सहेज लेना भी कठिन रहा मेरे लिये, सदा ही।

परमजीत सिँह बाली Mon Aug 23, 10:07:00 pm  

भावपूर्ण रचना। बधाई।

दीर्घतमा Mon Aug 23, 10:33:00 pm  

आपने तो गागर में सागर भर दिया है
छोटी सी कबिता भाव कितने अच्छे.

मनोज कुमार Mon Aug 23, 10:38:00 pm  

मानवीय संवेदना की आंच में सिंधी हुई ये कविता हमें मानवीय रिश्ते की गर्माहट प्रदान करती है।

अनामिका की सदायें ...... Mon Aug 23, 10:40:00 pm  

हमेशा की तरह ये रचना भी अंतस में कुछ निशाँ छोड़ गयी. बुत सुंदर रचना.

देरी के लिए क्षमा चाहती हूँ.

संगीता पुरी Mon Aug 23, 10:46:00 pm  

अब

हर पल

मेरा दिल

सीला - सीला सा

रहता है ...
वाह !!

महफूज़ अली Tue Aug 24, 12:34:00 am  

आपकी रचना बहुत अच्छी लगी.....

धर्म सिंह........;;;;;.. (इक अजनबी) Tue Aug 24, 04:42:00 am  

दी आपको भी रक्षाबंधन की बहुत बहुत सुभकामनाएँ

राजभाषा हिंदी Tue Aug 24, 07:01:00 am  

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.
हिन्दी ही ऐसी भाषा है जिसमें हमारे देश की सभी भाषाओं का समन्वय है।

sandhyagupta Tue Aug 24, 09:17:00 am  

अत्यंत सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति.शुभकामनायें.

Mithilesh dubey Tue Aug 24, 10:08:00 am  

दादी आप तो निशब्द कर देती हैं, दिल को छू गयी आपकी रचना ।

Babli Tue Aug 24, 11:45:00 am  

रक्षाबंधन पर हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!
बहुत खूब लिखा है आपने! गहरे भाव के साथ लिखी हुई उम्दा रचना !

रानीविशाल Tue Aug 24, 11:51:00 am  

kam shabdon me bahut khubsorat jasbaat bayan karati rachana...!!
Aabhar

PKSingh Tue Aug 24, 02:35:00 pm  

…बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

shama Tue Aug 24, 02:57:00 pm  

Kahan se aise heere moti samet laate hain aap?

दिगम्बर नासवा Tue Aug 24, 03:37:00 pm  

बहुत खूब ... ग़ज़ब की कल्पना है .... कवि की उड़ान कहाँ तक है ... बहुत लाजवाब ....

डॉ टी एस दराल Tue Aug 24, 05:31:00 pm  

गीला गीला --वाह !
शुभकामनायें ।

काजल कुमार Kajal Kumar Tue Aug 24, 06:23:00 pm  

वाह अत्यंत सुंदर कोमल भावपूर्ण कवित्त.

VIJAY KUMAR VERMA Wed Aug 25, 01:00:00 am  

bahut hee sundar aur bhawpurn rachna

VIJAY KUMAR VERMA Wed Aug 25, 01:00:00 am  

bahut hee sundar aur bhawpurn rachna

dipayan Wed Aug 25, 02:09:00 pm  

ये वाली रचना भी हर बार की तरह दिल को छू गई । अति सुन्दर । बधाई ।

स्वाति Wed Aug 25, 03:52:00 pm  

सुन्दर भाव...

shikha varshney Wed Aug 25, 04:05:00 pm  

दी ! शीर्षक बहुत ही सुन्दर है :) और नज़्म तो बेहतरीन ....
क्या भाव हैं वाह .

निर्झर'नीर Wed Aug 25, 04:29:00 pm  

wah wah wah wah wah wah ji wah
awaysome ...........kya baat kahi h.

............................

uniqe ...exceelent .

Taru Thu Aug 26, 03:27:00 pm  

behad khoobsoorat abhivyakti hai Mumma........jeb aur ashqon ka rishta bahut achha laga...:):)

राजकुमार सोनी Thu Aug 26, 09:30:00 pm  

अब इतनी सारी टिप्पणियों के बाद कुछ बचता है क्या
हां...
शायद बचता है

मैं कमीज बनना चाहता हूं

सुमन'मीत' Thu Aug 26, 10:30:00 pm  

wah .....what a thought.........
bahut sundar.............

रचना सागर Fri Aug 27, 11:37:00 am  

अच्छे भाव..सुंदर

सतीश सक्सेना Fri Aug 27, 12:17:00 pm  

यह क्या लिख दिया आपने ....सोचता ही रह गया कल्पना शक्ति की यह बेजोड़ मिसाल दुर्लभ है ! शुभकामनायें !

रंजना Fri Aug 27, 03:17:00 pm  

वाह...वाह...वाह....लाजवाब...बेहतरीन....!!!! एकदम घाव करे गंभीर टाईप की रचना.....

Vijay Pratap Singh Rajput Sat Aug 28, 12:21:00 pm  

बहुत सुन्दर ...

********************
छोड़ दे माँ - बाप को किसी के लिए ?
http://sometimesinmyheart.blogspot.com/2010/08/blog-post_27.html

anjana Sat Aug 28, 04:05:00 pm  

सुंदर भाव..

Mrs. Asha Joglekar Sun Aug 29, 06:48:00 am  

बहुत ही भा गई ये आपकी कविता, इसीसे पिछली भी आठ दस पढ लीं । शब्दों का इस्तेमाल का ये कमाल आप की खूबी है ।
आंसूओं को जेब में सहेजना वाह ।

Din Sun Aug 29, 07:12:00 pm  

Sangeeta ji..bahut pyaari nazm hai..ek khoobsurat drishyaubharkar saamne aa gaya nazaron ke...

Parul Mon Aug 30, 10:36:00 am  

hamesha ki tarah nayab moti !

shaffkat Mon Aug 30, 11:50:00 am  

जितनी छोटी कविता उतना सा मगर दिल से निकला कमेन्ट
खूबसूरत

Vivek Rastogi Sun Sep 05, 10:23:00 am  

वाह वल्लाह क्या लिखा है... वाह रे कवि मन..

पंख Sat Sep 11, 05:52:00 pm  

bohot hi mast.... super like... :)

'साहिल' Sat Sep 11, 07:17:00 pm  

अदभुत और सुन्दर रचना!
शुभकामनाएं

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