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हुनर

>> Saturday, 20 March 2010


उदासी सी मन पर



यूँ ही उतर आई


किसी ने कहा कि


ये भी एक हुनर है .




जो सीख लें हुनर तो


बुराई क्या है


हर हुनर को सीखने का


हौसला होना चाहिए
 
 
 
 
 

25 comments:

Dr.R.Ramkumar Sat Mar 20, 06:01:00 am  

हुनर सीखने में क्या बुराई है ? हौसला होना चाहिए
अतिसुन्दर

Dr.R.Ramkumar Sat Mar 20, 06:01:00 am  

पेंटिंग मार्मिक है

ताऊ रामपुरिया Sat Mar 20, 09:23:00 am  

बहुत लाजवाब बात कही आपने.

रामराम.

मनोज कुमार Sat Mar 20, 09:56:00 am  

बहुत अच्छी प्रस्तुति। सादर अभिवादन।

खुशदीप सहगल Sat Mar 20, 10:05:00 am  

कभी सुख कभी दुख यही ज़िंदगी है,
ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घड़ी है,
नये फूल कल फिर डगर में खिलेंगे,
उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे...

जय हिंद...

Apanatva Sat Mar 20, 12:05:00 pm  

kushdeep jee ne mere man kee baat kah dee .
hameshe kee tarah ek bhavuk rachana.......

ALOK KHARE Sat Mar 20, 12:14:00 pm  

ek dam sahi bat kahi di aapne

manav vikash vigyan aur adytam Sat Mar 20, 03:27:00 pm  

bahoot hee achha bahoot hee sakoon dene vala hai

Babli Sat Mar 20, 03:30:00 pm  

वाह! बहुत खूब! सही बात को बहुत ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है!

रचना दीक्षित Sat Mar 20, 05:46:00 pm  

इतनी कम पंक्तियों में एक लम्बी दास्ताँ वाह वाह !!!!

Ravinderkumar Sat Mar 20, 06:00:00 pm  

बेहतरीन भावनाएं, बेहतरीन पिरोया है आपने, बहुत बहुत बधाई
"बड़ी पुरपेच रही उनसे मिलके ज़िंदगी
कहा था 'रस्ता बड़ा सीधा है' दोस्त ने मेरे
इक लम्हे को गले मिल,उम्र भर का ग़म
हुनर ये नया सीखा है दोस्त ने मेरे
चलो छलके अपना गरेबाँ तैयार कर लो
खंजर एक नया खरीदा है दोस्त ने मेरे "

sangeeta swarup Sat Mar 20, 07:06:00 pm  

आप सभी का बहुत बहुत आभार...

खुशदीप जी और रविन्द्र कुमार जी ,

आपकी लिखी पंक्तियों ने मन मोह लिया...शुक्रिया

shikha varshney Sat Mar 20, 08:22:00 pm  

वाकई ये एक हुनर है जो सीख लिया तो आसान सी हो जाती है जिन्दगी....बहुत सुन्दर कविता है

अनामिका की सदाये...... Sat Mar 20, 11:07:00 pm  

हमेशा की तरह बहुत गहरे भाव लिए ये रचना और दुसरो को भी हुनर सीखने का रास्ता बताती रचना .
बधाई.

anjana Sun Mar 21, 01:54:00 pm  

बहुत सही बात कह दी है आपने । बहुत बढिया...

Arvind Mishra Sun Mar 21, 05:23:00 pm  

बहुत गहरी बात कह दी आपने -अब मानव के मूल भावों का भी पेशेवारीकरण जरूरी होता जा रहा है !

त्रिपुरारि कुमार शर्मा Sun Mar 21, 11:39:00 pm  

...और आप इस हुनर में माहिर हैं !
नमस्कार !

सुमन'मीत' Mon Mar 22, 12:55:00 am  

हर रचना लाजवाब है

JHAROKHA Mon Mar 22, 05:08:00 pm  

kya baat hai bahut hi sundar prastuti.badhai ek hunar aur sikhlane ke liye.

हरकीरत ' हीर' Tue Mar 23, 05:42:00 pm  

ये उदासी का हुनर मुबारक आपको ......!!

वन्दना अवस्थी दुबे Tue Mar 23, 11:14:00 pm  

हर हुनर को सीखने का हौसला होना चाहिये. सच है. बहुत सुन्दर रचना.

kshama Wed Mar 24, 05:04:00 pm  

Kam alfaaz aur gahari baat!
Ramnavmiki anek shubhkamnayen!

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