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लिबास ख्वाब का

>> Sunday, 16 May 2010





ख्यालों के 

रेशमी  धागों से 

ख़्वाबों का 

पैरहन  बुनते हुए 

एक फंदा 

छूट  गया 

जुबान की तल्ख़ 

सलाइयों ने 

लिबास ख्वाब का 

तार - तार कर दिया.









51 comments:

राजेन्द्र मीणा Sun May 16, 03:35:00 pm  

वाह ! शब्द कम परन्तु गहराई अधिक .....

दिलीप Sun May 16, 03:38:00 pm  

waah badi kalatmak rachna bahut khoob...

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" Sun May 16, 03:39:00 pm  

इतने कम शब्दों में आप कितनी गहरी बात कह गयी ... बहुत सुन्दर !

वन्दना Sun May 16, 03:45:00 pm  

गज़ब कर देती हैं आप्……………।गागर में सागर भर देती हैं।

अनामिका की सदाये...... Sun May 16, 03:47:00 pm  

जुबान की तल्ख़
सलाइयों ने
लिबास ख्वाब का
तार - तार कर दिया.

इन पंक्तियों ने मानो दिल ही निकाल दिया.

सच में सलाइयो ने
तल्खी तो दिखाई..
पर यही सलाइया तो
उठाएंगी..
गिरे हुए फंदे..
खाबो के....!!

दिल को छू गयी ये नन्ही सी नज़्म.
बधाई.

'उदय' Sun May 16, 04:23:00 pm  

...सुन्दर भाव !!!

kshama Sun May 16, 04:41:00 pm  

Kitni sahajtase kah diya! Khwabon ke pairhan kiske naseeb me hote hai?

चैन सिंह शेखावत Sun May 16, 04:43:00 pm  

रूपक बड़ा सुंदर बन पड़ा है.
थोड़े शब्दों में गहरे भाव.
बधाई .

Arvind Mishra Sun May 16, 04:43:00 pm  

रुमान और यथार्थ को उकेरती सशक्त रचना

Sonal Rastogi Sun May 16, 04:44:00 pm  

बहुत खूब हर पंक्ति मनभावन

Sadhana Vaid Sun May 16, 04:47:00 pm  

बहुत भावपूर्ण और सुन्दर नज़्म ! जुबान की ख़्वाबों को बुनने और उधेड़ डालने की कूवत को चंद शब्दों में ही कितनी कुशलता से आपने बयान कर दिया है ! तारीफ़ के लिए अल्फाज़ कम पड़ रहे हैं ! मेरा आभार स्वीकार करें !

M VERMA Sun May 16, 04:55:00 pm  

फन्दा जब छूटता है तो ऐसा ही होता है
हमारे देश की स्थिति कुछ ऐसी ही है. शायद शुरूआती दौर में फन्दे कसे नहीं गये या छूट गये, तभी तो तार तार हो रही है माँ का आँचल
बेहतरीन रचना
बेमिसाल

अजय कुमार Sun May 16, 05:19:00 pm  

आजकल तो बहुत कुछ तार तार हो रहा है ।अच्छी रचना ।

काजल कुमार Kajal Kumar Sun May 16, 05:20:00 pm  

सही बात है ज़ुबान से चाहे जैसा काम लिया जा सकता है बहुत घ्यान देने की बात है

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक Sun May 16, 05:22:00 pm  

ख्वाब का मखमली लिबास तो आज वास्तव में तार-तार हो गया है!!

Taru Sun May 16, 05:43:00 pm  

zabardast Mummaaaaaaaaaaaa......:D

muaaaaaaaaaaah !
do baar padhi tab kahin jaake marm samajh aaya..............zubaan ki talkh salaayiaan samajh nahin aa raha tha..fir samajh aaya ki khawaab kisi ke the..doosre bande ki zubaan ne taar taar kar diya pairhan...

khoob bhaaaaaalo likha Mumma..:D

डॉ टी एस दराल Sun May 16, 05:44:00 pm  

बहुत खूब । सुन्दर ।

ललित शर्मा Sun May 16, 06:07:00 pm  

बहुत खूब
छुटा हुआ फ़ंदा ही समस्या बन जाता है।

आभार

बेचैन आत्मा Sun May 16, 08:36:00 pm  

अक्सर जुबान कि तल्ख़ सलाइयाँ ख्वाबों को तार-तार कर देती हैं.
शब्दों की जादूगरी ने अच्छे भाव पैदा किए हैं...बधाई.

मनोज कुमार Sun May 16, 09:03:00 pm  

इस लघु कविता में प्रत्यक्ष अनुभव की बात की गई है, इसलिए सारे शब्द अर्थवान हो उठे हैं।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' Sun May 16, 10:15:00 pm  

badi alag alag upmaayen hain mumma...khub achhi8 nazm lagi ye to . :)

डॉ. मनोज मिश्र Sun May 16, 10:17:00 pm  

जन्मदिवस की शुभकामना के लिए आपको बहुत धन्यवाद.

रावेंद्रकुमार रवि Sun May 16, 10:25:00 pm  

बहुत बढ़िया प्रतीकों का प्रयोग करते हुए
बहुत बढ़िया ढंग से
आपने अपनी बात रखी है
इस नज़्म में!
--
बौराए हैं बाज फिरंगी!
हँसी का टुकड़ा छीनने को,
लेकिन फिर भी इंद्रधनुष के सात रंग मुस्काए!

Deepak Shukla Sun May 16, 10:42:00 pm  

Hi..

Ek purana sher yaad aa gaya..

Kudrat ko napasand hai sakhti juban main,
rakhi nahi hai esliye haddi juban main..

Sundar kavita.. WAH..

DEEPAK..

Udan Tashtari Sun May 16, 11:10:00 pm  

सुन्दर रचना!

shikha varshney Sun May 16, 11:13:00 pm  

इतने ही नाजुक होते हैं ख्वाब ..बस इसे ही तार तार होते देर नहीं लगती..गहराई लिए हुए रचना हुई है.

Kumar Jaljala Sun May 16, 11:41:00 pm  
This comment has been removed by a blog administrator.
महफूज़ अली Sun May 16, 11:47:00 pm  

सुंदर शीर्षक के साथ..... बहुत सुंदर रचना...

सुमन'मीत' Sun May 16, 11:59:00 pm  

वाह संक्षिप्त शब्दों में गहरी बात कह दी ।

PKSingh Mon May 17, 12:24:00 am  

... बहुत सुन्दर !

वाणी गीत Mon May 17, 10:32:00 am  

पैरहन बुनते हुए
एक फंदा छूट गया
जुबान की तल्ख़ सलाइयों ने
लिबास ख्वाब का
तार - तार कर दिया...
जुबान की तल्खी किसी ख्वाब लो तार- तार ना करे ...
अच्छी प्यारी सी कविता ...!!

sangeeta swarup Mon May 17, 11:23:00 am  

सभी प्रबुद्ध पाठकों का आभार ....


########################

Kumar Jaljala ji ,

हो सकता है कि आप बहुत अच्छी प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हों.....आपके इस प्रयास से शायद महिला ब्लोगर और प्रोत्साहित हों....

पर मैं अपने सभी सम्मानित पाठकों से निवेदन करना चाहूंगी कि मुझे इस प्रतियोगिता में शामिल ना करें....मैंने जब भी कुछ लिखा है मन से लिखा है...किसी प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए नहीं....
आशा है सभी साथी मेरी भावनाओं को समझेंगे....

शुक्रिया

अक्षिता (पाखी) Mon May 17, 11:55:00 am  

बहुत सुन्दर और प्यारी रचना..आपको बधाई.

_______________
'पाखी की दुनिया' में आज मेरी ड्राइंग देखें...

दिगम्बर नासवा Mon May 17, 12:33:00 pm  

ज़ुबान .... ये कम्बख़्त ज़ुबान ही तो होती है जो सब कुछ बिगाड़ देती है .... गहरी बात को बहुत ही सूक्ष्मता से रक्खा है आपने ... बहुत लाजवाब रचना .....

अजय कुमार झा Mon May 17, 01:39:00 pm  

संगीता जी , बहुत ही उम्दा रचना । शब्दों का चयन और उनका उपयोग आपने बडी ही खूबसूरती से किया है । बधाई और शुभकामनाएं

सलीम ख़ान Mon May 17, 01:42:00 pm  

वाह ! शब्द कम परन्तु गहराई अधिक .....

श्रेष्ठ ब्लॉगरिन बहन फ़िरदौस

rashmi ravija Mon May 17, 02:04:00 pm  

बहुत ही ख़ूबसूरत ख़याल हैं...और सच..ऐसा ही होता है

माधव Mon May 17, 06:43:00 pm  

बेहतरीन

http://madhavrai.blogspot.com/

Shri"helping nature" Mon May 17, 10:11:00 pm  

lajvab nihayat khubsurat waha waha

स्वाति Tue May 18, 12:02:00 pm  

कम शब्दों में गहरी और ख़ूबसूरत बात.शुभकामनाएं !!

ओम पुरोहित'कागद' Wed May 19, 03:52:00 pm  

गागर मेँ सागर!
बधाई!

अरुणेश मिश्र Wed May 19, 04:44:00 pm  

शब्द के बलाघात के ही अनेकानेक परिणाम हैं ।
आप्त रचना लिख दी आपने बधाई ।

रचना दीक्षित Wed May 19, 05:21:00 pm  

बेमिसाल
सच इन छूटे हुए फंदों को उठाने में ही सारी उम्र निकल जाती है अगर उठाना भी चाहो तो

निर्झर'नीर Tue May 25, 03:50:00 pm  

एक फंदा
छूट गया


awaysome ...creation

Priya Mon May 31, 11:38:00 pm  

जुबान की तल्ख़

सलाइयों ने

लिबास ख्वाब का

तार - तार कर दिया.

wonderful

Deepali Sangwan Sat Jun 12, 09:05:00 pm  

shaandar nazm kahi hai masi..

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