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कुछ तो लोग कहेंगे .....

>> Sunday, 30 May 2010





ओढ़ रखी थी 

जब तक 

खामोशी 

लोग तब 

पर्त- दर - पर्त 

कुरेदा करते थे ....


आज  जब 

खामोशी ने 

तोड़ दिए हैं 

मौन के घुँघरू 

लोग अब उसे 

वाचाल कहते हैं ..




.

46 comments:

shikha varshney Sun May 30, 05:22:00 pm  

यही तो परेशानी है किसी भी तरह जीने नहीं देते लोग .बेहतरीन अभिव्यक्ति दी !

Shekhar Suman Sun May 30, 05:28:00 pm  

yeh to manaw ka charitra hi hai...
bahut khub likha hai aapne....

स्वप्निल कुमार 'आतिश' Sun May 30, 05:31:00 pm  

Yahi to samsya hai..is tarah bhi bure us tarah bhi bure..dunia ke dimag ka koi thikana nahi.. Chaalaa chakatti nazm mumma.. :-)

अनामिका की सदाये...... Sun May 30, 05:34:00 pm  

kuchh to log kaheng...title hi apki baat ka jawab hai.... sunder nazm.

मनोज कुमार Sun May 30, 05:44:00 pm  

वाह ... ये खामोशी भी क्या बात-चीत की कला है!

डॉ टी एस दराल Sun May 30, 05:59:00 pm  

सही कहा जी , लोगों का काम ही है कहना ।
लेकिन आजकल लोग भी कहाँ परवाह करते हैं ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक Sun May 30, 06:02:00 pm  

वाचाल की बहुत ही सुन्दर परिभाषा दी है आपने!

दिलीप Sun May 30, 06:19:00 pm  

sahi baat kahi jab tak na kaho sab theek aur jahan kuch kaha...bhoochal aa jaata hai

M VERMA Sun May 30, 07:18:00 pm  

जख्म कुरेदे ही जाते है

पर मौन समाधान तो नहीं

बहुत सुन्दर रचना

aarya Sun May 30, 07:59:00 pm  

सादर वन्दे !
दोनों कि अपनी एक रीति होती है, मौन का घुंघुरू तोड़ने के लिए कुरेदना आवश्यक हो जाता है|
वैसे इस छोटी सी कविता का बहु ही विशाल अर्थ है....
रत्नेश त्रिपाठी

Udan Tashtari Sun May 30, 08:09:00 pm  

हर हाल में ऊँगली उठेगी ही...

उम्दा अभिव्यक्ति!

रश्मि प्रभा... Sun May 30, 08:29:00 pm  

ओढ़ रखी थी

जब तक

खामोशी

लोग तब

पर्त- दर - पर्त

कुरेदा करते थे ..log yahi kiya karte hain

चैन सिंह शेखावत Sun May 30, 08:37:00 pm  

क्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय ....
अच्छी कविता

पी.सी.गोदियाल Sun May 30, 08:38:00 pm  

Jag kee sachchaai, chnad lafjon mein, bahut sundar sangeetaa ji.

Shekhar Kumawat Sun May 30, 08:42:00 pm  

बहुत सुंदर भाव

सुरेश शर्मा (कार्टूनिस्ट) Sun May 30, 09:02:00 pm  

सुन्दर भावपूर्ण रचना !
हमारा ब्लॉग भी आपका इन्तजार कर रहा है -
http://sureshcartoonist.blogspot.com/2010/05/blog-post_30.html#comments

दीपक 'मशाल' Sun May 30, 09:42:00 pm  

यही फितरत है ज़माने की....''कुछ तो लोग कहेंगे.. लोगों का काम है कहना..''

राजेन्द्र मीणा Sun May 30, 11:53:00 pm  

बहुत सुन्दर..... कम शब्दों में उत्तम रचना ...!

महफूज़ अली Mon May 31, 12:38:00 am  

यही तो परेशानी है किसी भी तरह जीने नहीं देते लोग .बेहतरीन अभिव्यक्ति .........

sanu shukla Mon May 31, 02:00:00 am  

achhi rachna hai...

kuchh to log kahenge,
logo ka kam hai kahna....

'उदय' Mon May 31, 08:04:00 am  

...बेहतरीन .... प्रसंशनीय !!!

खुशदीप सहगल Mon May 31, 09:00:00 am  

कौन सुनेगा, किसको सुनाए,
इसलिए चुप रहते हैं...

जय हिंद...

Arvind Mishra Mon May 31, 09:33:00 am  

लोग और दुनिया ऐसी ही होती है !

seema gupta Mon May 31, 09:42:00 am  

अब लोग वाचाल कहते हैं.....और लोगो का काम है कहना....
सुन्दर और सत्य भाव..
regards

रेखा श्रीवास्तव Mon May 31, 10:23:00 am  

कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना
न चुप से खुश न बोलने देंगे , चलो हम अपनी रास्ते खुद ही बना लेते हैं.
हम बोलेंगे तो कलम से और खामोश रहेंगे तब भी कलम बोलेगी हम नहीं.

kshama Mon May 31, 11:18:00 am  

Na bole,to kaha tum bahut khamosh rahti ho...muh khola to suna,tum bahut bolti ho..

rashmi ravija Mon May 31, 11:44:00 am  

हमेशा की तरह चंद लफ़्ज़ों में सच्चाई...बयाँ कर दी....कुछ तो लोग कहेंगे ...लोगों का काम है कहना...बस यही सोच कर इस मूक और वाचाल तमगे पर आँखें बंद कर लेनी चाहियें..

rashmi ravija Mon May 31, 11:44:00 am  

हमेशा की तरह चंद लफ़्ज़ों में सच्चाई...बयाँ कर दी....कुछ तो लोग कहेंगे ...लोगों का काम है कहना...बस यही सोच कर इस मूक और वाचाल तमगे पर आँखें बंद कर लेनी चाहियें..

SANJEEV RANA Mon May 31, 11:47:00 am  

बहुत अच्छा

अक्षिता (पाखी) Mon May 31, 11:55:00 am  

कित्ती प्यारी बात लिखी आपने...बढ़िया है.

_____________
और हाँ, 'पाखी की दुनिया' में साइंस सिटी की सैर करने जरुर आइयेगा !

वन्दना Mon May 31, 12:28:00 pm  

bilkul sahi kaha..........log kaise bhi nahi jeene dete.........atyant prabhavshali rachna.

sheetal Mon May 31, 12:56:00 pm  

chup raho to chup rehne nahi dete
kuch kehna chaho to kehne nahi dete
hai re duniya ka yeh kaisa dastur ki
hame chain se jeene nahi dete.

Babli Mon May 31, 01:45:00 pm  

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना! बिल्कुल सही कहा है आपने!

रचना दीक्षित Mon May 31, 01:58:00 pm  

सुन्दर भावपूर्ण रचना बहुत कुछ कह दिया वो भी दिल के करीब से गुजर गया

kunwarji's Mon May 31, 02:59:00 pm  

वाचाल..... सही कहा जी.....

कुंवर जी,

Avinash Chandra Mon May 31, 03:51:00 pm  

sach kitna chhota sa hota hai ..bilkul sach

Mukesh Kumar Sinha Mon May 31, 04:47:00 pm  

log jeene nahi dete..........:(
aur jeena hai to logo ke kahne se kya darna..............hai na Di!!

श्रद्धा जैन Mon May 31, 06:31:00 pm  

waqayi duniya aisi hi hai .......
kahin sakun nahi

सम्वेदना के स्वर Mon May 31, 09:11:00 pm  

जब तक मौन की भाषा लोग नहीं समझेंगे, मौन का गला घोंटते रहेंगे, तब तक मौन मुखर नहीं हो सकता. और यह समस्या बनी रहेगी! बहुत अच्छी बात कही आपने!!

Priya Mon May 31, 11:19:00 pm  

kuch to log kahenge ....logo ka kaam hai kahna ...chup bhi nahi rahne dete

रंजना [रंजू भाटिया] Tue Jun 01, 12:51:00 pm  

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति पसंद आई आपकी यह रचना शुक्रिया

Prem Farrukhabadi Wed Jun 02, 11:18:00 am  

vo chup rahen kuchh na kahen.
dekhnevaale kaho kaise rahen.
har haal mein vo pyare lagte,
jindgi ke vo ek sahare lagte.

Rachna ke bhav bade pyare hain.
nakaratmak hone kii jaroorat kya hain.sakaratmak rahen.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ Wed Jun 02, 02:06:00 pm  

संगीता जी, सादर अभिवादन।
तस्लीम-चित्र पहेली-78 की विजेता बनने की हार्दिक बधाई। आपका ईमेल आईडी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, कृपया मेरे मेल आईडी zakirlko@gmail.com पर संपर्क करने का कष्ट करें, जिससे आपको विजेता प्रमाण पत्र भेजा जा सके।

Sadhana Vaid Sun Jun 06, 07:27:00 am  

यही तो समस्या है ! ना चुप रह कर गुजर होती है ना बोल कर ! सुन्दर शब्दों में बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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