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एक चुप

>> Monday, 3 May 2010





शोखियाँ  

जो बोलीं

वो भी 

बेबसी ही थी ,

उदासी भी थी

कुछ ज़मीं के 

फासलों  से ,

यूँ तो था नहीं 

कोई  दरम्याँ   

हमारे,

बस एक चुप थी 

जो मन को 

बहुत सालती थी....


36 comments:

स्वप्निल कुमार 'आतिश' Mon May 03, 06:40:00 pm  

mumma...mummaaaaa..... ek song yad aa gayaa..

bas ek....chup si lagi hai ..naheen udaas naheen...

badi pyaari si chup hai ..jo saal rahi hai .,..

संजय भास्कर Mon May 03, 06:44:00 pm  

हमेशा की तरह आपकी रचना जानदार और शानदार है।

M VERMA Mon May 03, 06:47:00 pm  

बिन बोले जो बात कही जायेगी
उसकी धमक फिर कैसे सही जायेगी

Shekhar Kumawat Mon May 03, 06:52:00 pm  

bahut khub

ye man hi to he jo kuch kuch chahta he

Deepak Shukla Mon May 03, 07:07:00 pm  

Hi..

Jab man udaas hota..
Koi jo saath hota..
Baatain kahin hain khoti..
Aur maun mukhar hota..

DEEPAK..

अनामिका की सदाये...... Mon May 03, 07:11:00 pm  

यु तो था नहीं कोई दरमियाँ हमारे..
वाह बहुत खूब. सुंदर भावो से सजाया है. बधाई.

rashmi ravija Mon May 03, 07:11:00 pm  

मुझे तो वो गाना याद आ गया...मेरा फेवरेट.."दिल की गिरह खोल दो....चुप ना बैठो.."
सुन्दर रचना

राकेश कौशिक Mon May 03, 07:14:00 pm  

यूँ तो था नहीं कोई दरमियाँ हमारे
बस एक चुप थी जो मन को बहुत सालती थी
सच है कभी-कभी चुप शब्दों के बाण से भी ज्यादा सालती है

पी.सी.गोदियाल Mon May 03, 07:16:00 pm  

बहुत खूब , चंद लफ्जों में लम्बी-चौड़ी बात !

Arvind Mishra Mon May 03, 07:27:00 pm  

सक्षिप्त किन्तु सारभूत !

संगीता पुरी Mon May 03, 07:37:00 pm  

एक चुप .. मन को सालनेवाली .. बहुत खूब !!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" Mon May 03, 07:47:00 pm  

हमेशा की तरह सुन्दर रचना है ... मौन का निनाद बहुत शोर करता है ...

महफूज़ अली Mon May 03, 08:12:00 pm  

Silence has its own words.... बहुत अच्छी लगी यह कविता....

SAMVEDANA KE SWAR Mon May 03, 08:39:00 pm  

आपकी रचनाओं में अब तक की सबसे अनूठी रचना... कोमल भावनाओं को छूती हुई... शायद ही कोई होगा जिसने यह पल न जिया हो!! एक मेरा बड़ा ही पसंदीदा गीत याद आ गया… निदा फ़ाज़ली साहब का कलाम
चुप तुम रहो, चुप हम रहें
खामुशी को, खामुशी से
ज़िंदगी को, ज़िंदगी से
बात करने दो!
इस सिलसिले को बनाए रखिए... अच्छा लगता है.

मनोज कुमार Mon May 03, 08:39:00 pm  

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
आज इससे ज़्यादा कुछ नहीं बोलूंगा। कैसे मन मुस्काए जो पढ़ लिया है। कमाल की अभिव्यक्ति है।

ओम पुरोहित'कागद' Mon May 03, 08:51:00 pm  

एक चुप्पी १०० सवालो का जवाब होती है .मौन मनन क मौका है .दो लौगो के बीच मौन हो तो बाते दिल मे मन से होती है.

रश्मि प्रभा... Mon May 03, 10:58:00 pm  

बात है एक बूंद सी दिल के प्याले में
आते आते होठों तक तूफ़ान न बन जाये

shikha varshney Mon May 03, 11:11:00 pm  

इस कविता को पढ़कर बहुत सारे लोगों को बहुत से गाने याद आये ..मुझे भी एक याद आया बहुत ही खुबसूरत....चुप तुम रहो चुप हम रहें ख़ामोशी को ख़ामोशी से बात करने दो.

अरुणेश मिश्र Mon May 03, 11:59:00 pm  

चुप यानी जो संवादो मे दुर्लभ ।
एक अच्छी रचना ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक Tue May 04, 07:45:00 am  

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति!
चित्र भी रचना के अनुरूप ही हैं!

kunwarji's Tue May 04, 09:31:00 am  

यु तो था नहीं कोई दरमियाँ हमारे..

वाह!बहुत बढ़िया जी...

कुंवर जी,

सुलभ § सतरंगी Tue May 04, 09:53:00 am  

बस एक चुप थी हमारे दरम्याँ...
और क्या !

वन्दना Tue May 04, 05:27:00 pm  

उस चुप मे ही तो सब कुछ छुपा है………………।कभी कभी चुप बोलने से ज्यादा कचोटती है……………गज़ब के भाव भरे हैं।

Dr.R.Ramkumar Tue May 04, 10:08:00 pm  

बस एक चुप थी


जो मन को


बहुत सालती थी....


sunder

सतीश सक्सेना Wed May 05, 08:27:00 am  

वेदना की अभिव्यक्ति को बोलने की क्या आवश्यकता ?

Babli Thu May 06, 12:48:00 am  

बहुत ही सुन्दर और शानदार रचना! उम्दा प्रस्तुती!

आशीष/ ASHISH Thu May 06, 07:48:00 pm  

धड़कन बनी जुबां...
बाहों के दरमियाँ....

रचना दीक्षित Fri May 07, 12:04:00 pm  

बस एक चुप थी
जो मन को
बहुत सालती थी
मौन में भी बहुत कुछ कहा जाता है बस इसकी भाषा आनी चाहिए

Gourav Agrawal Fri May 07, 04:57:00 pm  

जन्मदिन की बधाई :)

Deepali Sangwan Wed May 12, 03:43:00 pm  

यूँ तो था नहीं

कोई दरम्याँ

हमारे,

बस एक चुप थी

जो मन को

बहुत सालती थी..

too good.. waah..

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