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लोरी

>> Thursday, 28 January 2010




कागज़ पर उतार



अपने जज्बातों को


रख लिया है सिराहने


जब भी बेचैन हुए


लोरी सुना दी

8 comments:

shikha varshney Thu Jan 28, 03:42:00 pm  

kya baat hai vahi to karte hain ham..jane kab se tabhi to jinda hain ..wah wah.

rashmi ravija Thu Jan 28, 03:59:00 pm  

क्या बात है..सागर में गागर भर दिया आपने तो....बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति

मनोज कुमार Thu Jan 28, 09:41:00 pm  

बेहतरीन। लाजवाब।

अनामिका की सदाये...... Fri Jan 29, 12:00:00 am  

एक दम सही बात. सच में कागज़ पर उतारे शब्द कई बार लोरी का ही काम करते है.

sandhyagupta Fri Jan 29, 04:20:00 am  

Gagar me sagar bhar layi hain aap.Shubkamnayen.

sada Fri Jan 29, 10:47:00 am  

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द ।

नीरज गोस्वामी Sat Jan 30, 12:25:00 pm  

वाह...वाह...बहुत खूब...अच्छी रचना...
नीरज

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