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इम्तिहान

>> Friday, 17 October 2008

लम्हा दर लम्हा हम इम्तिहान देते रहे ,
तेरी दूरी का दर्द भी हम सहते रहे ,
हद से गुज़र गई है दर्दे गम की बरसात ,
हर पल में न जाने कितनी बार मरते रहे ।

6 comments:

taanya Sat Oct 18, 09:44:00 am  

लम्हा दर लम्हा हम इम्तिहान देते रहे ,
तेरी दूरी का दर्द भी हम सहते रहे ,
हद से गुज़र गई है दर्दे गम की बरसात ,
हर पल में न जाने कितनी बार मरते रहे ।

lamha dar lamha u imtehaan diya na karo..
dard-e-duri bhi u saha na karo..
had se guzer jaye jab dard-o-gam ki barsat
dil se purkaro hame..aur paas aa jaya karo...!!

निवेदिता Fri Jun 17, 01:01:00 pm  

दर्द की इन्तिहा .......
सादर !

prerna argal Fri Jun 17, 01:23:00 pm  

bahut hi khoobsoorat najm.badhaai aapko.


please visit my blog.thanks.

अनुपमा त्रिपाठी... Fri Jun 17, 06:58:00 pm  

bahut sunder rachna ...
kam shabdon me ..gahare dard ka varnan ....

कुश्वंश Fri Jun 17, 07:38:00 pm  

जिन्दगी एक इम्तिहान है हमें इसे देना ही होगा ,भावभीनी पंक्तिया

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